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Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 03 अगस्त 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 03 अगस्त 2024
03 अगस्त 2024 दिन शनिवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण पुष्य नक्षत्र से चलकर आश्लेषा नक्षत्र में दिन में 11:23 AM बजे चले जाएंगे। इसका स्त्री.-स्त्री. चन्द्र-चन्द्र योग, खर वाहन, नीरा नाड़ी, जिसका स्वामी शुक्र है। इससे वायु चलने का अथवा वायु प्रवाह के साथ ही घोर वर्षा का भी योग रहेगा। आप सभी सनातनियों को “मास शिवरात्रि के पावन व्रत” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शनिवार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 03:50 PM तक उपरांत अमावस्या
✏️ तिथि स्वामी : चतुर्दशी तिथि के देवता हैं शंकर। इस तिथि में भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों को प्राप्त कर लेता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 11:59 AM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी : पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी ग्रह बृहस्पति और राशि स्वामी बुध हैं. नक्षत्र की देवी अदिति हैं।
⚜️ योग – वज्र योग 11:00 AM तक, उसके बाद सिद्धि योग
प्रथम करण : शकुनि – 03:50 पी एम तक
द्वितीय करण : चतुष्पाद – 04:12 ए एम, अगस्त 04 तक नाग
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:25:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:35:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:19 ए एम से 05:02 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:41 ए एम से 05:44 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:42 पी एम से 03:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:10 पी एम से 07:32 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:10 पी एम से 08:14 पी एम
💧 अमृत काल : 09:29 ए एम से 11:09 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, अगस्त 04 से 12:48 ए एम, अगस्त 04_

🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मं‍त्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : केर पूजा (त्रिपुरा)/ आडि अमावस्या (तमिलनाडु)/ अमावस्या प्रारंभ दोपहर 03.50/ महात्मा गांधी के पुत्र देवदास मोहनदास गांधी स्मृति दिवस, लौंग सिंड्रोम जागरूकता दिवस, हिंदी कवि मैथिली शरण गुप्त जन्म दिवस, राष्ट्रीय तरबूज दिवस, हृदय प्रत्यारोपण दिवस, श्रीलसनातन गोस्वामी का तिरोभाव दिवस, वायु-परीक्षा दिवस, भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह जन्मोत्सव, विश्व स्तनपान सप्ताह
✍🏼 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗽 Vastu tips_
सप्ताह में एक बार घर में गूगल का धुंआ करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में खुशियों का आगमन होता है और नेगेटिव ऊर्जा बाहर होती है। घर में सरसों के तेल के दीये में लौंग डालकर जलाना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। मां लक्ष्मी को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। तवे पर रोटी सेंकने से पूर्व दूध के छींटें मारना शुभ माना गया है। मान्यता है कि दूध के छींटे से निकलने वाला धुंआ घर से नेगेटिव ऊर्जा को बाहर करता है और परिवार में खुशहाली आती है।
पहली रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। घर में खुशहाली आती है। वास्तु के अनुसार, घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा की गैलरी में या पूजा स्थान पर होना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
⚜️ जीवनोपयोगी कुंजियां ♻️
अचानक से पर्सनालिटी में बदलाव आना
पार्टनर की पर्सनालिटी में एकदम से बदलाव आना भी चिंता का विषय हो सकता है। अगर आपका पार्टनर अचानक से जरूरत से ज्यादा पर्सनल स्पेस की डिमांड करने लगा है तो हो सकता है कि वो किसी और से दिल लगा बैठा हो। बातें छुपाना भी इसी बात की तरफ इशारा करता है कि आप दोनों के बीच किसी तीसरे की एंट्री हो चुकी है।
कम होती जा रही है इन्वॉल्वमेंट
अगर आपका पार्टनर आपकी किसी भी बात में इंटरेस्ट नहीं दिखा रहा है या फिर आपकी लाइफ में उसकी इन्वॉल्वमेंट कम होती जा रही है तो हो सकता है कि वो आपको धोखा दे रहा हो। अगर आपका पार्टनर आपके करीब आने से बच रहा है तो भी आपको सावधान हो जाना चाहिए। आपके पार्टनर की अक्सर झूठ बोलने की आदत भी चीटिंग का संकेत हो सकती है।
💉 आरोग्य संजीवनी_ 🩸
नींद में खर्राटे आयें तो सावधान !
40 प्रतिशत लोगों को खर्राटे थकान के कारण आते हैं और 60 प्रतिशत लोगों को जो खर्राटे आते हैं वे संकेत देते हैं कि शरीर में रोग जमा हो रहा है | इसका जल्दी इलाज करो, नहीं तो ह्रदयघात (heart attack), उच्च रक्तचाप ( hypertension), निम्न रक्तचाप (low B.P.) की समस्या पैदा हो सकती है | किसी भी थोड़ी-सी बीमारी में ज्यादा धक्का लग सकता है |
खर्राटे आते हैं तो उनको नियंत्रित करने का उपाय बताता हूँ | 5 ग्राम गुड़, 10 मि.ली. अदरक का रस व संतकृपा चूर्ण मिला के थोडा-थोडा लो | खर्राटे बंद हो जायेंगे, कफ और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित हो जायेगा | 21 दिन करो | फिर 5-10 दिन छोडो, फिर करो | नाड़ियाँ साफ़ हो जायेंगी | केला, फलों का र्स, मिठाई- इनका सेवन नहीं करना |
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
देवी षष्ठी को बच्चों का रक्षक माना जाता है। इनका वाहन काली बिल्ली है।
नवजात के छठी मनाने के पीछे का कारण ये हैं। हिंदू मान्यता है कि नवजात के जन्म के षष्ठ दिन ये आकर बच्चे के मस्तक में उसका भाग्य लिख के जायेंगी।[1]इन्हे कार्तिकेय की पत्नी भी कहा गया है।
वैदिक काल से इन्हे माना जा रहा है और इनके रूप और संंबंधित कथाओं में बदलाव आते रहे हैं।
दो वैदिक देवियों को जोड़ कर इनकी मान्यता शुरु की गयी – सिनिवली कुहू (अमवस्या और उर्वरता की देवी) और श्री लक्ष्मी |
कई जगह इनका नाम देव सेना भी है |
एक प्रसिद्ध लोक कथा इन से जुड़ी है – एक महिला ससुराल में खाना हटा लेती थी और ससुराल वालों द्वारा अपमानित होने के डर से, उसने इसे एक काली बिल्ली को दोषी ठहराया, जिसे चोरी करने के लिए विधिवत दंड दिया गया था।
संयोग से बिल्ली सतवई या ष्ष्ठी का वाहन थी। बिल्ली ने गलत तरीके से आरोपी होने का बदला लेने का फैसला किया और उस महिला के बच्चों को पैदा होते ही चोरी करना शुरू कर दिया। बिल्ली अपने बच्चों को ले जाती और सतवई को दे देती। इस प्रकार उसने अपने छह बेटों को चुरा लिया। जब बहू को अहसास हुआ, तो उसने देवी सतवई से प्रार्थना की और क्षमा मांगी। सतवई ने बहू को चावल के आटे से बिल्ली की मूर्तियां गढ़ने की सलाह दी और इसे पवित्र धागे को देवी की प्रतिमा से बाँधकर दोनों की पूजा करने को कहा।
बच्चा पैदा हो जाता है तो पवित्र धागे को नए जन्मे बच्चे को सतवाई के निशान के रूप में बांधना चाहिए। ऐसा व्रत साथ करना चाहिए, जिसे नई माता को छठे दिन केवल दूध और फल पीकर रखना चाहिए।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

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