Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 04 जनवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 04 जनवरी 2025
🤷🏻♀️ स्कंद षष्ठी 2025 डेट और टाइम
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 04 जनवरी को देर रात 10 बजे से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 05 जनवरी को रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा। इस प्रकार 05 जनवरी को स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
🌨️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार पौष माह के शुक्ल पक्ष पंचमी पंचमी तिथि 10:01 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र शतभिषा 09:23 PM तक उपरांत पूर्वभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – शतभिषा नक्षत्र स्वामी राहु है वहीं राशि स्वामी शनि है।शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुणदेव है।
⚜️ योग – सिद्धि योग 10:08 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : बव – 10:51 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 10:00 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:46:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:14:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:26 ए एम से 06:20 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:53 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:05 पी एम से 12:47 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:10 पी एम से 02:52 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:35 पी एम से 06:02 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:38 पी एम से 06:59 पी एम
💧 अमृत काल : 02:29 पी एम से 04:01 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:54 ए एम, जनवरी 05
❄️ रवि योग : 09:23 पी एम से 07:15 ए एम, जनवरी 05
🚕 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सवाकिलो तिल का तेल चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवियोग/ पंचक जारी/ अंतर्राष्ट्रीय विश्व ब्रेल दिवस, प्रवासी भारतीय दिवस, विश्व हिंदी दिवस, संगीतकार राहुल देव बर्मन स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली शहीद दिवस, मराठा हाई स्कूल स्थापना दिवस, संस्कृत पंडित विद्वान राजाराम शास्त्री भागवत विचारक स्मृति दिवस, अभिनेत्री आदित्य पंचोली जन्म दिवस, जयंतीलाल छोटेलाल शाह पुण्य तिथि, एम. पतंजलि शास्त्री जन्म दिवस, लेखक सरोजिनी साहू जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips_ 🌹
बच्चों का बिस्तर आपको उनके कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने में लगाना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि दरवाजे के सामने बच्चों का बेड न लगा हो। सोते समय बच्चों का सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इससे बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और वो ऊर्जा से भरे रहते हैं।
इस दिशा में हो पढ़ने का समान और टेबल अगर आप चाहते हैं कि, बच्चे का मन पढ़ाई में लगे और उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिले, तो आपको स्टडी टेबल और किताबें आदि बच्चों के कमरे के उत्तर-पूर्व कोने में लगाना चाहिए।
बच्चों के कमरे की दिवारों को दें ये रंग बच्चों के कमरे को आप पीला, हरा या आसमानी नीला रंग दे सकते हैं। कभी भी डार्क कलर्स का इस्तेमाल बच्चों के कमरे में नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे पर नकारात्मकता हावी हो सकती है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तनाव और चिंता कम करना: तुलसी तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है।
रक्तचाप नियंत्रण: तुलसी रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करती है।
मधुमेह नियंत्रण: तुलसी मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करती है।
कैंसर रोकथाम: तुलसी में उपस्थित यौगिक कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करते हैं।
इम्यून सिस्टम को मजबूत करना: तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करती है।
त्वचा और बालों के लिए लाभकारी: तुलसी त्वचा और बालों के लिए लाभकारी है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
हड्डियों की आवाज से ऐसे पायें छुटकारा
मेथी का दाने अगर आपको अक्सर यह समस्या होती है, तो जैसा हमने बताया यह गठिया का या हड्डियों के जोड़ों में लुब्रिकेंट की कमी का संकेत हो सकते हैं। इसलिए इससे समय पर राहत पाना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप कई घरेलू उपाय ट्राई कर सकते हैं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए रात को आधा चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें और सुबह मेथी दानों को चबा-चबा कर खाएं। उसके बाद पानी पी लें। इससे हड्डियों के बीच एयर बबल्स की समस्या खत्म हो सकती है।
सोंठ वाला दूध -कई बार आवाज आने के मतलब हड्डियों के जोड़ों में लुब्रिकेंट की कमी का संकेत हो सकता है। अक्सर देखा जाता है कि ज्यादा उम्र के लोगों की हड्डियों से कट-कट की आवाज आती है और दर्द होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए और कैल्शियम की पूर्ति के लिए एक गिलास दूध में एक चौथाई चम्मच सौंठ डालकर उबालें ओर उसमे थोड़ी सी हल्दी मिलाकर हल्का कुनकुना रहने पर इसका सेवन करें। इसके अलावा एक कटोरी ताजा दही में एक चम्मच शहद मिलाकर लगातार एक महीने तक सेवन करने से हड्डियां फौलाद की तरह मजबूत और सख्त हो जाती है…
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार की बात है। एक राज्य का राजा था। उसे शिकार करने का बहुत ही शौक था। एक दिन वह राजा अपने सरदार और कुछ सैनिकों के साथ शिकार के लिए जंगल की ओर निकला। वह काफी दूर तक शिकार की खोज में चले गये।
ज्यादा दूर तक चलने से सभी को प्यास लगने लगी। सभी ने जंगल में पानी खोजना शुरू किया। फिर एक सैनिक को रास्ते पर एक कुआं दिखाई दिया। सैनिक ने राजा को यह बताया कि वहां पर एक कुआं है, जहां से हम अपनी प्यास को शांत कर सकते हैं।
राजा ने उस सैनिक को आदेश दिया कि वहां से उसके लिए पानी लाएं। सैनिक राजा के आदेश की पालना करते हुए उस कुएं के पास गया। वहां पर सैनिक ने देखा कि एक नेत्रहीन वृद्ध व्यक्ति रास्ते से जाने वाले लोगों की जलसेवा कर रहा है। सैनिक उस नेत्रहीन वृद्ध व्यक्ति के पास गया और बोला “ऐ पनिहारे एक लोटा पानी दे, हमें कहीं आगे जाना हैं।”
ये सुनकर उस वृद्ध व्यक्ति ने जवाब दिया “यहां से चला जा मुर्ख, मैं ऐसे लोगों को पानी नहीं पिलाता।” ये सुनकर सैनिक तुरंत वहां से चला गया। ये बात सैनिक ने राजा के सरदार को जाकर बताई। फिर सरदार उस नेत्रहीन वृद्ध व्यक्ति के पास गया और कहा “ऐ बूढ़े, हमें प्यास लगी है, एक लौटा पानी दे।” ये सुनकर उस नेत्रहीन वृद्ध व्यक्ति ने फिर पानी पिलाने से मना कर दिया।
राजा की प्यास बढ़ती ही जा रही थी। राजा ने अपने सरदार से पानी के बारे में पूछा तो सरदार ने राजा से कहा कि उस कुएं पर एक नेत्रहीन व्यक्ति है जो पानी पीने से मना कर रहा है।
ये सुनकर राजा अपने सैनिक और सरदार के साथ उस नेत्रहीन वृद्ध व्यक्ति के पास जाता है और उस वृद्ध व्यक्ति से कहता है “बाबा जी, हमें बहुत प्यास लगी है, गला सुखा जा रहा है। यदि आप थोड़ा पानी पिला देंगे तो आपकी बहुत बड़ी कृपा होगी।”
ये सुनकर उस नेत्रहीन व्यक्ति ने राजा से कहा “आप बैठिये, मैं आपको अभी जल पिलाता हूं।” फिर उस वृद्ध व्यक्ति ने सम्मानपूर्वक राजा को बैठाया और पानी पिलाया। पानी पीने के बाद राजा ने उस वृद्ध व्यक्ति से पूछा कि “आपको कैसे पता चला कि ये सैनिक व सरदार है और राजा मैं हूं”।
तो इसका जवाब उस वृद्ध व्यक्ति ने बहुत ही अच्छे शब्दों में दिया। वृद्ध व्यक्ति ने कहा “इन्सान की पहचान करने के लिए आंखों की जरूरत नहीं होती, उसकी वाणी ही उसकी असली पहचान होती है।”
ये सुनकर वहां पर मौजूद सरदार व उस सैनिक को शर्म महसूस हुई।
इस से हमें ये प्रेरणा मिलती है कि जीवन में वाणी से बढ़कर कुछ नहीं होता। यदि हमारे पास अच्छी वाणी और बोलने का तरीका होगा तो हम अपने जीवन में वो सब हासिल कर सकते हैं जो हम चाहते हैं।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।



