
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 06 दिसम्बर 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
*शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है । *शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
*शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। *शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 👸🏻 शिवराज शक 352_
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शनिवार पौष माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि 09:25 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 08:48 AM तक उपरांत आद्रा 06:13 AM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र के देवता सोम (चंद्रमा के देवता) हैं। इसके अतिरिक्त, इसका स्वामी ग्रह मंगल है, और इस नक्षत्र के कुछ चरणों पर बुध और शुक्र का भी प्रभाव पड़ता है।
⚜️ योग – शुभ योग 11:45 PM तक, उसके बाद शुक्ल योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 11:07 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 09:25 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:37:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:11 ए एम से 06:06 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:39 ए एम से 07:00 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:33 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:49 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:46 पी एम
💧 अमृत काल : 09:18 पी एम से 10:43 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:40 ए एम, दिसम्बर 07
🌸 द्विपुष्कर योग : 07:00 ए एम से 08:48 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – द्विपुष्कर योग/ महापरिनिर्वाण दिवस/ संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर पुण्य तिथि, अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद का विध्वंस दिवस, संत निकोलस दिवस, राजनीतिज्ञ यशवंत सिन्हा जन्म दिवस, अभिनेता करण दीवान जन्म दिवस, लेखक मेजर हरि पाल सिंह अहलूवालिया जन्म दिवस, भारतीय केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जन्म दिवस, भारतीय होमगार्ड स्थापना दिवस, मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता बृजलाल वियाणी जन्म दिवस, अभिनेत्री रीना राय स्मृति दिवस, (परमवीर चक्र सम्मानित) मेजर होशियार सिंह स्मृति दिवस, नागरिक सुरक्षा दिवस, गृह रक्षा दिवस, खनिक दिवस, राष्ट्रीय साहूकार दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।। 🏘️ *_Vastu tips* 🏚️
वास्तु और फेंगशुई दोनों में ऊंट की मूर्ति को शुभ माना गया है। यह दृढ़ता, धैर्य और सफलता का प्रतीक है। ऊंट की मूर्ति को ड्राइंग रूम के उत्तर-पश्चिम दिशा में रखने से करियर और बिजनेस में प्रगति होती है और रुके हुए काम बनने लगते हैं।
*हंस का जोड़ा: दांपत्य जीवन में मिठास वास्तु के अनुसार हंस दांपत्य प्रेम और सामंजस्य का प्रतीक है। हंस के जोड़े की मूर्ति रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और संबंधों में सुधार आता है। बेडरूम में खूबसरत हंस के जोड़े की मूर्ती रखना सबसे शुभ माना गया है। जबकि, गेस्ट रूम में रखने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। *गाय: सौभाग्य-सकारात्मकता का प्रतीक गाय को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना गया है। घर में गाय की मूर्ति रखना अत्यंत शुभ होता है। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और भाग्य मजबूत होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, संतान प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए पीतल की गाय की मूर्ति घर में रखना शुभ माना गया है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अंकुरित मूंग दाल खाने के फायदे:
*पाचन में मदद करता है: अंकुरित मूंग का सेवन पाचन में मदद करता है। अंकुरित होने की प्रक्रिया कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को तोड़ देती है, जिससे शरीर के लिए उन्हें पचाना आसान हो जाता है। इससे न केवल पेट फूलने और गैस की संभावना कम होती है, बल्कि न्यूट्रिएंट्स के बेहतर एब्जॉर्प्शन में भी मदद मिलती है। *वज़न घटाने में मदद करता है: जो लोग वज़न घटाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए अंकुरित मूंग दाल बेहतरीन है। मूंग दाल में मौजूद फाइबर न सिर्फ़ पाचन में मदद करता है, बल्कि पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे कुल कैलोरी इनटेक कम हो सकता है। ज़्यादा फाइबर वाली डाइट पेट भरने और भूख कम करके वज़न घटाने और उसे मैनेज करने में काफ़ी मदद कर सकती है।
*दिल की सेहत को बेहतर बनाता है: अंकुरित मूंग दाल में एंटीऑक्सीडेंट, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं। ये न्यूट्रिएंट्स ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने का काम करते हैं। मूंग दाल में एंटीऑक्सीडेंट एक्टिविटी काफ़ी ज़्यादा होती है। ये एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ करने में मदद करते हैं। 🥂 *आरोग्य संजीवनी* 🍶 कैसे और कब सेवन करें:
अश्वगंधा चूर्ण सेवन का समय: रात को सोने से पहले या सुबह खाली पेट। मात्रा: 1-2 चम्मच (5-10 ग्राम)। कैसे लें: गुनगुने दूध या पानी के साथ। लाभ: तनाव, थकान, अनिद्रा, और कमजोरी को दूर करता है। यह मानसिक और शारीरिक शक्ति बढ़ाने में सहायक है।
सफेद मूसली चूर्ण सेवन का समय: सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले। मात्रा: 1 चम्मच (5 ग्राम)। कैसे लें: गुनगुने दूध या शहद के साथ।* लाभ: यह यौन शक्ति और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
कौंच के बीज का चूर्ण सेवन का समय: सुबह नाश्ते के बाद या रात को। मात्रा: 1-2 चम्मच (5-10 ग्राम)। कैसे लें: दूध के साथ मिलाकर। लाभ: यह प्रजनन स्वास्थ्य सुधारता है, हॉर्मोन संतुलन बनाए रखता है और मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाता है।
👉🏼 इन तीनों का संयोजन कैसे लें:
मिश्रण: तीनों चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाएं।
मात्रा: 1-2 चम्मच (5-10 ग्राम)।
सेवन का समय: सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले।
कैसे लें: गुनगुने दूध में मिलाकर।
📚 गुरु भक्ति योग 📚
ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व
*बुध एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के सानिध्य में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के साथ होता है तो उसे अस्त माना जाता है। यदि बुध भी 14 डिग्री या उससे कम में सूर्य के साथ हो, तो उसे अस्त माना जाता है। … बुध ग्रह कालपुरुष की कुंडली में तृतीय और छठे भाव का प्रतिनिधित्व करता है। *ज्योतिष में बुध ग्रह को एक शुभाशुभ ग्रह माना गया है अर्थात ग्रहों की संगति के अनुरूप ही यह फल देता है। *यदि बुध ग्रह शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र और बली चंद्रमा) के साथ होता है तो यह शुभ फल देता है और क्रूर ग्रहों (मंगल, केतु, शनि राहु, सूर्य) की संगति में अशुभ फल देता है।
*बुध ग्रह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। कन्या इसकी उच्च राशि भी है जबकि मीन इसकी नीच राशि मानी जाती है। _27 नक्षत्रों में बुध को अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है। हिन्दू ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, संवाद, गणित, चतुरता और मित्र का कारक माना जाता है। सूर्य और शुक्र, बुध के मित्र हैं जबकि चंद्रमा और मंगल इसके शुत्र ग्रह हैं।
*बुध का वर्ण हरा है और सप्ताह में बुधवार का दिन बुध को समर्पित है। *बुध ग्रह का मानव जीवन पर प्रभाव* *शारीरिक रूप रेखा एवं स्वभाव – जिस जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह लग्न भाव में स्थित हो, वह व्यक्ति शारीरिक रूप से सुंदर होता है। देखने में व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से कम आयु का दिखता है तथा उसकी आँखें चमकदार होंगी। *लग्न का बुध व्यक्ति को स्वभाव से चालाक, तर्कसंगत, बौद्धिक रूप से धनी और कुशल वक्ता बनाता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति का स्वभाव भी सौम्य होता है और वह कई भाषाओं का ज्ञाता होता है।
*व्यवसाय क्षेत्र में भी ऐसे जातक सफल होते हैं। *प्रथम भाव में बैठा बुध ग्रह जातक व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।



