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Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 07 दिसम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 07 दिसम्बर 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें। इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है। रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें । रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_

☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – रविवार पौष माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 06:25 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 04:11 AM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति (गुरु) हैं, जो ज्ञान, आध्यात्मिकता और समृद्धि के कारक हैं, और इसकी देवी अदिति हैं, जो असीम पालन-पोषण और व्यापकता का प्रतीक हैं।
⚜️ योग – शुक्ल योग 08:07 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
प्रथम करण : वणिज – 07:50 ए एम तक विष्टि – 06:24 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 05:08 ए एम, दिसम्बर 08 तक बालव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:38:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:12 ए एम से 06:06 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:39 ए एम से 07:01 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:33 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:22 पी एम से 05:49 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:46 पी एम
💧 अमृत काल : 01:59 ए एम, दिसम्बर 08 से 03:27 ए एम, दिसम्बर 08
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:46 पी एम से 12:40 ए एम, दिसम्बर 08
🌸 रवि पुष्य योग : 04:11 ए एम, दिसम्बर 08 से 07:02 ए एम, दिसम्बर 08
सर्वार्थ सिद्धि योग : 04:11 ए एम, दिसम्बर 08 से 07:02 ए एम, दिसम्बर 08
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि पुष्य योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ गणेश संकट चतुर्थी/ चन्द्रोदय 08.34/ अभिनेता धर्मवरपु सुब्रह्मण्यम जन्म दिवस, फिल्म निर्देशक सुरेंद्र रेड्डी जन्म दिवस, भारतीय हास्य अभिनेता धर्मवरपु सुब्रह्मण्यम जन्म दिवस, प्रमुख स्वामी महाराज जन्म जयन्ती, अभिनेत्री दिव्या भटनागर स्मृति दिवस, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दीप नारायण सिंह पुण्य तिथि, मैसूर शासक हैदर अली जन्म दिवस, भारतीय क्रांतिकारी जतीन्द्रनाथ मुखर्जी जयन्ती, जांबाज सैनिक गोविन्द सिंह राठौड़ जयन्ती, राधाकमल मुखर्जी जन्म दिवस, सशस्त्र सेना झंडा दिवस, भारतीय राजनेता अर्जुन राम मेघवाल जन्म दिवस, राष्ट्रीय कपास कैंडी दिवस, अंतर्राष्‍ट्रीय नागरिक विमानन दिवस (आईसीएओ)
✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है। 🏘️ *Vastu tips* 🏚️
शयनकक्ष में क्या रखें और क्या न रखें पूर्व या उत्तर की दीवार पर राधा–कृष्ण अथवा शांत प्राकृतिक दृश्य लगाना शुभ फलदायी है। पारिवारिक चित्र दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर स्थापित करना उचित है। बिस्तर के सम्मुख आईना न रखें; यह मानसिक विचलन और ऊर्जा क्षय का कारक होता है। कमरे में टूटी अथवा अनुपयोगी वस्तुएं न रखें यह रुकावट और नकारात्मकता बढ़ाती हैं।
*रसोई रसोईघर दक्षिण-पूर्व (अग्निकोण) में सर्वाधिक शुभ—यह अग्नि तत्व का स्वाभाविक स्थान है। *रसोई उत्तर-पूर्व में होने पर आर्थिक रुकावटें उत्पन्न हो सकती हैं। परिवर्तन संभव न हो तो: चूल्हा ऐसा रखें कि भोजन बनाते समय मुख पूर्व दिशा में रहे। रसोई में लाल रंग का छोटा बल्ब जलाएं, अग्नि तत्व को संतुलित करने हेतु।
*शौचालय/स्नानघर की दिशा उचित स्थान—दक्षिण-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा। *गलत दिशा में टॉयलेट होने पर दोष एवं उपाय उत्तर-पूर्व में टॉयलेट—आर्थिक, मानसिक व आध्यात्मिक बाधाएँ उत्पन्न करता है।
*उपाय: दरवाजे पर वास्तु टेप, भीतरी दीवारों पर हल्का नीला रंग, तथा समुद्री नमक रखें। *दक्षिण-पश्चिम में टॉयलेट—संबंधों में तनाव और अस्थिरता का कारण।
*उपाय: इस दिशा में लाल प्रकाश, अथवा पिरामिड स्थापित करें। *ब्रहमस्थान (घर का केंद्र)—टॉयलेट होने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती हैं।
*उपाय: टॉयलेट में समुद्री नमक का कटोरा रखें और द्वार सदैव बंद रखें। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ सुक्कू कॉफी पीने के फायदे- सुक्कू कॉफी आपकी गट हेल्थ को सुधारने में कारगर साबित हो सकती है। गैस, अपच या फिर पेट में भारीपन जैसी पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए सुक्कू कॉफी का सेवन किया जा सकता है। सुक्कू कॉफी में मौजूद तत्व न केवल हड्डियों के लिए बल्कि आपकी मांसपेशियों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। यानी आप जोड़ों के दर्द या फिर मसल पेन से छुटकारा पाने के लिए सुक्कू कॉफी पी सकते हैं। *सेहत के लिए वरदान- हार्ट हेल्थ को मजबूत बनाए रखने के लिए भी सुक्कू कॉफी का सेवन किया जा सकता है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल पर काबू पाने के लिए सुबह-सुबह सुक्कू कॉफी पीकर दिन की शुरुआत की जा सकती है। इसके अलावा इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए भी सुक्कू कॉफी को डाइट प्लान का हिस्सा बनाया जा सकता है।
🩸 *आरोग्य संजीवनी* 🍶
अजवाइन का पौधा एक बहु उपयोगी औषधीय पौधा है,यह हर घर में,लगाना चाहिए। यह एक आसानी से लगने वाला पौधा भी है इसे लगाने के लिए जड़ की आवश्यकता नहीं सिर्फ एक मोटी डंठल उखाड़कर पत्तियों सहित, किसी दूसरे गमले में लगा दो तो यह धीरे-धीरे बढ़ने लगता है इससे कई फायदे होते हैं।
👉 यह पूरे वातावरण को अपनी खुशबु से भर देता है जिससे मच्छर मक्खी तथा छोटे-मोटे कीटाणु भाग जाते हैं।
👉 यह सर्दी जुकाम में बहुत फायदा करता है, इसकी 7 या 8 पत्तियों को पीसकर इसमें एक चुटकी काला नमक मिलाकर धीमी गैस पर गरम करते हैं। तथा हल्का गुनगुना पी लेने पर कैसा भी सर्दी जुकाम हो, चला जाता है खासकर यह बच्चों के लिए बहुत उपयोगी दवा है।
👉 इनकी पत्तियों को कच्चा खाने से भी मुंह की दुर्गंध जाती है।
👉 इसकी पत्तियां तोड़कर बेसन की पकौड़ी भी बनाई जाती है जो अत्यंत स्वादिष्ट होती है व सर्दियों में फायदा करती है। ज्यादा सर्दियों में इसको खाने से यह शरीर को गर्म बनाए रखती है पर इसकी मात्रा लिमिट होनी चाहिए।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार गोपियों ने श्री कृष्ण से कहा–‘हे कृष्ण ! हमें अगस्त्य ऋषि को भोग लगाने को जाना है, और ये यमुना जी बीच में पड़ती हैं। अब तुम बताओ हम कैसे जायें ?’
*भगवान श्री कृष्ण ने कहा–‘जब तुम यमुना जी के पास जाओ तो उनसे कहना कि, हे यमुनाजी, अगर श्री कृष्ण ब्रह्मचारी हैं तो हमें रास्ता दो।’ *गोपियाँ हँसने लगी कि, लो ये कृष्ण भी अपने आप को ब्रह्मचारी समझते है, सारा दिन तो हमारे पीछे-पीछे घूमता है, कभी हमारे वस्त्र चुराता है कभी मटकियाँ फोड़ता है।’ खैर फिर भी हम बोल देंगी।
*गोपियाँ यमुना जी के पास जाकर कहती हैं–‘हे यमुनाजी ! अगर श्री कृष्ण ब्रह्मचारी हैं तो हमें रास्ता दें।’ और गोपियों के कहते ही यमुनाजी ने रास्ता दे दिया। *गोपियाँ तो सन्न रह गई ये क्या हुआ ? कृष्ण और ब्रह्मचारी ? अब गोपियाँ अगस्त्य ऋषि को भोजन करवा कर वापस आने लगीं तो उन्होंने अगस्त्य ऋषि से कहा–‘मुनिवर ! अब हम घर कैसे जायें ? यमुनाजी बीच में हैं।’
*अगस्त्य ऋषि ने कहा–‘तुम यमुना जी को कहना–‘अगर अगस्त्यजी निराहार हैं तो हमें रास्ता दें।’ *गोपियाँ मन में सोचने लगी–‘अभी हम इतना सारा भोजन लाई सो सब गटक गये और अब अपने आप को निराहार बता रहे हैं ?’
*गोपियाँ यमुना जी के पास जाकर बोली–‘हे यमुनाजी ! अगर अगस्त्य ऋषि निराहार हैं तो हमे रास्ता दें।’ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को फॉलो और लाईक करें तथा हमारा व्हाट्सएप चैनल ज्वॉइन करें। चैनल का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। यमुनाजी ने उन्हें तुरन्त रास्ता दे दिया। *गोपियाँ आश्चर्य करने लगीं–‘जो खाता है वो निराहार कैसे हो सकता है ? और जो दिन रात हमारे पीछे-पीछे फिरता है वो कृष्ण ब्रह्मचारी कैसे हो सकता है ?’ इसी उधेड़बुन में गोपियों ने कृष्ण के पास आकर फिर से वही प्रश्न किया।
*भगवान श्री कृष्ण ने कहा–‘गोपियों मुझे तुमारी देह से कोई लेना देना नहीं है, मैं तो तुम्हारे प्रेम के भाव को देख कर तुम्हारे पीछे आता हूँ। मैंने कभी वासना के तहत संसार नहीं भोगा मैं तो निर्मोही हूँ। इसीलिए यमुना ने आप को मार्ग दिया।’ *तब गोपियाँ बोली–‘भगवन् ! मुनिराज ने तो हमारे सामने भोजन ग्रहण किया फिर भी वो बोले कि अगत्स्य आजन्म उपवासी हो तो हे यमुना मैया मार्ग दें, और बड़े आश्चर्य की बात है कि यमुना ने मार्ग दे दिया ?’
*_श्री कृष्ण हँसने लगे और बोले–‘अगत्स्य आजन्म उपवासी हैं। अगत्स्य मुनि भोजन ग्रहण करने से पहले मुझे भोग लगाते हैं। उनका भोजन में कोई मोह नहीं होता उनको कतई मन में नहीं होता कि मैं भोजन करूँ या भोजन कर रहा हूँ। वो तो अपने अन्दर रह रहे मुझे भोजन करा रहे होते हैं, इसलिए वो आजन्म उपवासी हैं।’
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है। शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।।

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