Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 30 अक्टूबर 2025
30 अक्टूबर 2025 दिन गुरुवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी तिथि है। आज अक्षय नवमी का महान पर्व है। अक्षय नवमी को जो कुछ भी हम करते हैं वह अक्षय हो जाता है, अर्थात उसका नाश नहीं होता है। इसीलिए किसी भी मनुष्य को चाहिए कि ऐसे समय में कोई भी किसी भी तरह का शुभ कार्य कम ना करें। वैसे हमारे वैदिक सनातन धर्म में इस दिन करने योग्य कार्य हमारे ऋषियों ने बता रखा है। आज हमें कुष्मांड के अंदर श्रवण की कोई वस्तु छुपा कर गुप्त दान किसी ब्राह्मण को भोज के उपरांत दान कर देना चाहिए। इससे कुछ मंडन के साथ-साथ गुप्त दान का भी पूर्ण फल प्राप्त हो जाता है और वह अक्षय भी हो जाता है। लिखा है:- रत्नगर्भकुष्मांडादि दानम् ।धात्रीमूले ब्राह्मण भोजनम्।। आज नवमी को अयोध्या और मथुरा की परिक्रमा भी करनी चाहिए। श्रीविष्णुत्रिरारंभ: आज सौवर्णमयीं श्रीविष्णुमूर्ति तुलसींच संपूज्य द्वादश्यां दानम्। आज बंगाल में जगद्धात्री पूजन। उड़ीसा में आज की नवमी को दुर्गा नवमी तथा आंवला नवमी भी कहा जाता है । आज गौरी व्रत भी है। आज जैन लोगों का णमोकार 34 व्रत एवं 34 उपवास भी है। आज रवि योग एवं यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “आंवला नवमी अथवा अक्षय नवमी के पावन पर्व” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 10:06 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 06:33 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्रमा है और इसका देवता भगवान विष्णु हैं।
⚜️ योग – शूल योग 07:20 AM तक, उसके बाद गण्ड योग 06:15 AM तक, उसके बाद वृद्धि योग
⚡ प्रथम करण : बव – 10:06 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 10:10 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:29: 00
🌅 सूर्यास्त – शाम: 05:39: 00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:40 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:14 ए एम से 06:32 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:55 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:37 पी एम से 06:03 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:37 पी एम से 06:55 पी एम
💧 अमृत काल : 07:42 ए एम से 09:22 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 31
❄️ रवि योग : 06:33 पी एम से 06:32 ए एम, अक्टूबर 31
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ दुर्गा अष्टमी/ गोपाष्टमी/ कुष्मांड नवमी/ भारत संयुक्त राष्ट्र सम्मिलित दिवस, अभिजीत भट्टाचार्य जयन्ती, राष्ट्रीय कैंडी कॉर्न दिवस, विश्व बचत दिवस, विश्व मितव्ययिता दिवस, जानकी बोदीवाला जन्म दिवस, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ प्रमोद महाजन जन्म दिवस, भूतपूर्व राज्यपाल भाई महावीर जन्म दिवस, प्रसिद्ध अभिनेता विनोद मेहरा स्मृति दिवस, विश्व मितव्ययिता दिवस, स्वामी दयानंद सरस्वती स्मृति दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपतराय स्मृति दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌸
नारियल से जुड़ा चमत्कारी उपाय आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, दिवाली से एक दिन पहले जटा वाला नारियल ले आएं। दीपावली के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और बिना आंखें खोले, बिना किसी से बात किए उस नारियल को लेकर पास के किसी तालाब या नदी के किनारे जाएं। वहां एक कोने में चुपचाप नारियल को दबाकर पानी में रखें। इस दौरान प्रार्थना करें कि मां लक्ष्मी के साथ आपको लेने आएंगे।
*सूर्यास्त के बाद करें नारियल की पूजा दिवाली के दिन सूर्यास्त के समय एक लाल कपड़ा अपने साथ रखें और उसी स्थान पर जाएं, जहां नारियल दबाया था। फिर उसे निकालकर लाल कपड़े में रखें और पवित्र जल से स्नान कराएं। इसके बाद नारियल को घर ले आएं। अब इस नारियल को तिलक करें, विधिवत पूजन करके धूप-दीप से आरती करें। अगले दिन सुबह उस नारियल को घर में धन रखने वाली जगह पर रख दें। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ अश्वगंधा को शारीरिक प्रदर्शन में सुधार करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि अश्वगंधा एरोबिक प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार प्रदान करता है, जो कि कार्डियोरैसपायरी और एलीट एथलीटों के कार्डियोवैस्कुलर सहनशीलता के संबंध में है। *_200 ग्राम गाय के दूध और 400 मिलीलीटर पानी के साथ 10 ग्राम अश्वगंधा पाउडर को पकाएं। जब केवल दूध रह जाए, तो इसे छान लें। गुनगुना होने पर सेवन करें। नियमित रूप से सुबह 8 सप्ताह तक इसे पीने से मांसपेशियों की वृद्धि को बढ़ावा मिलकर वजन बढ़ता है। *अश्वगंधा के साथ सफेद मूसली, गोखरू, शतावरी, कवचबीज जैसी औषधीयों का इस्तेमाल कर सकते है।उचित खानपान और व्यायाम के साथ इसका सेवन वजन बढ़ाने में फायदेमंद है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
*यूफोर्बिया हर्टा, जिसे बड़ी दूधी, अस्थमा वीड या स्नेक वीड कहा जाता है, एक औषधीय पौधा है जो अनेक रोगों में प्राकृतिक उपचार के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसमें पाए जाने वाले औषधीय तत्व श्वसन, पाचन, त्वचा, और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी कई समस्याओं में लाभकारी हैं। *यह पौधा खांसी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, बुखार, दस्त और पेट की गड़बड़ी में उपयोगी है। इसके अलावा यह त्वचा रोग, मुंहासे, एक्जिमा, घाव और जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है। पारंपरिक रूप से इसे दूध बढ़ाने, हार्मोन संतुलन, तथा मूत्र संक्रमण में भी सहायक माना गया है। इसके सूजनरोधी और जीवाणुरोधी गुण शरीर की सफाई और संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं।
*इसका उपयोग चाय, काढ़े, या लेप के रूप में किया जाता है, परंतु इसका सेवन सीमित मात्रा में और चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए। अत्यधिक या गलत उपयोग से हानि हो सकती है। *यह पौधा प्रकृति का अनमोल उपहार है — जो सही मार्गदर्शन के साथ आपके स्वास्थ्य को सशक्त बना सकता है।
👉🏼 उपयोग करने के तरीके निम्नलिखित हैं:
चाय के रूप में
*_1-2 ग्राम सूखे यूफोरबिया हिर्टा के पत्तों को 1 कप पानी में उबालें। दिन में अधिकतम 1-2 कप ही पिएं।
*त्वचा पर लगाने के लिए
*ताजा पत्तों को पीसकर पेस्ट बनाएं और इसे त्वचा की समस्याओं या घावों पर लगाएं। *यूफोरबिया हिर्टा की गरम काढ़ा में एक साफ कपड़ा भिगोकर सूजी या सूजन वाली जगह पर लगाएं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
महाराज रघु का विवाह सुनयना नामक कन्या से हुआ। कुछ ग्रंथों में उनकी पत्नी का नाम चंद्रभागा बताया गया है।उनसे उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति ।हुई जिनका नाम था अज।
*अज का विवाह राजकुमारी इंदुमती से हुआ। कई सहस्त्र वर्षों तक शासन करने के बाद उन्हें संसार से विरक्ति हो गयी और उन्होंने अपना सब कुछ दान करने का निश्चय किया।महर्षि वशिष्ठ के सुझाव पर उन्होंने विश्वजीत नामक एक महान यज्ञ किया और अपना समस्त धन, सम्पदा, आभूषण, पात्र और यहाँ तक कि राजसी वस्त्रों का भी दान कर दिया। *वे स्वयं मिट्टी के बर्तनों में भोजन करने लगे और सात्विक जीवन जीने लगे।उसी समय वरतन्तु ऋषि के शिष्य कौत्स नामक ब्राह्मण कुमार उनके पास दान की आशा से आये।कुछ ग्रंथों में कौत्स को महर्षि विश्वमित्र का शिष्य बताया गया है।
*जब वे यज्ञस्थल पर आये और देखा कि महाराज रघु सब कुछ दान कर चुके हैं तो वे वापस जाने लगे।एक ब्राह्मण को इस प्रकार वापस जाता देख कर महाराज रघु ने उन्हेंरोका और उनके आने का प्रयोजन पूछा। तब कौत्स ने कहा-“हे महाराज! मैं आया तो यहाँ दान की आशा से ही था किन्तु देखता हूँ कि आपने अपना सर्वस्व दान कर दिया है इसी कारण आपको मैं किसी दुविधा में नहीं डालना चाहता।” *ये सुनकर महाराज रघु ने कहा-“हे ब्राह्मण कुमार ! मेरे द्वार से एक ब्राह्मण दक्षिणा लिए बिना लौट जाये तो इससे मेरे उज्जवल कुल पर कलंक लगेगा।आपको जो भी चाहिए आप निःसंकोच कहें। मैं आपको वचन देता हूँ कि मैं आपकी दक्षिणा अवश्य दूँगा।”तब कौत्स ने कहा कि उन्हें दक्षिणा में 140000000 (चौदह करोड़) स्वर्ण मुद्राएं चाहिए।
*एक ब्राह्मण को इतना धन मांगता देख रघु आश्चर्य में पड़ गए और उनसे पूछा कि ऐसा क्या कारण है कि आपको इतने धन की आवश्यकता है। *तब कौत्स ने बताया कि उन्होंने अपने गुरु से बार बार गुरुदक्षिणा मांगने का हठ किया जिससे चिढ़कर उनके गुरु ने कहा कि”मैंने तुम्हे 24 विद्याएं पढाई है अतः तुम हर विद्या के लिए मुझे 1000000(एक करोड़) स्वर्ण मुद्रा दो।”
*उसी के लिए मैं आपके पास आया था। तब महाराज रघु ने कौत्स से कहा-“हे ब्राह्मण कुमार ! आप मेरे अतिथिशाला में ३ दिनों तक रुकिए। मैं इन तीन दिनों में किसी भी प्रकार आपकी दक्षिणा का प्रबंध कर दूंगा।” तब कौत्स ने उनकी बात मान ली और वहीँ रुक गए। बाद में महाराज रघु ने अपने महामंत्री से पूछा कि इतना धन कैसे प्राप्त किया जाये। *तब उनके महामंत्री ने कहा कि”हे महाराज ! आपके विश्वजीत यज्ञ के लिए संसार के सभी राजा पहले ही कर दे चुके हैं जिसे आपने दान कर दिया।अब उनसे पुनः कर मांगना न्याय नहीं।”तब महाराज रघु ने कहा कि”यदि ऐसा है तो मैं देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर से कर लूंगा।” तब उनके महामंत्री ने पूछा कि वे तो देवता हैं,उनसे कर कैसे लिया जा सकता है? इस पर महाराज रघु ने कहा कि वे भले हीं देवता हों पर रहते कैलाश के निकट अलकापुरी में हैं जो पृथ्वी पर ही है।
*मैं इस पृथ्वी का सार्वभौम राजा हूँ इसीलिए मेरा कुबेर से कर लेना । न्यायसंगत है। तब उनके महामंत्री ने संदेह जताया कि कदाचित कुबेर उन्हें कर ना दें। ये सुनकर महाराज रघु ने उन्हें अपना रथ सुसज्जित करने को कहा।उन्होंने कहा कि कल प्रातः मैं कुबेर से युद्ध करने जाऊंगा और आज रात्रि इसी रथ पर विश्राम करूँगा। *महाराज रघु रात्रि भर उसी रथ पर सोते रहे और प्रातः जब वे कुबेर पर आक्रमण करने निकलने वाले थे तो उनके महामंत्री ने उन्हें सूचित किया कि महाराज- जहाँ तक दृष्टि जाती है, भूमि स्वर्ण मुद्राओं से भरी दिखती है।रात्रि को यक्षराज कुबेर ने धनवर्षा की है। तब महाराज रघु समझ गए कि यक्षराज कुबेर ने उनका मान रख लिया। उन्होंने कुबेर का आभार व्यक्त किया और कौत्स से कहा कि वे ये सारा धन ले जा सकते हैं।
किन्तु कौत्स ने कहा कि “महाराज! ये धन 24 कोटि से कहीं अधिक है।मैं वचन से बंधा हूँ इसी कारण उससे अधिक धन स्वीकार नहीं कर सकता।” ये सुनकर महाराज रघु ने १४ करोड़ स्वर्ण मुद्राएं कौत्स के साथ भिजवा दी और शेष बचे समस्त धन को अन्य लोगों को दान कर दिया। उस दिन एक बार फिर से उनका प्रताप त्रिलोक ने देखा।तभी से उनका कुल रघुकुल के नाम से विख्यात हुआ और ये कहावत आरम्भ हुई कि-“रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाये पर वचन ना जाई।”कुछ दक्षिण भारतीय ग्रंथों में महाराज रघु और रावण के युद्ध की चर्चा भी आती है।कथा के अनुसार एक बार रावण महाराज रघु से युद्ध करने अयोध्या आया। उस समय वे अपने भवन में नहीं थे। तब रावण ने उनके द्वारपाल को सूचना दी और क्रोध में वापस लंका चला गया।
जब महाराज रघु वापस लौटे तो उन्हें रावण की चुनौती का पता चला। वे क्षत्रिय थे और किसी की चुनौती अस्वीकार नहीं कर सकते थे। रावण तो चला गया था किन्तु उसे सबक सिखाने के लिए महाराज रघु ने नारायणास्त्र का संधान किया और उसे लंका की ओर छोड़ दिया। रावण उस समय लंका पहुंचा ही था कि उसने देखा कि असंख्य बाण लंका को ध्वस्त कर रहे हैं। रावण ने पहचान लिया कि ये नारायणास्त्र है जिसके निवारण का केवल एक ही उपाय है कि उसके समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया जाये। उसने अपनी प्रजा को ऐसा ही करने को कहा और स्वयं रथ से उतारकर उसने नारायणास्त्र के समक्ष आत्मसमर्पण किया। तब कहीं जाकर नारायणास्त्र वापस लौटा। इससे रावण को भी महाराज रघु की शक्ति का ज्ञान हो गया।
महाराज रघु के पुत्र महाराज अज के पुत्र ही महाराज दशरथ थे। महाराज दशरथ के पुत्र श्रीराम,भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न थे। महाराज रघु श्रीराम के परदादा थे।ये उनका ही प्रताप था कि स्वयं श्रीराम भी रघुकुल की गाथा सदैव गाते रहते थे।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।


