Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 14 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 14 अक्टूबर 2025
14 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज राधाष्टमी का पालन उत्सव भी है। आज की अष्टमी को राधा रानी जी की जन्म जयन्ती है। आज की राधाष्टमी को महाराष्ट्र में कराष्टमी के नाम से जाना जाता है। आज सभी सनातनियों को “राधाष्टमी के पावन उत्सव अर्थात राधा जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए। *मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌨️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌦️ मास – कार्तिक मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 11:09 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुनर्वसु 11:54 AM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) है, जबकि इसकी राशि का स्वामी बुध है। इस नक्षत्र की देवी अदिति हैं।
⚜️ योग – सिद्ध योग 04:11 AM तक, उसके बाद साध्य योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 11:09 ए एम तक
✨ द्वितीय करण – तैतिल – 10:46 पी एम तक गर
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:14:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 05:52:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:42 ए एम से 05:31 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:06 ए एम से 06:21 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:30 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:02 पी एम से 02:48 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:52 पी एम से 06:17 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:52 पी एम से 07:07 पी एम
💧 अमृत काल : 09:33 ए एम से 11:07 ए एम 05:34 ए एम, अक्टूबर 15 से 07:10 ए एम, अक्टूबर 15
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:42 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 15
🚕 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-हनुमान मन्दिर में मसूर की दाल चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – राधाष्टमी/ कराष्टमी(महाराष्ट्र)/ राधा रानी जयन्ती/ पारसी खोरदाद मासारंभ/ सरदार वल्लभभाई पटेल जयन्ती, हिसार के संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महासभा की धम्म देशना दिवस, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर 125वीं जयन्ती, बाल्ड एंड बी फ्री डे, शिमला में पंजाब विश्वविद्यालय स्थापना दिवस, प्रसिद्ध क्रांतिकारी लाला हरदयाल जयन्ती, प्रसिद्ध उद्योगपति लालू भाई सामलदास मेहता जन्म दिवस, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहन धारिया स्मृति दिवस, भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर जन्म दिवस, दिल्ली के सल्तनत की सुल्तान रजिया सुल्तान पुण्य तिथि, अंतर्राष्ट्रीय मानक दिवस (World Standards Day), विश्व डाक दिवस (सप्ताह), राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह)
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🦚
पति-पत्नी के कमरे में हाथी का जोड़ा वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि शयनकक्ष में हाथी की मूर्ति रखने से पति-पत्नी के बीच प्यार और सम्मान बढ़ता है। हाथी का जोड़ा वैवाहिक जीवन में स्थिरता, विश्वास और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।
तिजोरी के पास हाथी और लक्ष्मी मां की तस्वीर शयनकक्ष के अलावा तिजोरी के दरवाजे पर सूंड उठाए हुए दो हाथी के बीच लक्ष्मी मां की बैठी हुई तस्वीर लगानी चाहिए। साथ ही तिजोरी वाले कमरे में क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग कराना शुभ माना जाता है। इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
✅ पुरुषों के लिए आँवले के 6 बड़े फायदे* *💪 मर्दाना ताकत बढ़ाता है आँवला शुक्रधातु को पोषण देता है, जिससे प्रजनन क्षमता बढ़ती है और शरीर में ऊर्जा आती है।
*🧑🦱 बाल झड़ना और समय से पहले सफ़ेद होना रोकता है आँवले में मौजूद Vitamin C और एंटीऑक्सीडेंट्स बालों की जड़ों को मज़बूत करते हैं। इससे पुरुषों में जल्दी गंजापन (early baldness) की समस्या कम होती है। 🍲 पाचनशक्ति सुधारता है भारी खाना खाने के बाद एसिडिटी, गैस या जलन की समस्या आम है। आँवला इन समस्याओं को कम करता है और पेट हल्का रखता है। 👁️ आँखों और दिमाग़ की शक्ति बढ़ाता है नियमित सेवन से दृष्टि बेहतर होती है, ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है। काम के तनाव से होने वाली थकान और सिरदर्द भी कम होते हैं। 💉 रक्तशुद्धि और त्वचा के लिए लाभकारी आँवला शरीर से विषैले तत्व (toxins) निकालता है, जिससे त्वचा साफ़ और चमकदार रहती है। ❤️ हृदय और इम्युनिटी को मज़बूत करता है
*आँवला कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखता है और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
🍃 *आरोग्य संजीवनी* ☘️
🌿 तुलसी के पत्ते खाने के फायदे* *🦠 प्रतिरक्षा (Immunity) बढ़ाता है तुलसी में एंटीऑक्सिडेंट्स और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।
*😷 सर्दी-खांसी और गले के दर्द में राहत तुलसी के पत्तों का काढ़ा या चाय गले के दर्द, जुकाम, खांसी और बलगम को कम करने में बहुत कारगर है। *❤️ हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा तुलसी कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम होता है।
*😌 तनाव और चिंता में राहत तुलसी के पत्तों में adaptogenic गुण होते हैं, जो मानसिक तनाव, थकान और चिंता को कम करने में सहायक हैं। *🩸 ब्लड शुगर नियंत्रण में मददगार तुलसी के पत्ते डायबिटीज के रोगियों में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं (नियमित डॉक्टर की सलाह के साथ ही प्रयोग करें)।
🌸 त्वचा और बालों के लिए लाभकारी तुलसी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण त्वचा की समस्याओं (जैसे मुंहासे, एलर्जी) को कम करते हैं और बालों के झड़ने को रोकते हैं।
*🫁 श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखता है यह दमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य सांस से जुड़ी परेशानियों में राहत देता है। *🧬 डिटॉक्सिफिकेशन तुलसी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है और लिवर को स्वस्थ रखती है।
📚 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
*किसी गांव में एक गरीब ब्राहमण रहता था. वह लोगों के घरों में पूजा पाठ कर के अपनी जीविका चलाता था. एक दिन एक राजा ने इस ब्राहमण को पूजा के लिए बुलवाया. ब्राहमण ख़ुशी ख़ुशी राजा के यहाँ चला गया. *जब ब्राहमण अपने घर को आने लगा तो राजा ने ब्राहमण से पूछा- आप ईश्वर की बातें करते हैं. पूजा- अर्चना से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताते हैं. बताइए, ईश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है ?
*ब्राहमण ने कुछ सोचने के बाद राजा से कहा- महाराज मुझे कुछ समय चाहिए इस सवाल का उत्तर देने के लिए. राजा ने एक महीने का समय दिया. एक महीने बाद आकर इस सवाल का उत्तर दे जाना. *ब्राहमण इसका उत्तर सोचता रहा और घर की ओर चलता रहा परन्तु उसके कुछ समझ नहीं आ रहा था. समय बीतने के साथ साथ ब्राहमण की चिंता भी बढ़ने लगी और ब्राहमण उदास रहने लगा.
*ब्रह्ममण का एक बेटा था जो काफी होशियार था उसने अपने पिता से उदासी का कारण पूछा. ब्राहमण ने बेटे को बताया कि राजा ने उस से एक सवाल का जवाब माँगा है कि ईश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है ? *मुझे कुछ सूझ नहीं रहा है. बेटे ने कहा-पिता जी आप मुझे राजा के पास ले चलना. उनके सवालों का जवाब मैं दूंगा.
*ठीक एक महीने बाद ब्राह्मण अपने बेटे को साथ लेकर राजा के पास गया और बोला आप के सवालों के जवाब मेरा बेटा देगा. *राजा ने ब्राहमण के बेटे से पूछा बताओ ईश्वर कहाँ रहता है ? ब्राहमण के बेटे ने कहा- राजन ! पहले अतिथि का आदर सत्कार किया जाता है. आपने तो बिना आतिथ्य किए ही प्रश्न पूछना शुरू कर दिया है.
*राजा इस बात पर कुछ लज्जित हुए और अतिथि के लिए दूध लाने का आदेश दिया. दूध का गिलास आया. लड़के ने गिलास हाथ में पकड़ा और दूध में अंगुली डालकर घुमाकर बार बार दूध को बाहर निकाल कर देखने लगा. *राजा ने पूछा ये क्या कर रहे हो ?लड़का बोला- सुना है दूध में मक्खन होता है. मैं वही देख रहा हूं कि दूध में मक्खन कहाँ है ? आपके राज्य के दूध में तो मक्खन ही गायब है. *राजा ने कहा दूध में मक्खन होता है, परन्तु वह ऐसे दिखाई नहीं देता. दूध को जमाकर दही बनाया जाता है. फिर दही को मथते हैं तब जाकर मक्खन प्राप्त होता है.
*ब्राहमण के बेटे ने कहा- महाराज यही आपके सवाल का जवाब है. परमात्मा प्रत्येक जीव के अन्दर विद्यमान है. उसे पाने के लिए नियमों का अनुष्ठान करना पड़ता है. *मन से ध्यानपूर्वक अभ्यास से आत्मा में छुपे हुए परम देव पर आत्मा के निवास का आभास होता है. जवाब सुन कर राजा खुश हुआ ओर कहा अब मेरे दूसरे सवाल का जवाब दो, ईश्वर किधर देखता है ?
*ब्राहमण के बेटे ने तुरंत एक मोमबत्ती मगाई और उसे जलाकर राजा से बोला- महाराज यह मोमबत्ती किधर रोशनी करती है ? राजा ने कहा इसकी रोशनी चारों तरफ है. लड़के ने कहा यह ही आप के दूसरे सवाल का जवाब है. *परमात्मा सर्वदृष्टा है और सभी प्राणियों के कर्मों को देखता है. राजा ने खुश होते हुए कहा कि अब मेरे अंतिम सवाल का जवाब दो कि परमात्मा क्या करता है ?
*ब्राहमण के बेटे ने पूछा- यह बताइए कि आप इन सवालों को गुरु बनकर पूछ रहे हैं या शिष्य बन कर ? राजा थोड़े विनम्र होकर बोल- मैं यह प्रश्न शिष्य बनकर पूछ रहा हूं. *यह सुनकर लड़के ने कहा- वाह महाराज ! आप भले शिष्य हैं. गुरु नीचे जमीन पर और शिष्य सिंहासन पर विराजमान है. धन्य है महाराज आप को और आप के शिष्टचार को. यह सुनकर राजा लज्जित हुए.
*अपने सिहासन से नीचे उतरे और ब्राहमण बेटे को सिंहासन पर बैठा कर पूछा- अब बताइए ईश्वर क्या करता है ? *जवाब मिला- अब क्या बतलाना रह गया है ! ईश्वर यही करता है, राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है. राजा ने उस ब्राहमण के पुत्र को अपना सलाहकार बना लिया ।
🙏जय श्री कृष्ण🙏
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।



