धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 21 जनवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 21 जनवरी 2025
21 जनवरी 2025 दिन मंगलवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज प्रदोष काल में ही कालाष्टमी का पर्व भी मनाया जायेगा। सच में स्वामी विवेकानंद जी की जयन्ती तो आज ही है। और वो इसलिए की भारतीय परंपरा में जो भारतीय पञ्चांग होते हैं, उसके अनुसार जन्मतिथि मनायी जाती है। इसलिए स्वामी विवेकानंद जी का जन्म आज ही की तिथि में अर्थात माघ कृष्ण सप्तमी को ही हुई थी। हेमूकलाणी जी का प्रयाण (शहीद) दिवस भी आज ही है। आज द्विपुष्कर योग भी है। आप सभी सनातनियों को “स्वामी विवेकानन्द जी के जन्म जयन्ती एवं कालाष्टमी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि : मंगलवार माघ माह के कृष्ण पक्ष सप्तमी सप्तमी तिथि 12:40 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र चित्रा 11:36 PM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी : चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं. इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता विश्वकर्मा हैं.
⚜️ योग : धृति योग 03:49 AM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण बव 12:40 PM तक
द्वितीय करण : बालव 02:00 AM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:40:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:20:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:19 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:49 पी एम से 06:16 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:51 पी एम से 07:12 पी एम
💧 अमृत काल : 04:23 पी एम से 06:11 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जनवरी 22 से 12:59 ए एम, जनवरी 22
🌸 द्विपुष्कर योग : 07:14 ए एम से 12:39 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मंदिर में पंचमुखा दीपक प्रज्वलित करें।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : विपुष्कर योग/ कालाष्टमी/ स्वामी विवेकानन्द जयन्ती/ भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी विष्णु राम मेधी पुण्यतिथि, पंजाब के मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बराड़ जन्म दिवस, भारतीय फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत जन्मदिवस, भारतीय अभिनेत्री परवीन बॉबी समृति दिवस, अनुसंधानकर्ता ज्ञान चंद घोष पुण्यतिथि, स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी नेता रासबिहारी बोस पुण्यतिथि, मेघालय स्थापना दिवस, मणिपुर स्थापना दिवस, त्रिपुरा स्थापना दिवस
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🏚 Vastu tips 🏠
किस दिशा में दरवाजा बनवाना होता है शुभ वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूर्व और उत्तर दिशा में दुकान का प्रवेश द्वार बनवाने के लिए अच्छी मानी जाती है दिशाओं में पूर्व व उत्तर दिशा को शुभ दिशाएं माना जाता है। यदि आपकी दुकान पूर्वमुखी है, यानि की आपकी दुकान का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा में है तो यह आपके व्यवसाय के लिए बहुत ही अच्छा और लाभ देने वाला होता है। इसके अलावा यदि दुकान की उत्तर दिशा में प्रवेश द्वार हो तो इससे आपकी दुकान के धन-धान्य में बढ़ोतरी होगी और आपकी दुकान का और आपका नाम पूरे मार्केट में चमकेगा और आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें – जब आपको महसूस हो कि मन अशांत हो गया है या दिमाग तनाव से ग्रस्त है तो आपको गहरी सांस लेने की कोशिश करनी चाहिए।
मन को शांत के लिए मैडिटेशन करें – …
किसी शांत दृश्य पर अपना ध्यान केंद्रित करें
रोजाना व्यायाम करें -मेडिटेशन करना मन के शांति के लिए बोहोत जरूरी है। दिन में कुछ वक्त निकाल कर शांत रेहेना सीखो । बस खुद को पूछो कि क्या समस्या है और कैसे में इससे बाहर आ सकता हूं । खुद को समय समय पर बताते रहो की सब कुछ ठीक है।
🍃 आरोग्य संजीवनी 🍁
छोटे बच्चों को सर्दी लग जाए तो क्या करना चाहिए?
कुकरौंधा के कुछ पत्तो को हथेली से रगड़े जो रस निकले उसे सरसों के तेल में मिलाए हल्का गुनगुना करे और बच्चे के सीने , तलवे,हाथ पैरों के नाखूनों में अच्छे से लगाए दिन में दी तीन बार बहुत आराम मिलता है दादी नानी तो अपने बच्चो को पिला भी देती थी हम पिलाते नहीं है लगाते जरूर है और बच्चो के नहाने के पानी में मेथी , अजवाइन डालकर पानी पकाए फिर नॉर्मल होने दे उस पानी से ही बच्चो को नहलाए या हाथ मुंह धुलाए
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
जन्म-मृत्यु का बंधन इसलिए है क्योंकि जीव द्वारा मनुष्य योनि में कुछ ऐसे कर्म किए जाते हैं जिनके फल पाप या पुण्य के रूप में भोगने पड़ते हैं। पाप के फल दुःख और पुण्य के फल सुख के रूप में होते हैं।
दुःख फल और सुख फल भोगने के लिए केवल मनुष्य योनि ही नहीं, बल्कि विभिन्न योनियों में जन्म होता है। किसी एक योनि में सम्बंधित दुःख या सुख फल भोग लिए जाने पर उस योनि के शरीर की मृत्यु हो जाती है और जीव का जन्म नई योनि में उस योनि से सम्बंधित दुःख या सुख भोगने के लिए होता है। इस प्रकार यह योनि-चक्र योनि दर योनि चलता रहता है, जिसे ऊपर जन्म-मृत्यु का बंधन कहा गया है।
अब यह जिज्ञासा उभर कर सामने आती है कि विभिन्न योनियों में दुःख-सुख रूपी पाप फल और पुण्य फल भोग लेने के पश्चात भी जन्म-मृत्यु का योनि चक्र समाप्त क्यों नहीं होता ?
इसका जवाब यह है कि एक मनुष्य योनि के अतिरिक्त सभी योनियाँ केवल भोग-भूमियाँ हैं, यानि उन योनियों में कर्मफल भोग लिए जाने पर समाप्त तो होते हैं, परंतु कोई नए कर्मफल नहीं जुड़ते। दूसरी ओर मनुष्य योनि भोगभूमि होने के साथ-साथ कर्मभूमि भी है। यानि मनुष्य योनि में पिछले सम्बंधित कर्मफल तो समाप्त होते हैं, परंतु मनुष्य योनि में जीव जो कुछ भी कर्म करता है, उसके फल स्वरूप नए कर्मफल उसके खाते में जुड़ जाते हैं, जिन्हें भोगने के लिए उसे फिर से सम्बंधित योनियों के शरीरों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार वह योनि-चक्र से बाहर नहीं निकल पाता — यानि वह मोक्ष प्राप्ति का सुपात्र नहीं बन पाता।
उपरोक्त वार्ता से यह स्पष्ट हो जाता है कि मोक्ष प्राप्ति का सुपात्र बनने के लिए जीव को सभी प्रकार के कर्मफलों से शून्य होने की आवश्यकता है। अर्थात् जीव जब मनुष्य योनि में आए तो दुःख-सुख भोगने से उसके पिछले कर्मफलों का क्षालन तो हो, परंतु नए कर्मफल न जुड़ें।
गीता में भगवान कृष्ण ने और ब्रह्मविद्या शास्त्र में सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी जी ने समझाया कि जो कार्य परमेश्वर के वचनों का उल्लंघन न करते हुए बिना किसी फल की आशा के किया जाता है वह निष्काम कर्म होता है, क्योंकि वह परमेश्वर के प्रति समर्पण के भाव से किया जाता है। ऐसे कर्म से जीव स्वरूप पर कोई अच्छे या बुरे कर्मलेप नहीं लगते।
जहां तक पाप और पुण्य कर्मों की बात है, उसे संक्षेप में दो शब्दों के द्वारा समझा जा सकता है — परपीड़ा और परोपकार।
परपीड़ा यानि दूसरों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अकारण कष्ट पहुँचाना यानि शारीरिक, वाचिक या मानसिक हिंसा में लिप्त होना।
किन्हीं विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अन्य परिस्थितियों में की गयी किसी भी प्रकार की हिंसा पाप है। विशेष परिस्थितियों में अपने बचाव में हुई सीमित हिंसा और प्राकृतिक कारणों से हमारे माध्यम से होने वाली अनैच्छिक हिंसा आदि को ले सकते हैं।
परोपकार यानि दूसरों के लाभ के लिए उनके काम आना। यदि परोपकार किसी फल या पुण्य कमाने की इच्छा से किया जाता है तो पुण्य कर्म का लेप लग गया, जो बंधक कारक है। परंतु यदि इंसान स्वाभाविक रूप से परोपकारी हो गया है यानि वह किसी फल की इच्छा के बिना परोपकार करता है तो यह कार्य निष्काम कर्म की श्रेणी में आ जाता है और बंधन-कारक नहीं होता।
अतः सारांश के तौर पर हम कह सकते हैं कि एक स्वाभाविक रूप से परोपकारी पुरुष जो कभी किसी क़िस्म की हिंसा का कारण नहीं बनता, उसके सारे पिछले कर्म क्रमशः धुलते जाते हैं और अंततः जन्म मरण के योनि चक्र से छूट कर मोक्ष का सुपात्र बन सकता है। ऐसा परमेश्वर के यथार्थ ज्ञान के आत्मसात् होने पर समुचित आचरण करने पर शनैः शनैः सम्भव हो पाता है, जब उसके जन्म जन्मांतरों के सुसंस्कार उसका चरित्र ही वैसा बना देते हैं।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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