धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 24 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 24 दिसम्बर 2024
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार पौष माह के कृष्ण पक्ष नवमी तिथि 07:52 PM तक उपरांत दशमी
✏️ तिथि स्वामी – नवमी की देवी हैं दुर्गा। इस तिधि में जगतजननी त्रिदेवजननी माता दुर्गा की पूजा करने से मनुष्य इच्छापूर्वक संसार-सागर को पार कर लेता है तथा हर क्षेत्र में सदा विजयी प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 12:17 PM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव जी एवं राशि के स्वामी बुध देव जी है ।
⚜️ योग – शोभन योग 08:53 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
प्रथम करण : गर – 07:52 पी एम तक
द्वितीय करण : वणिज – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:22 ए एम से 06:17 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:49 ए एम से 07:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:42 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:04 पी एम से 02:45 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:55 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:31 पी एम से 06:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:54 पी एम से 12:49 ए एम, दिसम्बर 25
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भारतीय राजनेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी जयन्ती, भारतीय पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी, जन्म दिवस, साहित्यकार बनारसीदास चतुर्वेदी जन्म दिवस, अभिनेता अनिल कपूर जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी नारायण भाई देसाई जन्म दिवस, विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आम्टे जयन्ती, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया जन्म दिवस, प्रसिद्ध चित्रकार दीनानाथ भार्गव पुण्य तिथि, भारतीय राष्ट्रवादी सतीश चंद्र दासगुप्ता पुण्य तिथि, राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस
✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
अगर आप घर के ब्रह्म स्थान में तांबे के कलश में पानी भरकर रख देते हैं तो ऊर्जा का प्रवाह घर में आसानी से होता है। तांबा सकारात्मकता का प्रतीक भी है इसलिए इस अन्य किसी धातु की बजाय तांबे का ही इस्तेमाल घर के मध्य स्थान में रखने के लिए आपको करना चाहिए। यह छोटा सा कार्य आपके घर में सुख-समृद्धि ला सकता है। जीवन की कई परेशानियों का अंत वास्तु का ये उपाय कर सकता है। साथ ही जल का प्रतिनिधित्व चंद्रमा करता है, जिससे मानसिक शांति भी आपको प्राप्त होती है।
ब्रह्म स्थान में रखें स्फटिक वास्तु में स्फटिक को शुभ माना गया है। सफेद रंग का ये बहुमूल्य पत्थर ब्रह्म स्थान पर अगर आप रखते हैं तो जीवन में सुख-समृद्धि आपको प्राप्त हो सकती है। इसे घर के मध्य स्थान पर रखने से वास्तु दोष भी दूर होता है। स्फटिक को माता लक्ष्मी का प्रिय रत्न भी कहा जाता है, इसलिए अगर आप ब्रह्म स्थान में स्फटिक को रखते हैं तो माता लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर बरसता है। घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती और साथ ही परिवार के लोगों के बीच सामंजस्य बना रहता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
असंतुलित जीवनशैली: नशे की लत: शराब, ड्रग्स या अन्य नशों का अत्यधिक सेवन न केवल स्वास्थ्य को बर्बाद करता है बल्कि रिश्तों और करियर को भी नुकसान पहुंचाता है। अनियमित दिनचर्या: नींद की कमी, अस्वस्थ भोजन और व्यायाम न करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। जुआ और सट्टेबाजी: पैसा खोने के साथ-साथ यह मानसिक तनाव भी पैदा करता है और परिवार को आर्थिक तंगी में डाल सकता है।
गलत संगत: नकारात्मक लोगों का साथ: ऐसे लोग जो हमेशा नकारात्मक सोच रखते हैं और गलत काम करने के लिए प्रेरित करते हैं, वे किसी भी व्यक्ति को बर्बाद कर सकते हैं। दोस्तों के दबाव में आना: दोस्तों को खुश करने के लिए गलत काम करना अक्सर बुरे परिणामों का कारण बनता है।
असफलता का डर: नए अवसरों से डरना: असफल होने के डर से लोग नए अवसरों को लेने से हिचकिचाते हैं और अपने जीवन को सीमित कर लेते हैं। आत्मविश्वास की कमी: खुद पर विश्वास न करने के कारण लोग अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं।
🍻 आरोग्य संजीवनी
🍺
पथरी यानि स्टोनसफेद मूसली बहुत कारगर उपाय है। इसे इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं। इस मिश्रण को मरीज को हर दिन सुबह पिलाने से महज सात दिन में ही प्रभाव दिखता है।
🌹 गुरु भक्ति योग 🌹
नारियल की पौराणिक कथा प्राचीन समय में एक बहुत ही बहादुर और शक्तिशाली राजा रहा करता था, जिसका नाम राजा सत्यव्रत था। राजा सत्यव्रत भगवान में पूर्ण श्रद्धा रखते थे और भगवान पर अटूट विश्वास रखते थे। राजा सत्यव्रत के राज्य में सभी लोग खुशी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे और वह राजा के तौर-तरीकों से बहुत प्रसन्न थे। राज्य में सभी लोग अपने राजा से बहुत प्रेम करते थे।
उनके राज्य में सभी लोग मिल जुल कर रहा करते थे। राजा सत्यव्रत का कोई भी दुश्मन नहीं था। राजासत्यव्रत के पास सब कुछ था। वह अपना जीवन बहुत खुशी खुशी व्यतीत करते थे। राजा सत्यव्रत बहुत ही दयालु और उदार किसम के व्यक्ति थे। राजा सत्यव्रत बहुत दान और पुण्य किया करते थे लेकिन राजा सत्यव्रत की एक मनोकामना थी कि वह मरने के बाद स्वर्ग लोक में जाएं।
जिसके लिए राजासत्यव्रत बहुत सारा उपाय किया करते थे और बहुत सारा दान दक्षिणा दिया करते थे, जिससे वह खूब पुण्य कमा सके। राजा सत्यव्रत चाहते थे कि वह सीधा मरने के पश्चात पृथ्वी से स्वर्ग लोक में जाएं। राजा सत्यव्रत को स्वर्ग लोक बहुत पसंद था स्वर्ग लोक की सुंदरता से बहुत मोहित हो चुके थे।
बहुत उपाय और प्रयास के बाद भी राजा सत्यव्रत को पृथ्वी से सीधा स्वर्ग लोक जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। जिसके कारण वह बहुत चिंतित रहने लगे थे। एक समय की बात है कि जब ऋषि विश्वामित्र जी तपस्या करने के लिए अपने घर को छोड़कर बहुत दूर जंगल में चले गए थे और ऋषि विश्वामित्र जी जंगल में जाकर अपनी तपस्या करने लगे थे।
तभी ऋषि विश्वामित्र जी के गांव में अचानक से सूखा पड़ गया, जिसके कारण गांव के सभी लोग इधर उधर भटकने लगे। विश्वामित्र जी के परिवार के लोग भी इधर उधर भटकने लगे थे। जब यह बात राजा सत्यव्रत को पता लगी तो उन्होंने ऋषि विश्वामित्र जी के परिवार को अपने महल में बुला लिया।
ऋषि विश्वामित्र जी के परिवार को अपने साथ ही अपने महल में रहने के अपने नौकरों को आदेश दिया और राजा सत्यव्रत ने ऋषि विश्वामित्र जी के परिवार का बहुत आदर सम्मान किया, उनका ध्यान रखा और कुछ दिनों के बाद जब ऋषि विश्वामित्र जी तपस्या करके वापस आए।
तब उन्होंने देखा कि उनके गांव में सूखा पड़ा है और चारों तरफ पानी की एक बूंद भी नहीं है। जिसके बाद ऋषि विश्वामित्र जी अपने परिवार से मिले, उनके परिवार के सभी लोगों ने ऋषि विश्वामित्र जी को बताया कि आपके जाने के बाद यहां पर सूखा पड़ गया था। जिसके बाद राजा सत्यव्रत ने हम लोगों को अपने घर में आसरा दिया था और हमारा बहुत अच्छे से ध्यान रखा था। जिसके बाद ऋषि विश्वामित्र यह सुनकर बहुत प्रसन्न हो गए और उन्होंने राजा सत्यव्रत से मिलने जाने का फैसला लिया।
जिसके बाद अगली सुबह ऋषि विश्वामित्र जी राजा सत्यव्रत के दरबार में पहुंच गए और उन्होंने राजा सत्यव्रत को बहुत सारा धन्यवाद दिया। उन्होंने राजा सत्यव्रत से कहा कि मेरे ना होने पर आपने मेरे परिवार का बहुत सारा ध्यान रखा है, जिसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
(शेष कल)
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⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।

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