Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार , 21 फरवरी 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 21 फ़रवरी 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 11:58 AM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अनुराधा 03:53 PM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि के स्वामी मंगल हैं।
⚜️ योग : व्याघात योग 11:58 AM तक, उसके बाद हर्षण योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 11:57 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 12:43 ए एम, फरवरी 22 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 6:13 से 6: 39 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:10 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:22:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:38:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:13 ए एम से 06:03 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:38 ए एम से 06:54 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:12 पी एम से 12:58 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:28 पी एम से 03:14 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:13 पी एम से 06:39 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:16 पी एम से 07:31 पी एम
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:54 ए एम से 03:54 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 22 से 01:00 ए एम, फरवरी 22
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में श्रंगार सामग्री चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : जानकी जयन्ती / सर्वार्थसिद्धि योग/सीताष्टमी/ स्वतंत्रता सेनानी रानी चेन्नम्मा स्मृति दिवस, पार्श्वगायिका ज़ोहराबाई अम्बालेवाली स्मृति दिवस, मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी ‘गोवा मुक्ति संग्राम’ विश्वनाथ नारायण लवांडे जन्म दिवस, अर्थशास्त्री अभिजीत विनायक बनर्जी जन्म दिवस, भारतीय कवि गुलाब खंडेलवाल जन्म दिवस, उपन्यासकार सूर्यकांत त्रिपाठी जन्म दिवस, सर शांति स्वरूप भटनागर जयन्ती, आध्यात्मिक गुरु और तांत्रिक मीरा अलफासा जन्म दिवस, बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री स्मिता बंसल जन्म दिवस, भारतीय फिल्म निर्देशक राज चक्रवर्ती जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, विश्व स्काउट दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की छत पर कोई भी फालतू सामान या कबाड़ा नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के मन और मस्तिष्क पर नकारात्मक असर पड़ता है और पितृ दोष भी लगता है। साथ ही पूरे घर का माहौल खराब हो जाता है।
वास्तु के मुताबिक, कबाड़ को छत पर रखना आपके घर में कलह का कारण भी बन सकता है। तो ऐसे में आपके घर में यदि बिना उपयोग का फालतू सामान बहुत समय से पड़ा है तो उसे घर के बाहर करिए। लेकिन अगर आपके घर में ऐसा कोई सामान है जो उपयोगी तो है परंतु अभी उसका कोई काम नहीं है तो ऐसी चीजों को ऐसे ही कहीं भी न पटके, बल्कि उन्हें व्यवस्थित ढंग से एक जगह पर रख दें।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शिलाजीत खाने के क्या-क्या फायदे हैं?
शिलाजीत के फायदे
✔ ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाए – शरीर को प्राकृतिक रूप से ऊर्जावान बनाए रखता है।
✔ मानसिक स्वास्थ्य में सुधार – ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है और तनाव कम करता है।
✔ टेस्टोस्टेरोन लेवल बढ़ाए – पुरुषों की शक्ति और प्रदर्शन को बढ़ाता है।
✔ हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाए – ऑस्टियोपोरोसिस और कमजोरी से बचाता है।
✔ डिटॉक्सिफिकेशन में सहायक – शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
✔ एंटी-एजिंग गुण – झुर्रियों को कम करता है और त्वचा में निखार लाता है।
🍶 आरोग्य संजीवनी 🍯
कोलेस्ट्रॉल : दूध और लहसुन का मिश्रण आपकी हृदय धमनियों की रूकावट यानि उसमें जमे हुए कोलेस्ट्रॉल को खत्म करने में मदद करता है और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर होती है।
कब्ज : आयुर्वेद के अनुसार यह प्राकृतिक पेय दूध और लहसुन का मिश्रण आंतों को सक्रिय कर कब्ज की समस्या को दूर करता है और गुदा मार्ग को भी नर्म बनाता है।
अपच : दूध और लहसुन का यह मिश्रण पाचक रसों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है जिससे एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं में लाभ होता है।
जोड़ों का दर्द : इस दूध में शोथरोधी तत्व होते हैं, जिसके कारण यह जोड़ों के दर्द में विशेष रूप से फायदेमंद साबित होता है। अगर आपके घुटनों में दर्द की समस्या रहती है तो इसके लिए नियमित रूप से 1 गिलास दूध में 3-4 लहसून की कलियां डालकर उबाल कर पिए। इसे पीने से दर्द को राहत मिलती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जिंदा व्यक्ति तो पानी में डूब जाता है लेकिन शव तैरता रहता है, क्यों?
जिंदा व्यक्ति पानी में डूब जाता है, लेकिन शव तैरता रहता है, इसके पीछे पूरी तरह से वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण होते हैं। आइए इस रहस्य को विस्तार से समझते हैं।
शरीर का घनत्व और पानी में डूबने की प्रक्रिया
जब कोई जिंदा व्यक्ति पानी में जाता है, तो उसका शरीर आमतौर पर पानी से थोड़ा अधिक घनत्व (density) रखता है। यही कारण है कि अगर वह खुद को संतुलित न रख पाए, तो पानी में डूब सकता है। हालाँकि, अगर व्यक्ति अपने फेफड़ों में हवा भरकर तैरने की कोशिश करे, तो वह कुछ हद तक तैर सकता है क्योंकि हवा शरीर की उछाल (buoyancy) को बढ़ाती है।
➤ लेकिन जब कोई व्यक्ति पानी में डूब जाता है, तो क्या होता है?
डूबने के दौरान व्यक्ति घबराहट में बहुत अधिक हाथ-पैर मारता है, जिससे उसका शरीर पानी में नीचे चला जाता है। इस प्रक्रिया में फेफड़ों में भरी हुई हवा धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है, और शरीर का घनत्व बढ़ जाता है। जब शरीर का घनत्व पानी से अधिक हो जाता है, तो वह डूब जाता है।
शव के तैरने का कारण
जब कोई शव पानी में डूब जाता है, तो उस पर अपघटन (decomposition) की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह प्रक्रिया शरीर में मौजूद बैक्टीरिया और एंजाइम्स के कारण होती है, जो अंदरूनी ऊतकों को तोड़ने लगते हैं। इस दौरान शरीर के अंदर गैसें (मुख्य रूप से मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन सल्फाइड) बनती हैं।
➤ अपघटन से बनने वाली गैसें शव के अंदर फंस जाती हैं, जिससे शव फूला हुआ दिखने लगता है।
ये गैसें शरीर की कुल घनत्व को कम कर देती हैं और पानी में उछाल (buoyancy) को बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि कुछ दिनों बाद शव अपने आप पानी की सतह पर आ जाता है।
शव कब तैरने लगता है?
➡ जलवायु और पानी का तापमान: ठंडे पानी में शव सड़ने की प्रक्रिया धीमी होती है, जिससे शव देर से तैरता है। गर्म पानी में यह प्रक्रिया तेजी से होती है, जिससे शव जल्दी ऊपर आ सकता है।
➡ पानी का प्रकार: समुद्री पानी में लवणता (salinity) अधिक होती है, जिससे शव जल्दी तैर सकता है। ताजे पानी में यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी हो सकती है।
➡ शव की शारीरिक संरचना: मोटे लोगों का शरीर अधिक वसा (fat) रखता है, जो प्राकृतिक रूप से तैरने में मदद करता है। पतले लोगों के मुकाबले उनका शव जल्दी ऊपर आ सकता है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।



