Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 09 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 09 जून 2025
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्येष्ठ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 09:36 AM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 03:31 PM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) है। विशाखा नक्षत्र का देवता इंद्र और अग्नि है।
⚜️ योग – शिव योग 01:08 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 09:35 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 10:38 पी एम तक वणिज
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:53 ए एम से 12:48 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:40 पी एम से 03:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:37 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:18 पी एम से 08:19 पी एम
💧 अमृत काल : 05:41 ए एम से 07:28 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 ए एम, जून 10 से 12:41 ए एम, जून 10
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:31 पी एम से 05:23 ए एम, जून 10
❄️ रवि योग : 03:31 पी एम से 05:23 ए एम, जून 10
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-शिव मंदिर में पंचामृत अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ शिवराज शक 352 प्रारम्भ/ शिवराज्याभिषेकोत्व दिवस/ भगवान बिरसा मुंडा जयन्ती, भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी डॉ किरण बेदी जयन्ती, अभिनेत्री सोनम कपूर जन्म दिवस, भारतीय फ़िल्म संगीतकार वसंत देसाई जन्म दिवस, राष्ट्रीय रोज़ दिवस, राष्ट्रीय डोनाल्ड डक दिवस, धरती आबा की 125वीं पुण्य तिथि, जनजातीय गौरव दिवस, स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा शहीद दिवस, स्वतंत्रता सेनानियों लक्ष्मण प्रसाद दुबे जयन्ती, स्वतंत्रता सेनानी चौधरी दिगम्बर सिंह जन्म दिवस, अभिनेत्री अमीषा पटेल जन्म दिवस, भारतीय सेना नायक बन्दा सिंह बहादुर स्मृति दिवस,विश्व प्रत्यायन दिवस (World Accreditation Day)
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu Tips_ 🌹
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, हर चीज को रखने के लिए क उचित दिशा निर्धारित की गई है, जिससे उस दिशा को तो लाभ मिलता ही है,साथ ही उस घर, कार्यालय या अन्य जगह पर स्थित व्यक्ति को भी बहुत लाभ मिलता है। ऐसे ही मिट्टी की चीजों को रखने के लिए भी उचित दिशा का वर्णन किया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मिट्टी से बनी चीजों जैसे मिट्टी का कोई शो-पीस या मिट्टी के गमले या कोई अन्य चीज़ रखने के लिए सबसे उचित दिशा ईशान कोण, यानि उत्तर-पूर्व दिशा को बताया गया है। चूंकि इस दिशा का संबंध पृथ्वी तत्व से बताया गया है और पृथ्वी यानि धरती और मिट्टी अतः ईशान कोण में मिट्टी संबंधी चीजें रखने से बहुत फायदा मिलता है।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
खराब भोजन से हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां
फूड प्वाइजनिंग: यह एक आम लेकिन खतरनाक स्थिति है जो दूषित भोजन में मौजूद बैक्टीरिया या विषैले तत्वों के कारण होती है। इसके लक्षणों में उल्टी, दस्त, मतली और डिहाइड्रेशन शामिल हैं।
फूड इंफेक्शन: दूषित या बासी खाने के कारण शरीर में संक्रमण हो सकता है। इसमें पेट दर्द, बुखार और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हैं।
लिवर से जुड़ी समस्याएं: दूषित भोजन के कारण लिवर में संक्रमण हो सकता है, जिससे लिवर की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। यह स्थिति धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है।
नोरोवायरस और हेपेटाइटिस A: यह वायरस दूषित भोजन और पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करता है, जिससे मौसमी वायरल इंफेक्शन और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
🍷 आरोग्य संजीवनी 🍶
घरेलू उपाय और दवाइयाँ जो कान दर्द में राहत दे सकती हैं:
गर्म तेल का प्रयोग: सरसों के तेल, तिल का तेल या नारियल के तेल को हल्का गर्म करके (बहुत ज्यादा गर्म न हो) कुछ बूंदें कान में डालें। यह कान के अंदर की सूजन को कम करता है और दर्द में आराम देता है। तेल कान के भीतरी हिस्सों को मॉइस्चराइज करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
लहसुन की बूंदें: लहसुन में प्राकृतिक एंटीबायोटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। 2-3 लहसुन की कलियाँ पीसकर थोड़ा सा सरसों का तेल या नारियल तेल मिलाएं, इसे हल्का गर्म करके कान में डालें। यह घरेलू दवा दर्द कम करने और संक्रमण से लड़ने में सहायक होती है।
गर्म सेंक: एक साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर निचोड़ लें और कान के बाहर हल्का सेक दें। यह खून के प्रवाह को बढ़ाता है और सूजन कम करता है।
सिरका और पानी का मिश्रण: सिरका और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर एक कपास की मदद से कान के बाहर हल्का लगाएं। यह संक्रमण के खतरे को कम करता है, लेकिन ध्यान रखें कि कान में छेद या घाव हो तो इसका इस्तेमाल न करें।
पानी से बचाव:
कान में पानी चला जाने से भी दर्द होता है। इस स्थिति में अपने कान को सूखा रखने की कोशिश करें और नमी से बचाव करें।
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
राहु की महादशा कितने साल की होती है? क्या राहु की महादशा में व्यक्ति का सब कुछ बर्बाद हो जाता है?
राहु की महादशा 18 साल की होती है। यह महादशा व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, यह एक मिथक है कि राहु की महादशा में हमेशा सब कुछ बर्बाद हो जाता है। राहु का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में उसकी स्थिति, अन्य ग्रहों के साथ उसकी युति और दृष्टि, और उसकी दशा-अंतरदशा पर निर्भर करता है।
राहु – सूर्य (राहु-सूर्य अंतरदशा) प्रभाव: राहु और सूर्य का संयोजन अहंकार, अधिकार से संघर्ष, और आत्म-प्रकटीकरण में समस्याओं का कारण बन सकता है। सूर्य प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान, और नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु भ्रम और भटकाव का कारण बन सकता है। इस समय में करियर में अचानक बदलाव या पहचान के लिए संघर्ष हो सकता है।
सकारात्मक परिणाम: यदि आप अपनी नेतृत्व क्षमता पर काम करते हैं और आत्मविश्वास बनाए रखते हैं, तो यह समय आपके लिए सफलता का अवसर ला सकता है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, खासकर ह्रदय और आँखों से संबंधित समस्याओं से बचें।
राहु – चंद्रमा (राहु-चंद्रमा अंतरदशा) प्रभाव: राहु और चंद्रमा का संयोजन मानसिक अशांति, भावनात्मक उथल-पुथल, और परिवार या घर के मामलों में तनाव का कारण बन सकता है। राहु चंद्रमा की शांति को बाधित करता है, जिससे मन में भ्रम और चिंता उत्पन्न हो सकती है। इस समय में मूडी, बेचैन और मानसिक थकावट महसूस हो सकती है।
सकारात्मक परिणाम: परिवार के साथ समय बिताएं, ध्यान और साधना से मानसिक शांति प्राप्त करें। यह समय अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखने का है।
राहु – मंगल (राहु-मंगल अंतरदशा) प्रभाव: राहु और मंगल का संयोजन आक्रामकता, विवाद, और शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है। मंगल युद्ध, ऊर्जा, और आक्रामकता का ग्रह है, जबकि राहु भ्रम और इच्छाओं को बढ़ाता है। यह समय संघर्ष, दुर्घटनाओं, या शारीरिक चोटों का कारण बन सकता है।
सकारात्मक परिणाम: इस समय में अपना गुस्सा और आक्रामकता नियंत्रण में रखें। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाएं।
राहु – बुध (राहु-बुध अंतरदशा) प्रभाव: राहु और बुध का संयोजन मानसिक उथल-पुथल, भ्रम, और निर्णय लेने में कठिनाई उत्पन्न कर सकता है। बुध बुद्धि और संवाद का ग्रह है, जबकि राहु भ्रम और झूठी उम्मीदों का प्रतीक है। यह समय मानसिक भ्रम, गलत संचार, और व्यापार में समस्याओं का कारण बन सकता है।
सकारात्मक परिणाम: इस समय में सही फैसले लेने के लिए शांत और विचारशील रहें। व्यावसायिक फैसलों में धैर्य रखें और किसी भी प्रकार के गलत संचार से बचें।
राहु – गुरु (राहु-बृहस्पति अंतरदशा) प्रभाव: राहु और बृहस्पति का संयोजन अकसर उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा, और धार्मिक कार्यों में सफलता दे सकता है। बृहस्पति ज्ञान, शिक्षा और शुभता का ग्रह है, जबकि राहु इसे अज्ञेयता और भ्रम से प्रभावित कर सकता है। यह समय करियर, उच्च शिक्षा, और विदेश यात्रा के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन साथ ही साथ यह समय धोखाधड़ी या गलत मार्गदर्शन का भी हो सकता है।
सकारात्मक परिणाम: बृहस्पति का साथ आपको उच्चतम स्तर पर सफलता दिला सकता है, लेकिन इस समय धोखाधड़ी से बचने के लिए सचेत रहें। विदेश यात्रा और आध्यात्मिक यात्रा में सफलता प्राप्त हो सकती है।
राहु – शुक्र (राहु-शुक्र अंतरदशा) प्रभाव: राहु और शुक्र का संयोजन रिश्तों, प्रेम, और कला से जुड़े मामलों में भ्रम और समस्याओं का कारण बन सकता है। शुक्र प्रेम, कला और समृद्धि का ग्रह है, जबकि राहु इसमें भ्रम और असत्यता का मिश्रण करता है। यह समय व्यक्तिगत संबंधों में अनिश्चितता, धोखा, या अव्यवस्था का कारण बन सकता है।
सकारात्मक परिणाम: इस समय में रिश्तों और वित्तीय मामलों में सावधानी बरतें। कला और रचनात्मक कार्यों में अच्छा प्रदर्शन हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है।
राहु – शनि (राहु-शनि अंतरदशा) प्रभाव: राहु और शनि का संयोजन कड़ी मेहनत, संघर्ष, और दीर्घकालिक कार्यों के लिए उपयुक्त होता है। शनि कठिनाई और देरी का ग्रह है, जबकि राहु बुरी आदतों और भ्रम का कारण बन सकता है। यह समय लंबी अवधि के कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने का हो सकता है, लेकिन मानसिक दबाव और तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
सकारात्मक परिणाम: यदि आप कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने कार्य में लगातार मेहनत करते हैं, तो यह समय सफलता और स्थिरता ला सकता है। आपको अपनी कार्यशक्ति और धैर्य को विकसित करने की आवश्यकता है।
राहु – राहु (राहु-राहु अंतरदशा)
प्रभाव: राहु की अपनी अंतरदशा में व्यक्ति को भ्रम, इच्छाओं का अत्यधिक दबाव, और मानसिक उथल-पुथल का सामना हो सकता है। यह समय आत्मनिरीक्षण, गलतियों से सीखने और आत्म सुधार का हो सकता है। राहु की महादशा में यह अवधि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह व्यक्ति को अपने जीवन के गहरे पहलुओं को समझने का अवसर देती है।
सकारात्मक परिणाम: आत्म सुधार, नए विचारों की खोज, और जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए यह समय अच्छा हो सकता है। इस समय में ध्यान, साधना और मानसिक शांति प्राप्त करना सहायक हो सकता है।
राहु की महादशा के अंतर्गत विभिन्न अंतरदशाओं का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर भिन्न हो सकता है। यह समय अच्छे परिणाम दे सकता है, लेकिन सही दिशा में प्रयास करना, ध्यान रखना और सतर्क रहना महत्वपूर्ण है। मानसिक शांति, संयम, और आत्म-विश्लेषण से राहु के नकारात्मक प्रभावों को संतुलित किया जा सकता है
━━━━━━━✧❂✧━━━━━━━
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।



