Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 07 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 07 जून 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : शनिवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि पूर्ण रात्रि तक
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र चित्रा 09:39 AM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी : चित्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है और इसके देवता विश्वकर्मा हैं।
⚜️ योग : वरीयान योग 11:17 AM तक, उसके बाद परिघ योग
⚡ प्रथम करण : बव – 06:03 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:15:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:45:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:48 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:39 पी एम से 03:35 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:16 पी एम से 07:36 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:17 पी एम से 08:18 पी एम
💧 अमृत काल : 02:47 ए एम, जून 08 से 04:35 ए एम, जून 08
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:40 ए एम, जून 08
🌸 द्विपुष्कर योग : 05:23 ए एम से 09:40 ए एम
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 09:40 ए एम से 05:23 ए एम, जून 08
🚕 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सवाकिलो इमरती चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/द्विपुष्कर योग/निर्जला एकादशी व्रत (निम्बार्क)/ भागवत एकादशी/ पंचक द्वादशी (बंगाल)/ बकरीद/ ईद-उल-(अजहा)/ राष्ट्रीय चॉकलेट आइसक्रीम दिवस, राष्ट्रीय बबली दिवस, राष्ट्रीय ट्रेल्स दिवस, विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस, अंतर्राष्ट्रीय टेबलटॉप गेम्स दिवस, विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस, राष्ट्रीय पर्यटन दिवस, राष्ट्रीय डोनट दिवस, टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति जन्म दिवस, अभिनेत्री अमृता राव जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।
🛕 Vastu tips_ ⛲
पूजा घर का वास्तु, पूजा घर कभी भी धातु का ना हो, यह लकड़ी, पत्थर और संगमरमर का होना शुभ माना जाता है।
पूजा का कमरा खुला और बड़ा होना चाहिए। पूजा घर को सीढ़ियों के नीचे बिलकुल भी नहीं बनवाना चाहिए। यह हमेशा ग्राउंड फ्लोर पर होना ही श्रेष्ठ माना गया है , इसे कभी भी तहखाने में भी नहीं बनाना चाहिए।
पूजा घर कभी भी शयन कक्ष में नहीं बनाना चाहिए लेकिन यदि स्थानाभाव के कारण बनाना भी पड़े तो पूजा स्थल में पर्दा अवश्य ही होना चाहिए । दोपहर और रात में पूजास्थल को परदे से अवश्य ही ढक दें ।
पूजाघर में मूर्तियां कभी भी प्रवेश द्वार के सम्मुख नहीं होनी चाहिए ।
पूजाघर pooja ghar में बड़ी, वजनी और प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियाँ नहीं रखनी चाहिए । घर के मंदिर में क़म वजन की मूर्तियाँ और तस्वीरें ही रखनी चाहिए। इन्हें दीवार से कुछ दूरी पर रखना चाहिए दीवार से टिका कर नहीं ।
पूजाघर में देवताओं की मूर्तियां / तस्वीरें एक दूसरे के सामने चाहिए अर्थात देवताओं की दृष्टि एक-दूसरे पर भी नहीं पड़नी चाहिए।
पूजाघर में एक ही भगवान की कई सारी मूर्तियाँ एकसाथ नहीं रखनी चाहिए।
पूजा घर में भगवान की मूर्तियों के साथ अपने पूर्वजों की तस्वीरें कतई नहीं रखनी चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कैसी होनी चाहिए कंघी?प्लास्टिक की कंघी आपकी हेयर हेल्थ को बुरी तरह से डैमेज कर सकती है। बालों को मजबूत बनाए रखने के लिए आपको चौड़े दांतों वाली लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करना चाहिए। क्या आप जानते हैं कि गीले बालों को कंघी से सुलझाने की वजह से बालों की जड़ कमजोर हो सकती है? अगर आप हेयर फॉल की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो गीले बालों में कंघी न करें। जब बाल हल्के सूख जाएं, आपको तभी कंघी का इस्तेमाल करना चाहिए।
गौर करने वाली बात कुछ लोग दिन में कई बार कंघी का इस्तेमाल करते हैं। बार-बार कंघी यूज करने की वजह से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं। एक दिन में दो से तीन बार कंघी से बाल सुलझाना काफी है। अपनी हेयर हेल्थ को मजबूत बनाए रखने के लिए इस तरह की छोटी-छोटी टिप्स को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है वरना आपके बाल डैमेज होते चले जाएंगे।
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
अगर आप शूगर या किसी भी कारण से हुई शारीरिक कमजोरी को दूर कर शारीरिक ताकत बढ़ाना चाहते हैं तो सुबह के समय नाश्ते के एक घंटे बाद 3 ग्राम शिलाजीत मिले हुए दूध के साथ 3 ग्राम अश्वगंधा भी लें
अगर आप मर्दाना कमजोरी को दूर कर मर्दाना ताकत बढ़ाना चाहते हैं तो 3 ग्राम शिलाजीत मिले हुए गुनगुने दूध के साथ 2 ग्राम सफेद मूसली पाउडर सुबह के समय नाश्ते के कम से कम एक घंटे बाद और रात्रि में भोजन के कम से कम एक घंटे बाद लें
अगर आप अपने शरीर को गठीला करना चाहते हैं तो एक गिलास गुनगुने पानी में 3 ग्राम शिलाजीत अच्छे से मिला कर सुबह के समय नाश्ते के 2 घंटे बाद लें क्योंकि इस समय आपकी जठराग्नि सबसे प्रबल होती है
अगर आप अपना मेटाबोलिज्म बढ़ाना चाहते हैं तो आप दोपहर के समय खाना खाने के 2 घंटे बाद गुनगुने दूध के साथ 3 ग्राम शिलाजीत लें
📖 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
भगवान और भक्त की सच्ची कहानी
एक बार की बात है, एक शिकारी शिकार की तलाश में घने जंगल में घूम रहा था। तभी अचानक उसे एक शिवलिंग दिखाई दिया। उसने देखा कि शिवलिंग बेलपत्र, फूल, भस्म आदि सुगंधित वस्तुओं से सजा हुआ है, लेकिन आस-पास कोई पुजारी और मनुष्य नहीं है।
उसने सोचा यहां इस जंगल मे भला कौन पूजा करने आएगा, लेकिन शिवलिंग को सजा हुआ देखकर उसे ये भी विश्वास था कि, कोई तो जरूर आता है, तभी तो ये शिवलिंग सजा हुआ है।
उसने थोड़ी देर वहीँ आराम करने का विचार किया। उसने सोचा कि चलो थोड़ी देर यही आराम कर लेता हूं, क्या पता तब तक वो भी आ जाये जिसने शिवलिंग की पूजा की। और वो वहीँ शिवलिंग के पास बैठ गया।
सुबह से शाम हो गई और शाम से रात, लेकिन वहां कोई नहीं आया। तो शिकारी को शिवजी की चिंता होने लगी वह अपने आप से कहने लगा कि अरे! यहां तो कोई भी नहीं आया। न कोई पुजारी और न कोई पहरेदार।
अब उसको शिवजी की चिंता सताने लगी। उसने सोचा कि अगर इतनी रात को घने जंगल मे शिवजी को अकेला छोड़ दिया तो कहीं कोई जंगली जानवर इन पर हमला न कर दे। इसलिए उसने खुद पहरेदारी करने का फैसला किया।
अब शिकारी ने अपना धनुष उठाया और उसपर बाण चढा कर शिवजी की पहरेदारी करने लगा। पूरी रात जाग कर उस शिकारी ने शिवजी की पहरेदारी की।
जब सुबह हुई तो शिकारी को भूख लगी। उसने सोचा कि जब मुझे भूख लगी है तो भगवान को भी भूख लगी होगी। उसने एक पक्षी पकड़ा और उसे मार कर उसका मांस भगवान शिव को खाने के लिए दिया। और खुद हमेशा की तरह शिकार करने निकल गया।
शाम को जब वह जब वापस लौटा, तो उसने देखा कि आज भी शिवजी के पास कोई पहरेदार नहीं है। उसने उस रात फिर से पहरेदारी की और सुबह होने पर फिर से पक्षी पकड़ा और उसे मारकर भगवान शिवजी को खाने के लिए दिया। उसके बाद वह फिर से शिकार करने के लिए चला गया।
एक ब्राह्मण वहां हर रोज शिवलिंग की पूजा करने के लिए पास ही के गांव से आते थे। वो रोज शिवलिंग पर चढ़े हुए मांस को देखकर दुःखी होते थे। वो कहने लगे कि, मैं रोज आकर शिवलिंग साफ करता हूँ ,पता नहीं कौन आकर शिवलिंग गन्दा कर जाता है? आज उस दुष्ट का पता लगाया जाये जो इतना घृणित कार्य करता है।
वह उस समय घर वापस लौट गए। ईधर शिकारी जब रात को वापस आया तो देखा आज भी कोई नही है। उसने हमेशा की तरह फिर से शिवजी की पहरेदारी की।
अगली सुबह वह ब्राह्मण सूरज निकलने से पहले यानी ब्रह्ममुहूर्त मे ही आ गए। उसने देखा कि एक भील यानी शिकारी शिवलिंग की पहरेदारी कर रहा है। ब्राह्मण डर के मारे एक पेड़ के पीछे छिप गया।
थोड़ी देर बाद शिकारी मांस लेकर आया और शिवजी को भोग लगाकर वापस जाने लगा। ये देखकर ब्राह्मण को बहुत गुस्सा आया। उसने तुरंत उस शिकारी को रोका और कहा-अरे मुर्ख ! ये क्या कर रहे हों? क्यों महादेव को अपवित्र कर रहे हों?
दोस्तो!ये सुनकर शिकारी ने भोलेपन से सारी घटना ब्राह्मण को कह सुनाई।
अब तो ब्राह्मण छाती पीट पीट कर उस शिकारी को कोसने लगा। लेकिन शिकारी डरा नहीं ब्लकि उसने उल्टा ब्राह्मण को ही धमकी दी कि, अगर दोबारा से कभी शिवजी को अकेला छोड़ा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
तब ब्राह्मण बोला कि अरे मुर्ख! जो पूरे संसार की रक्षा करते हैं, उन्हें तेरे जैसा मानव भला क्या सुरक्षा देगा ? लेकिन शिकारी ठहरा मोटी बुद्धि का ,उसके दिमाग मे ये बात कहाँ से आती। इसलिए वो यह बात मानने को तैयार नहीं हुआ और ब्राह्मण को दोषी ठहराने लगा।
उसने ब्राह्मण से कहा कि तुम शिवजी की सेवा से जी चुराते हो। उन्हें रात मे इस जंगल मे अकेला छोड़कर अपने घर मे आराम से सोते हो। तुम्हें इसका दंड अवश्य मिलेगा।
भगवान शिव ये सब देख रहे थे। वो उन दोनों की बातों को सुनकर मुस्करा रहे थे ,लेकिन जब स्थिति बिगड़ती देखी ,तो वह खुद वहां प्रकट हो गए।
भगवान शिव ने शिकारी को प्रेम से गले लगाया और आदेश दिया, कि तुम इस ब्राह्मण को छोड़ दो। मैं अपनी सुरक्षा का दूसरा प्रबंध कर लूँगा और शिकारी को प्रेम से विदा किया। शिकारी भगवान को दण्डवत प्रणाम करके वहां से चला गया।
शिकारी के जाने के बाद ब्राह्मण ने पहले तो भगवान शिव की पूजा अर्चना की और फिर उनसे अपनी शिकायत कहीं ,कि प्रभु – मैं बर्षों से तुम्हारी पूजा ,आराधना कर रहा हूं।
इस जंगल मे अपने प्राण संकट मे डाल कर पूजा, अर्चना करने आता हूं। फल,मेवे का भोग लगाता हूं ,लेकिन फिर भी आपने मुझे दर्शन नहीं दिए।
इस भील ने तुम्हें मांस चढ़ाकर तीन दिन तक आपको अपवित्र किया ,फिर भी आप उससे प्रसन्न हो गए और उसको दर्शन भी दिए। क्यों प्रभु?
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।


