धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 13 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 13 अप्रैल 2025
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – बैसाख मास प्रारम्भ
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – रविवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि पूर्ण रात्रि तक
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 09:10 PM तक उपरांत स्वाति |
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह और अधिष्ठाता देव विश्वकर्मा हैं।
⚜️ योग – हर्षण योग 09:39 PM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : बालव – 07:08 पी एम तक
द्वितीय करण – कौलव – पूर्ण रात्रि तक
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:44:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:16:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:50 ए एम से 05:58 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:45 पी एम से 07:07 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:46 पी एम से 07:53 पी एम
💧 अमृत काल : 01:58 पी एम से 03:46 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:44 ए एम, अप्रैल 14
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में गुड़ से बने मालपुए चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवदर्शन/मेष संक्रांति/खरमास (मलमास) समाप्त/जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापना दिवस, जालियाँवाला बाग़ हत्याकांड स्मृति दिवस, राष्ट्रीय स्क्रैबल दिवस है, न्यूपोर्ट वेल्स मैराथन, राष्ट्रीय पीच कोब्बलर दिवस, राष्ट्रीय थॉमस जेफरसन दिवस, राष्ट्रीय लंच काउंट दिवस, बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडक जयन्ती, राष्ट्रीय स्क्रैबल दिवस, अभिनेता-निर्देशक बलराज साहनी स्मृति दिवस, खालसा पंथ स्थापना दिवस, रेल सप्ताह
✍🏼 तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।।
🌹 Vastu tips 🌷
वास्तु के अनुसार, उत्तर-पूर्व में कभी भी अपना किचन न बनवाएं। ऐसा करने से परिवार में भारी नुकसान या असामंजस्य पैदा हो सकता है। यहां तककि उत्तर दिशा भी रसोई के लिए सही नहीं है क्योंकि उत्तर एक जल दिशा है इसलिए यह पानी और आग का टकराव होगा। रसोई में सबसे मौलिक तत्व आग हैं और पानी। वहीं ,खाना बनाते समय रसोई का मुंह पूर्व या दक्षिण पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे सभी की ऊर्जा और जीवन शक्ति बढ़ती है और विशेष रूप से घर की महिला। यह पाचन में भी सुधार करती है। जबकी सिंक उत्तर या उत्तर पूर्व की ओर होना चाहिए इससे धन के प्रवाह में सुधार होता है घर।
🔏 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
“वैशाख नंदन” एक पारंपरिक उपाधि है, जो गधे को दी जाती है।
संस्कृत में “वैशाख नंदन” का शाब्दिक अर्थ है “वैशाख माह का आनंदित पुत्र”। यह उपाधि गधे को दी जाती है, क्योंकि यह प्राणी वैशाख की तीव्र गर्मी में भी परिश्रम करता रहता है।गधा गर्म और धूल भरे वैशाख के महीने में भी खुश रहता है इसलिए, उसे “वैशाख नंदन” कहा जाता है, जो उसकी सहनशीलता और परिश्रमशीलता को दर्शाता है।
“वैशाख नंदन” उपाधि गधे की सहनशीलता और परिश्रमशीलता को दर्शाती है, जो भारतीय लोक-संस्कृति में उसकी भूमिका को रेखांकित करती है।
🫒 आरोग्य संजीवनी 🍓
सिंदवार के लाभ:

वात और कफ को कम करता है:निर्गुण्डी वात और कफ को कम करने में मदद करता है, जिससे सूजन और दर्द कम होता है.
जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत देता है:निर्गुण्डी के पत्तों का काढ़ा पीने या तेल लगाने से जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया में आराम मिलता है.
श्वसन समस्याओं में सहायक: निर्गुण्डी खांसी, निमोनिया, दमा और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन समस्याओं के इलाज में मदद करता है.
चर्म रोगों में फायदेमंद:निर्गुण्डी के पत्तों का रस या तेल लगाने से पुराने घाव, खुजली, एक्जीमा और अन्य चर्म रोग ठीक होते हैं.
रक्त शोधन में मदद करता है:निर्गुण्डी रक्त को शुद्ध करने और रक्त संबंधी विकारों को दूर करने में मदद करता है.
तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है:निर्गुण्डी तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने और तनाव, घबराहट और अनिद्रा जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद करता है.
यूरिक एसिड के लिए फायदेमंद:निर्गुण्डी यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद करता है, जिससे जोड़ों के दर्द और सूजन कम होती है.
बुखार में राहत:निर्गुण्डी बुखार को कम करने में भी मदद करता है.
📚 गुरु भक्ति योग 📗
मृत्‍यु एक ऐसा अटल सत्‍य है जिसको कोई नहीं टाल सकता। लेकिन गरुड़ पुराण में जन्‍म-मरण के चक्र से जुड़ी महत्‍वपूर्ण बातें बताई गई हैं। गरुड़ पुराण में इस बारे में विस्‍तृत जानकारी दी गई है कि जब व्‍यक्ति अपने जीवन के एकदम आखिरी वक्‍त में पहुंच जाता है यानी कि जब वह मरने वाला होता है तो उसे किन-किन चीजों का एहसास होता है। जो आइए देखते हैं जीवन के अंतिम क्षण एक व्‍यक्ति के कैसे गुजरते हैं।
मरने से पहले नजर आने लगते हैं पूर्वज गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब व्‍यक्ति आखिरी सांसें ले रहा होता है तो उसे उन लोगों का साया अपने आस-पास नजर आने लगता है जो पहली इस दुनिया से जा चुके हैं। उसे ऐसा एहसास होता है कि मानो वे लोग उसको अपने पास बुला रहे हों। ऐसा माना जाता है कि मरने वाले को ऐसे संकेत इसलिए मिलते हैं कि ताकि वह अपनी आखिरी इच्‍छा अपने परिजनों को बता सके।
मरने से पहले दिखता है यह तिलिस्‍मी दरवाजा गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब व्‍यक्ति का दम निकलने वाला रहता है तो एक प्रकार का रहस्‍यमयी द्वार दिखने लगता है। कुछ लोगों को उस द्वार से प्रकाश की किरणें निकलती हुई नजर आती हैं तो कुछ को उस द्वार से आग की लपटें निकलती हुई दिखती हैं। कोई व्‍यक्ति गंभीर रूप से बीमार है और ऐसा कुछ दिखाई दे तो परिजनों को समझ जाना चाहिए अब वह व्‍यक्ति उनका साथ छोड़ने वाला है। उन्‍हें उसकी आखिरी इच्‍छाएं जाननी शुरू कर देनी चाहिए।
नजर आते हैं यमदूत नजर आते हैं यमदूत जीवन के आखिरी पलों में व्‍यक्ति को श्‍याम वर्ण के ऐसे लोग नजर आते हैं जो उससे कहते हैं। दरअसल ये यमदूत होते हैं जो उस व्‍यक्ति की आत्‍मा को अपने साथ ले जाने आते हैं। जब व्‍यक्ति को यम दूतों के अपने आस-पास होने का एहसास होने लगे तो समझ जाना चाहिए उसकी कुछ ही सांसें शेष रह गई हैं। ऐसा होने पर आसपास का माहौल भी नकारात्‍मक हो जाता है।
याद आने लगते हैं अच्‍छे-बुरे कर्म याद आने लगते हैं अच्‍छे-बुरे कर्म जब व्‍यक्ति का आखिरी वक्‍त करीब आता है तो उसे अपने बीते हुए कल के अच्‍छे और बुरे कर्म अचानक से याद आने लगते हैं। अंतिम समय आने पर वह अपने मन में दबी वे इच्‍छाएं अपने परिजनो को बताना चाहता है जो उसने आज तक किसी से साझा नहीं की हैं। ऐसा होने पर आपको उस व्‍यक्ति की बातें धैर्य पूर्वक सुननी चाहिए और उनकी आखिरी इच्‍छाएं पूर्ण करनी चाहिए।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।

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