Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 30 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 30 मार्च 2025
30 मार्च 2025 दिन रविवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि है।आज से चैत्र मास का बासन्तीय नवरात्र आरम्भ होता है। सनातनी पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से सनातनियों का नववर्ष की शुरुआत होती है। सनातनी ग्रन्थों की मान्यता के अनुसार इसी प्रतिपदा तिथि से ब्रह्म जी ने सृष्टि की रचना का आरंभ किया था। इस वर्ष के राजा सूर्य देवता हैं। इसके अलावा इसी दिन भगवान राम का राज्याभिषेक भी हुआ था। किसी दिन से सनातनी हिंदू नव वर्ष और छात्र नवरात्रि दोनों की शुरुआत होती है। आज प्रथम दिवस कलश स्थापना किया जाता है। आज ही सनातनियों को अपने-अपने घरों के छतों पर ध्वजा रोपण अवश्य करना चाहिए। आप सभी सनातनियों को ” बासन्तीय नवरात्र एवं ध्वजा रोपण तथा सनातनी हिंदू नववर्ष” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 12:49 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रेवती 04:35 PM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध हैं। तथा रेवती नक्षत्र के देवता भगवान विष्णु और पुशान हैं।
⚜️ योग – इन्द्र योग 05:53 PM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : बव – 12:49 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 10:59 पी एम तक कौलव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:54:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:06:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:41 ए एम से 05:27 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:04 ए एम से 06:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:01 पी एम से 12:50 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:37 पी एम से 07:00 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:38 पी एम से 07:47 पी एम
💧 अमृत काल : 02:28 पी एम से 03:52 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:02 ए एम, मार्च 31 से 12:48 ए एम, मार्च 31
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 04:35 पी एम से 06:12 ए एम, मार्च 31
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-देवी मंदिर में कलावा की बाती से निर्मित अखंड ज्योत जलाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : विक्रम संवत 2028 प्रारम्भ/ गुढी पड़वा/चैत्र नवरात्र प्रारंभ (घट स्थापना)/ शालिवाहन शक 1947 प्रारंभ/ अभ्यंग स्थान/ विश्वावसू संवत्सरारंभ/ सर्वार्थसिद्धि योग/ चंद्र दर्शन/ /झूलेलाल जयंती (चेटीचंड)/पंचक समाप्त/ डाॅ. हेडगेवार जयन्ती/ राजस्थान राज्य स्थापना दिवस/ राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस, आध्यात्मिक बैपटिस्ट/शाउटर मुक्ति दिवस, राष्ट्रीय टर्की नेक सूप दिवस, भारतीय महिला निशानेबाज़ खिलाड़ी यशस्विनी सिंह देसवाल जन्म दिवस, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, प्रसिद्ध साहित्यकार सियारामशरण गुप्त स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेत्री देविका रानी जन्म दिवस, प्रसिद्ध संगीतकार आनंद बख़्शी स्मृति दिवस, पत्रकार मनोहर श्याम जोशी पुण्यतिथि, सिखों के आठवें गुरु गुरु हरकिशन सिंह स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली अर्थात किसी भी कार्य को अथवा कार्यक्षेत्र को बढ़ाने वाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद अर्थात कोई भी कार्य को निर्विघ्नता पूर्वक चरम तक पहुंचाने अर्थात सिद्धि तक पहुंचाने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता को बताया गया है। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु के मुताबिक, घर में सुख-समृद्धि और अच्छे भाग्य के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं.
घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में संपत्ति बढ़ाने के लिए आभूषण, पैसे, और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ रखें.
घर के मुख्य द्वार को वास्तु दोष से मुक्त रखें और मांगलिक चिह्नों से सजाएं.
घर के उत्तर-पूर्व या ईशान कोण में देवी-देवताओं के लिए पूजा का स्थान बनाएं.
घर में पौधे लगाएं और उन्हें हरे-भरे रखें.
घर में कुबेर देव की मूर्ति रखें.
घर में तुलसी का पौधा लगाएं और रोज़ाना जल चढ़ाएं और शाम को दीपक जलाएं.
घर के उत्तर-पूर्व कोने में कुबेर यंत्र स्थापित करें.
घर की दरिद्रता को दूर करने के लिए रोज़ाना घर के उत्तर-पूर्व कोने में गंगाजल का छिड़काव करें.
घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए मंदिर, पानी या फव्वारे को दर्शाने वाली पेंटिंग न लगाएं.
घर में शांति का माहौल बनाने के लिए सुगंधित तेल जलाएं.
घर में बेडरूम की दीवारों को तटस्थ या मिट्टी के रंगों में रंगें.
🔏 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बचाव के टिप्स—बवासीर को दोबारा न आने दें!
लंबे समय तक न बैठें: हर 30-40 मिनट में 2 मिनट टहलें।
मसालेदार खाने से बचें: शराब और कैफीन भी कम करें—ये जलन बढ़ाते हैं।
मल त्याग में ज़ोर न लगाएँ: धैर्य रखें और फाइबर वाली चीज़ें खाएँ।
बवासीर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। इन घरेलू उपायों और जैसे प्रोडक्ट्स के साथ आप इसे बिना सर्जरी के ठीक कर सकते हैं। मेरी एक दोस्त ने 2 हफ्ते में इससे राहत पाई—उसने त्रिफला और को साथ में आजमाया। अगर आपको भी ये टिप्स काम आएँ, तो इस जवाब को शेयर करें ताकि और लोग फायदा उठा सकें। अगर 7-10 दिन बाद भी लक्षण न जाएँ या खून बहना बढ़े, तो डॉक्टर से मिलना न भूलें।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
नागरमोथा कसैला, कड़वा है और कफ और पित्त को कम करता है। यह आँतड़ियों की गतिशीलता को कम करता है।
यह एक उत्कृष्ट पाचक, वातहर और शोषक है |इसमें एंटी-अमीबिक क्रिया है। इन्ही कारणों से नागरमोथा दस्त, पेचिश जैसी बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार यह ज्वर याने बुखार के लिए श्रेष्ठ औषधीयों में से एक है।
नागरमोथा कंद में वेदनाशामक, मस्तिष्क शामक, एंटीस्पास्मोडिक, एंटीइंफ्लेमेटरी गुण है |
डिलीवरी के बाद माता में दुग्ध की शुद्धि और मात्रा बढ़ाने के लिए उपयुक्त है। बच्चे को दस्त होने पर, मोथा का काढ़ा बना कर माँ को पिलाया जाता है।
नागरमोथाा, मस्तिष्क शामक है और आक्षेप, अनिद्रा में फायदेमंद है।
नागरमोथाा के कुछ घरेलु उपयोग :
शहद के साथ आधा चम्मच मुस्ता पाउडर लेने से अपचन के कारण होने वाली पेट की मरोड़ में मदद मिलती है।
दूध और 3 गुना पानी के साथ मुस्ता कंद को उबालें। केवल दूध मात्र रहने पर इसे छान ले और पीएं। यह पेचिश और दर्द युक्त दस्त में मदद करता है।
बेहतर परिणामों के लिए इन दोनों को भोजन के बाद दिन में दो बार लिया जा सकता है।
👣 गुरु भक्ति योग 🪔
नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा, संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही सूर्य
चैत्र नवरात्र 30 मार्च से प्रारंभ हो रहे हैं। इसके साथ ही ‘सिद्धार्थी’ नव संवत्सर 2082 भी। इस संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही सूर्य हैं। इस बार नवरात्र पर देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है। यह अत्यंत शुभ है। इससे वर्ष भर देश के लिए शुभ फलदायक स्थितियां बनेगी। इस वर्ष नवरात्र आठ दिन के हैं। तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण दूसरा-तीसरा नवरात्र एक ही दिन है। देवी भागवत के अनुसार मां दुर्गा का वाहन शेर है। लेकिन हर वर्ष नवरात्र में देवी अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं।
नवरात्र में देवी किस वाहन पर सवार होकर आएंगी, इसके दिन तय हैं। देवी भागवत में इस संबंध में एक श्लोक है—
‘शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥’
रविवार या सोमवार के दिन कलश की स्थापना होने पर देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। देवी का हाथी पर सवार होकर आना शुभ होता है। यह अच्छी वर्षा का प्रतीक है। साथ ही मेहनत का फल और मां की कृपा प्राप्त होती है। शनिवार या मंगलवार के दिन नवरात्र प्रारंभ होने पर देवी का वाहन घोड़ा होता है। मां दुर्गा का घोड़े पर आना सत्ता परिवर्तन या युद्ध का प्रतीक है। यह विपक्ष के लिए शुभ और सत्ता पक्ष के लिए प्रतिकूल स्थितियां बनाता है।
बृहस्पतिवार या शुक्रवार के दिन नवरात्र प्रारंभ हो तो देवी पालकी में बैठकर आती हैं। यह अशुभता का प्रतीक है। इससे महामारी, प्राकृतिक आपदा, उपद्रव, दंगे और जन हानि जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
इसी प्रकार बुधवार के दिन नवरात्र की शुरुआत हो तो देवी दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं। देवी का नाव पर आगमन हर प्रकार से शुभ होता है। भरपूर बारिश और अच्छी फसल होती है। कष्ट दूर होने के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
यह स्वाभाविक है कि जब देवी का आगमन होगा, तो उनकी विदाई भी होगी। माता की विदाई दशमी को होती है। उस दिन रविवार या सोमवार हो तो देवी भैंसे पर सवार होकर जाती हैं। इसका प्रभाव राष्ट्र पर अशुभ होता है। यह रोग और शोककारक स्थितियां बनाता है।
शनिवार या मंगलवार के दिन दशमी होने पर देवी की सवारी मुर्गा होती है। इसके अशुभ फल होते हैं। इससे दुखों और कष्टों में वृद्धि होती है। इसी प्रकार अगर विदाई बुधवार या शुक्रवार के दिन हो तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर जाती हैं। यह शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपको आपके अच्छे कार्यों का फल मिलेगा।
बृहस्पतिवार के दिन दशमी हो तो देवी दुर्गा की सवारी मनुष्य होती है। यह शुभ फलदायक होती है। इससे देश में चारों तरफ सुख-शांति और संपन्नता होती है।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। आज प्रतिपदा तिथि को इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।


