Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 03 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 03 अप्रैल 2025
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 09:41 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 07:02 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा 05:51 AM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चंद्र है। तथा राशि स्वामी ग्रह शुक्र हैं।
⚜️ योग – सौभाग्य योग 12:01 AM तक, उसके बाद शोभन योग
⚡ प्रथम करण कौलव 10:41 AM तक।
✨ द्वितीय करण : तैतिल 09:41 PM तक, बाद गर
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:52:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:37 ए एम से 05:23 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:09 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:50 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:39 पी एम से 07:02 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:40 पी एम से 07:49 पी एम
🩸 अमृत काल : 09:29 पी एम से 11:00 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अप्रैल 04 से 12:47 ए एम, अप्रैल 04
❄️ रवि योग : 07:02 ए एम से 05:51 ए एम, अप्रैल 04
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को स्वर्ण भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – स्कंद षष्ठी/व्यापार मु./वाहन क्रय/ रवि योग/ छत्रपति शिवाजी महाराज पुण्य तिथि ( अंग्रेजी दिनांक के अनुसार), अभिनेत्री जया प्रदा जन्म दिवस, निर्माता एवं निर्देशक प्रभु देव जन्म दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट मूस दिवस, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमलादेवी चट्टोपाध्याय जयन्ती, राष्ट्रीय इंद्रधनुष खोज दिवस, राष्ट्रीय फिल्म स्कोर दिवस, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जन्म दिवस, विश्व पार्टी दिवस, हिन्दी रंगमंच दिवस (Hindi Theatre day)
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗼 Vastu tips_ 🗽
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टूटे व दरार वाले बर्तनों को कभी भी जगह नहीं देनी चाहिए। ऐसे बर्तनों में खाना खाने से घर में दरिद्रता बढ़ती है जिससे कई बार कर्ज लेने तक की नौबत आ जाती है। इसलिए कभी भी टूटे या दरार वाले बर्तनों के अलावा टूटी हुई खाट का उपयोग भी नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा कर्ज और अन्य प्रकार की परेशानियों से बचने के लिये उत्तर दिशा की तरफ अष्टकोणीय, यानि आठ कोनों वाला आईना लगाना चाहिए। घर में इस तरह का आईना लगाने से बहुत से शुभ फल मिलते हैं । इसलिए अष्टकोणीय आईना जरूर लगाएं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हालांकि भोजन करते समय पालथी मारकर जमीन पर बैठना भी आदर्श मुद्रा है, लेकिन (उकडू) बैठकर खाने से भोजन जल्दी पचता हैं। उदर पर दबाव पड़ने से भोजन आवश्यकता से अधिक नहीं खाया जाता जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है!
इस अवस्था में बैठने से गुरुत्व नाभि में जाता हैं जिससे भोजन पचने में आसानी होती हैं। साथ ही डकार और पेट की गैस का रिलीज होना आसान हो जाता है। मैं यह नहीं कहूंगा कि आप घर से बाहर भी इस अवस्था में भोजन करे, शायद गंवार बोलकर आपका मजाक भी बन सकता है।😄
इसीलिए अपने घर के अंदर ही इस अवस्था बैठकर भोजन करना शुरू कीजिए। मात्र एक माह में आप रीनल, गैस, पित्त, कब्ज, पाचन और मोटापे की समस्या में लाभ महसूस करने लग जायेंगे।
ध्यान दीजिए, भूख से आधा भोजन करने वाला, दोगुना पानी पीने वाला, तीन गुना मेहनत करने वाला और चार गुना हंसने वाला व्यक्ति सवा सौ साल तक जीवन जी सकता है ।
🧫 आरोग्य संजीवनी 🩸
जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत खुरासानी अजवायन के औषधीय गुण जोड़ो के दर्द, सूजन और गठिया जैसी समस्याओं के उपचार में सहायक होते हैं। यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण सूजन को कम करता है और जोड़ों के दर्द में राहत प्रदान करता है। इसका तेल मालिश के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिससे दर्द में आराम मिलता है।
सर्दी और खांसी से राहत खुरासानी अजवायन में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सर्दी, खांसी और ब्रोन्काइटिस जैसी समस्याओं के इलाज में सहायक होते हैं। इसका गर्म पानी के साथ सेवन गले की सूजन को कम करता है और वायरल इंफेक्शन से बचाव करता है। यह बलगम को पतला कर निकालने में मदद करता है, जिससे सांस की समस्या में राहत मिलती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
क्या पूजा में अनार चढ़ाते हैं?
हां, पूजा में अनार चढ़ाना एक सामान्य और धार्मिक परंपरा है, खासकर हिंदू धर्म में। अनार का फल पूजा में विभिन्न कारणों से चढ़ाया जाता है, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
संपत्ति और समृद्धि का प्रतीक: अनार को धन, समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। इसके अन्दर अनेक दाने होते हैं, जो जीवन में अनेक सुखों और संपत्ति के आगमन का संकेत देते हैं। इसलिए, अनार को देवी लक्ष्मी, गणेश, और अन्य देवताओं के पूजन में चढ़ाया जाता है।
पारंपरिक महत्व: अनार को पुराने समय से एक शुभ फल माना गया है और यह भारतीय संस्कृति में धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होता आया है। यह फल पूर्णता और प्रचुरता का प्रतीक है, इसलिए इसे देवताओं के समक्ष अर्पित किया जाता है।
देवी लक्ष्मी और गणेश पूजन: विशेष रूप से दिवाली जैसे त्योहारों के समय लक्ष्मी पूजा और गणेश पूजा में अनार चढ़ाने की परंपरा है। यह फल शुभ और समृद्धि के आगमन के रूप में देखा जाता है।
स्वास्थ्य और शुभकामनाएँ: अनार को स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक भी माना जाता है। इसे पूजा में चढ़ाकर हम अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सुखमय जीवन की कामना करते हैं।
विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान: कुछ विशेष धार्मिक अवसरों पर, जैसे व्रत, मंगलवार की पूजा या रक्षा बंधन पर भी अनार चढ़ाने की परंपरा होती है। यह फल रिश्तों को मजबूत करने, विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने और समृद्धि की कामना करने के लिए पूजा में अर्पित किया जाता है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।



