धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 29 मई 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 29 मई 2025
आप सभी सनातनियों को “रम्भा तृतीया” एवं “श्री महाराणा प्रताप” की जयन्ती के पावन पर्व की अनन्त – अनन्त बधाई एवं शुभकामनाएं।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌘 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 11:18 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आद्रा 10:38 PM तक उपरांत पुनर्वसु
💫 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है.भगवान शिव के रुद्र रूप को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है।
⚜️ योग – शूल योग 03:46 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
प्रथम करण : तैतिल – 12:31 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 11:18 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:17:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:43:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:23 ए एम से 05:24 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:46 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:37 पी एम से 03:32 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:12 पी एम से 07:32 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:13 पी एम से 08:14 पी एम
💧 अमृत काल : 01:24 पी एम से 02:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, मई 30
सर्वार्थ सिद्धि योग : 10:38 पी एम से 05:24 ए एम, मई 30
❄️ रवि योग : 10:38 पी एम से 05:24 ए एम, मई 30
🚓 यात्रा शकुन- बेशन बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को स्वर्ग भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ रवि योग/ रम्भा तीज/ श्री महाराणा प्रताप जयन्ती (तिथि अनुसार)/ मुस्लिम जिलहिज्ज मासारंभ/ लोकराम नयनराम शर्मा पुण्य तिथि, अन्तर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस, लोकतंत्र दिवस, संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, कम्पोस्टिंग दिवस, राष्ट्रीय बिस्किट दिवस, राष्ट्रीय कॉक औ विन दिवस, प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह स्मृति दिवस, अभिनेता पृथ्वीराज कपूर पुण्य तिथि, माउंट एवरेस्ट दिवस, बेजान दारूवाला ज्योतिष पुण्य तिथि, विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है —
“नैऋत्ये स्थैर्यमिष्टं, आग्नेये च तेजसः फलम्।
यो विपरीतमाचरेत्, तस्य नाशो न संशयः॥”
यानि नैऋत्य में स्थायित्व है और आग्नेय में ऊर्जा का नियंत्रण। अगर कोई इसे उल्टा करता है, तो हानि तय है।
अब उपाय की बात करें तो सबसे पहले आग्नेय कोण में भारी सामान, वॉशरूम, अंधकार या अकारण गहराई न रखें। वहाँ हल्के रंग (जैसे off-white, cream) का प्रयोग करें। लाल या गहरे रंग से बचें। उस क्षेत्र में अग्नि देवता का चित्र लगाना शुभ रहता है। आग्नेय दिशा को हल्का बनाना और नैऋत्य को भारी बनाना वास्तु का मूल नियम है।
नैऋत्य दिशा में यदि जगह कम हो तो वहाँ लोहे या पत्थर के भारी सामान, साफ-सुथरा भंडारण, और पितरों की तस्वीर रखना लाभकारी है। वहां पीले, मिट्टी के रंग का उपयोग करें, और हफ्ते में एक बार सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
🎯 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण: सुबह की लार में लाइसोज़ाइम (Lysozyme) नाम का एंज़ाइम होता है, जो प्राकृतिक बैक्टीरिया को मारता है। जब इसे आंखों पर लगाया जाता है, तो यह वहां मौजूद सूक्ष्म जीवों और गंदगी को हटाने में मदद करता है।
आंखों को मॉइस्चराइज़ करना: प्राकृतिक लार आंखों की सतह को कोमलता से हाइड्रेट करती है। ये विशेष रूप से शुष्क आंखों (Dry Eyes) के लिए फायदेमंद मानी जाती है।
पाचन का संकेतक और समाधान: आयुर्वेद कहता है — “जिसका पेट साफ होता है, उसकी दृष्टि साफ होती है।” और सुबह की लार हमारी पाचन क्रिया का पहला दर्पण होती है। अगर वो लार आंखों पर लगाने से जलन न हो और आराम मिले, तो समझिए आपका पाचन अच्छा है।
प्राकृतिक प्राण ऊर्जा: सुबह की लार में मौजूद ऊर्जा को प्राणशक्ति माना गया है। यही कारण है कि कई योगी और आयुर्वेदाचार्य इसे आंखों की शक्ति बढ़ाने वाला अमृत मानते हैं।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
साइटिका के दर्द से मिलेगी राहत :- साइटिका (Sciatica Pain) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कमर से लेकर पैरों तक की सबसे बड़ी नस, साइटिक नर्व (Sciatic Nerve), पर दबाव पड़ता है। इससे तेज दर्द, जलन, या झुनझुनी जैसा अहसास होता है। एंकल रोटेशन एक्सरसाइज इस नस पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद करती है। नियमित रूप से इसे करने से नसों में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न में कमी आती है। डॉ. हंसाजी योगेंद्र के अनुसार, अगर आप इसे रोजाना सिर्फ 5 मिनट करें, तो साइटिका की वजह से होने वाली परेशानी में काफी हद तक आराम मिल सकता है। खासकर उन लोगों के लिए, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, यह एक्सरसाइज किसी वरदान से कम नहीं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
जो अपनी उम्र जी चुके हैं और दुनिया से जाने की कगार पर हैं, उनके क्या कर्तव्य हैं?
जो व्यक्ति अपनी उम्र जी चुके हैं और अब जीवन के अंतिम चरण में हैं, उनके कर्तव्यों को भारतीय दर्शन, समाजशास्त्र और मानवता के दृष्टिकोण से कई स्तरों पर समझा जा सकता है। विस्तार से बताता हूँ:
आध्यात्मिक कर्तव्य स्वधर्म का पालन: वृद्धावस्था को संन्यास आश्रम कहा जाता है। इस चरण में व्यक्ति को भौतिक इच्छाओं से मुक्त होकर आत्मचिंतन, ध्यान और ईश्वर भक्ति में समय देना चाहिए। यह आत्मशुद्धि और मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का समय है।
मृत्यु का स्वीकार: मृत्यु को जीवन का स्वाभाविक अंत मानते हुए उससे डरने के बजाय उसका सामना शांत मन से करना। गीता में कहा गया है, “न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्” — अर्थात् हर कर्म का फल है, मृत्यु भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है।
प्रायश्चित और क्षमा: जीवन में जो गलतियाँ हुईं, उनके लिए आत्ममंथन करना, क्षमा माँगना और दूसरों को क्षमा करना।
पारिवारिक कर्तव्य अनुभव का हस्तांतरण: अपने जीवन के अनुभवों, शिक्षाओं और मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना। यह ज्ञान परिवार और समाज के लिए अमूल्य धरोहर बनता है।
आशीर्वाद देना: वृद्ध व्यक्ति का आशीर्वाद परिवार में मानसिक बल और आत्मविश्वास बढ़ाता है। विशेष अवसरों पर उनका सान्निध्य शुभ माना जाता है।
संयम और समर्पण: इस अवस्था में अत्यधिक अपेक्षाओं को छोड़कर परिवार के प्रति सहयोगी और सहायक भूमिका निभाना।
सामाजिक कर्तव्य मार्गदर्शन: अपने सामाजिक अनुभव के आधार पर समाज के युवा वर्ग का मार्गदर्शन करना।
सद्भाव फैलाना: जीवन के अंतिम समय में व्यक्ति को कटुता, द्वेष और मतभेदों को समाप्त कर प्रेम, भाईचारा और सहिष्णुता का संदेश देना चाहिए।
दान और सेवा: यदि सामर्थ्य हो तो समाज के जरूरतमंदों की सहायता करना — चाहे वह ज्ञानदान हो, अन्नदान हो या समयदान।
स्व-स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन का कर्तव्य स्वास्थ्य का ध्यान: यथासंभव शरीर को स्वस्थ रखना ताकि दूसरों पर अनावश्यक बोझ न बने।
मन को शांत रखना: चिंताओं और भूतकाल की घटनाओं में उलझे बिना वर्तमान में शांतिपूर्वक जीना।
मृत्यु की तैयारी वसीयत और संपत्ति का निपटारा: अपने जीवन में जो अर्जित किया, उसे स्पष्ट रूप से व्यवस्थित करना ताकि बाद में परिवार में विवाद न हो।
मन का निर्लिप्त होना: सांसारिक मोह-माया से धीरे-धीरे मन को मुक्त करते हुए अंत समय में शांति और संतोष का अनुभव करना।
संक्षेप में कहें तो अंतिम पड़ाव में व्यक्ति का सबसे बड़ा कर्तव्य है — जोड़ना, सुलझाना और छोड़ना। जोड़ना — परिवार और समाज को स्नेह और आशीर्वाद से; सुलझाना — अधूरे काम और रिश्तों के उलझाव; और छोड़ना — इस संसार के बंधनों को शांति से त्यागते हुए।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

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