मध्य प्रदेश

दर्जनों ऐसे शिक्षक है जिनकी तीन से सार संतान, लेकिन विभाग कार्यवाही से कतरा रहा

ढीमरखेड़ा जनपद शिक्षा केंद्र का मामला
रिपोर्टर  : सतीश चौरसिया
उमरियापान | जनपद शिक्षा केंद्र ढीमरखेड़ा में इन दिनों तीसरी संतान वाले शिक्षक सुर्खियां बटोर रहे हैं, लेकिन कार्यवाही नहीं हों रही ।  विदित हैं कि तीसरी संतान वाले शिक्षकों के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई शुरू होना चाहिए, लेकिन नियमों को ताक में रखकर ढीमरखेड़ा शिक्षा विभाग में कार्य किया जा रहा है ।  ढीमरखेड़ा शिक्षा विभाग में तीन संतान वाले शिक्षक कम से कम पचासों ऐसे शिक्षा है जिनकी तीन से अधिक संतान हैं  ।  लेकिन  जिला शिक्षा अधिकारी  एवं ढीमरखेड़ा जनपद शिक्षा केंद्र कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह गया है  ।  गौरतलब है राज्य शासन ने  26 जनवरी 2001 के बाद जिन शिक्षकों की तीन संतानें हैं, उन्हें चिन्हित कर नोटिस देना चाहिए ।  लेकिन शिक्षा विभाग में कार्रवाई के बजाय सिर्फ जुबानी खर्च से काम चलाया गया है  । प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों में तीसरी संतान की जानकारी देने के आदेश के बाद से हड़कंप मचा था, सबसे ज्यादा खराब स्थिति शिक्षा विभाग में बनीं हुई है ।  सैकड़ों की संख्या में ढीमरखेड़ा शिक्षा विभाग में ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी 26 जनवरी 2001 के बाद की तीसरी संतान हैं, विभाग के पास पूरी जानकारी मौजूद है ।  लेकिन मजे की बात तो यह है कि ढीमरखेड़ा कार्यालय में नोटिस भी जारी हुए थे, जिसमें कर्मचारियों से जवाब मांगा था, जवाब न मिलने पर एक पक्षीय कार्यवाही करने का भी उल्लेख पत्र के माध्यम से किया गया था, लेकिन उसके बाद भी आज तक कार्यवाही ना होना अधिकारियों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करती है ।
*तीन संतान वाले शिक्षको की विभाग के पास है लिस्ट*
ढीमरखेड़ा जनपद शिक्षा केंद्र में तीन संतान वाले शिक्षकों की लिस्ट मौजूद हैं, जिनके 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संताने हैं लेकिन कार्यवाही आज दिनांक तक नहीं हों पाई  । जिनके 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरे बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन जानकारी होने के बावजूद विभाग चुप्पी साधे हुए है ।  स्मरण रहे कि शिक्षा विभाग के द्वारा अगर नोटिस तलब किया जाएंगा तो अजीबों गरीब जवाब सामने आयेंगे सूत्र बताते हैं कि शिक्षकों के अजीबो-गरीब जवाब सामने आयेंगे तीसरी संतान गोद दे दी, नसबंदी हो गई फेल, जुड़वां हुए इस तरह के जवाब तीन संतान वाले शिक्षक देगें ।
*यह कहती है गाइड लाइन*
शिक्षा विभाग में 26 जनवरी 2001 के बाद हुई तीसरी संतान वाले अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक हो सकती है ।  कारण विभाग में अधिक अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं ।  शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक अब तक कर्मचारी ऐसे सामने आए हैं, जिनकी 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान का जन्म हुआ है ।   जिन्हें नोटिस जारी कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है, लेकिन उसके बाद भी आज तक जिम्मेदार इसमें कुछ नहीं कर पाए ।  दो से अधिक संतान के संबंध में म.प्र. शासन सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल के परिपत्र 10 मई 2000 द्वारा म.प्र. सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 6 के उपनियम-4 के उपनियम के तहत तीसरी संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है ।  इस संबंध में स्पष्ट आदेश है कि कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतान हैं, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हो वह किसी सेवा या पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।  तीसरी संतान का नियम जनसंख्या नियंत्रण के लिए बनाया गया था । 
इसके बावजूद भी जनपद शिक्षा केंद्र ढीमरखेड़ा के द्वारा आखिर तीन संतान वालों पर कार्यवाही ना होना समझ से परे हैं।  नगर के समाजसेवियों ने जिला कलेक्टर दिलीप कुमार यादव का ध्यान आकर्षण कराते हुए मांग की है कि ढीमरखेड़ा तहसील में दर्जनों ऐसे शिक्षा है जिसकी तीन से अधिक संतान हैं लेकिन कार्यवाही नहीं हो रही है। जल्द से जल्द ऐसे शिक्षकों के ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए।

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