
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 09 दिसम्बर 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
*मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
*मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352_
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार पौष माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 02:29 PM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 02:22 AM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र के देवता नाग हैं। इसे ‘सर्पदेवता’ भी कहा जाता है। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है।
⚜️ योग – इन्द्र योग 02:33 PM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 02:28 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 02:00 ए एम, दिसम्बर 10 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:40:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:13 ए एम से 06:08 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:41 ए एम से 07:02 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:53 ए एम से 12:34 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:57 पी एम से 02:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:22 पी एम से 05:49 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:25 पी एम से 06:46 पी एम
💧 अमृत काल : 12:48 ए एम, दिसम्बर 10 से 02:22 ए एम, दिसम्बर 10
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:41 ए एम, दिसम्बर 10
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:02 ए एम से 02:22 ए एम, दिसम्बर 10
❄️ रवि योग : 02:22 ए एम, दिसम्बर 10 से 07:03 ए एम, दिसम्बर 10
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-देवी मन्दिर में सवाकिलो अनार चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/महान् कवि संत सूरदास प्राकट्योत्सव/ प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की पत्नी जन्म दिवस, अभिनेता एवं राजनीतिक शत्रुघ्न सिन्हा जन्म दिवस, साहित्यकार रघुवीर सहाय जन्म दिवस, भूतपूर्व राज्यपाल देवीदास ठाकुर जन्म दिवस, क्रिसमस कार्ड दिवस, कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन विक्रम बत्रा जन्म दिवस, हिंदी साहित्य प्रवर्तक भारतेन्दु हरिश्चंद्र जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता अक्षय कुमार जन्म दिवस, टेक्नो दिवस, वेरी विली दिवस, सिपाही विद्रोह के एक प्रमुख नायक हरियाणा रेवाड़ी जिले के राव तुला राव जयन्ती, बालिका दिवस (भारत), अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस (International Anti-Corruption), अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर) ✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है। 🐄 *_Vastu tips* 🛕
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार हंस दांपत्य प्रेम और सामंजस्य का प्रतीक है। हंस के जोड़े की मूर्ति रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और संबंधों में सुधार आता है। बेडरूम में खूबसरत हंस के जोड़े की मूर्ती रखना सबसे शुभ माना गया है। जबकि, गेस्ट रूम में रखने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।
*गाय: सौभाग्य-सकारात्मकता का प्रतीक गाय को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना गया है। घर में गाय की मूर्ति रखना अत्यंत शुभ होता है। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और भाग्य मजबूत होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, संतान प्राप्ति की कामना रखने वालों के लिए पीतल की गाय की मूर्ति घर में रखना शुभ माना गया है। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ गुस्सा आने पर दो तीन गिलास खूब ठंडा पानी धीरे धीरे घूँट घूँट लेकर पिएं । पानी हमारेशारीरिक तनाव को कम करके क्रोध शांत करने में मददगार होता है। *गुस्सा बहुत आता हो तो धरती माता को रोज सुबह उठकर हाथ से पाँच बार छूकर प्रणाम करें और सबसे विशाल ह्रदय धरती माँ से अपने गुस्से पर काबू करने और सहनशील होने का वरदान मागें।
*पलाश के छोटे छोटे पत्तों की सब्जी खाने से गुस्सा, और पित्त जल्दी ही शांत होता है । रविवार को अदरक, टमाटर और लाल रंग के कपड़े गुस्सा अधिक बढ़ाते हैं अत: इनका कम से कम प्रयोग करें । *जिनको गुस्सा बहुत आता हो, बात- बात में चिड जाते हो वे सोमवार का उपवास करें, या एक समय भोजन करें। रात कों चन्द्रमा कों अर्घ दें तथा अपने गुस्से पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें । इससे भी मन शान्त रहता है, गुस्से पर नियंत्रण रहता है।
*बहुत अधिक खट्टी, तीखी, मसालेदार चीजें खाने से आँखें जलती हैं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आता है, शीघ्र गुस्सा आता है, अकारण ही सीने और पेट में जलन होती है अत: इन चीजों का बिलकुल त्याग कर देना चाहिए । ☕ आरोग्य संजीवनी 🫖
दमा के उपचार, 100 ग्राम दूध में लहसुन की पांच कलियां धीमी आँच पर उबाकर इस का हर रोज दिन में दो बार सेवन करने से दमे में काफी फायदा मिलता है।
*तुलसी के 10-15 पत्ते पानी से साफ़ कर लें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे आराम मिलता है।
*एक पके केले में चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक चौथाई छोटा चम्मच महीन पीसी काली मिर्च भर दें। फिर उसे 2-3 घंटे बाद हल्की आँच में छिलके सहित भून लें। ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें। एक माह में ही दमें में खूब लाभ होगा। *लहसुन की दो पिसी कलियां और अदरक की गरम चाय पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। इस चाय का सेवन सबेरे और शाम करना चाहिए
*4-5 लौंग को 150 पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर गरम-गरम पी लें। रोज दो से तीन बार यह काढ़ा पीने से निश्चित रूप से लाभ मिलता है। 📖 गुरु भक्ति योग 📑
मंगल ग्रह पर सूक्ष्मजीवों का अस्तित्व: क्या पृथ्वी से पहले वहाँ जीवन था
*ब्रह्मांड के विशाल सागर में दो पड़ोसी ग्रह हैं पृथ्वी और मंगल। जहाँ पृथ्वी पर जीवन फल-फूल रहा है,वहीं मंगल आज एक ठंडा,बंजर और लाल ग्रह है,लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि कभी ऐसा नहीं था। मंगल ग्रह कभी एक जीवंत,जलमय और संभावित रूप से जीवन से भरा हुआ संसार था,शायद पृथ्वी से भी पहले वहाँ जीवन का आरंभ हुआ हो।
*मंगल ग्रह: एक समय का “नीला ग्रह” करीब 4 अरब साल पहले मंगल पर परिस्थितियाँ बिल्कुल अलग थीं। वहाँ का वातावरण घना था तापमान पृथ्वी जैसा था और उसकी सतह पर बहता हुआ पानी मौजूद था। विज्ञानियों को मंगल की सतह पर ऐसी घाटियाँ,झीलों के निशान और नदी-डेल्टा मिले हैं जो यह साबित करते हैं कि वहाँ कभी नदियाँ बहती थीं। नासा के और रोवर ने भी चट्टानों में ऐसे खनिज खोजे हैं जो केवल पानी की उपस्थिति में ही बन सकते हैं यानी मंगल एक समय पर जीवन के लिए उपयुक्त वातावरण रखता था। *पानी: जीवन की पहली शर्त पानी जीवन का सबसे अहम तत्व है और मंगल पर पानी के प्रमाण सबसे मज़बूत हैं। वैज्ञानिकों ने न केवल सतह पर पुराने जलस्रोतों के निशान पाए हैं बल्कि बर्फ के रूप में पानी आज भी वहाँ मौजूद है। 2018 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगल की सतह के नीचे एक विशाल झील खोजने की घोषणा की थी। यह खोज यह दर्शाती है कि शायद भूमिगत जीवन आज भी वहाँ किसी रूप में छिपा हुआ हो।
*मंगल से आए उल्का पिंड में जीवन के निशान 1996 में अंटार्कटिका में मिला उल्का पिंड ALH84001 मंगल से आया एक पत्थर माना गया। इसमें सूक्ष्म संरचनाएँ पाई गईं जो जीवाश्मित सूक्ष्मजीवों जैसी दिखती थीं। हालाँकि यह खोज विवादास्पद रही,पर इसने वैज्ञानिक समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया,क्या मंगल पर जीवन था और अगर था तो क्या वह पृथ्वी से पहले शुरू हुआ *जीवन का अंत कैसे हुआ मंगल पर जीवन के लुप्त होने के पीछे एक बड़ी वजह उसका चुंबकीय क्षेत्र का खत्म होना है। जब यह क्षेत्र समाप्त हुआ,तो सौर हवाओं ने मंगल का वायुमंडल छीन लिया। धीरे-धीरे उसका तापमान गिरा,पानी जम गया या वाष्प बनकर उड़ गया और सतह पर स्थित हर जीवित तत्व नष्ट हो गया। परंतु यह भी संभव है कि जीवन पूरी तरह खत्म न हुआ हो बल्कि सतह के नीचे बर्फ की परतों में अब भी सूक्ष्मजीव जीवित हों।
क्या जीवन मंगल से पृथ्वी पर आया एक रोमांचक विचार यह भी है कि जीवन की शुरुआत मंगल पर हुई थी और किसी उल्का पिंड की टक्कर से मंगल की मिट्टी पृथ्वी पर पहुँची। इन कणों में सूक्ष्मजीव मौजूद रहे होंगे जिन्होंने पृथ्वी पर जीवन की चिंगारी जलाई। इसे कहा जाता है अगर यह सच है तो हम सब किसी मायने में “मंगल के वंशज” हैं।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।


