धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 29 अक्टूबर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 29 अक्टूबर 2025
29 अक्टूबर 2025 दिन बुधवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज बुधाष्ठमी का महान पर्व है, बुधाष्टमी को सूर्यग्रहण के समान बताया गया है। अर्थात सूर्यग्रहण के समय में जितना जप- तप का फल होता है उससे भी ज्यादा बुधाष्टमी को फल होता है। आज गोपाष्टमी भी है। आज शाम को गायों को अलंकृत करके उनकी यथाविधान पूजा करनी चाहिए। आज जैन लोगों का अष्टाह्निका व्रत भी आरम्भ हो रहा है। आप सभी सनातनियों को “बुधाष्टमी तथा गोपाष्टमी” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
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बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
👸🏻 शिवराज शक 352_

✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – कार्तिक मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – बुधवार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 09:23 AM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 05:29 PM तक उपरांत श्रवण
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस नक्षत्र के देवता विश्वेदेव हैं और इसका प्रतीक हाथी का दांत है।
⚜️ योग – धृति योग 07:50 AM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण : वणिज – 09:23 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 09:50 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:30: 00
🌅 सूर्यास्त – शाम: 05:39: 00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:48 ए एम से 05:39 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:14 ए एम से 06:31 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:38 पी एम से 06:04 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:38 पी एम से 06:56 पी एम
💧 अमृत काल : 10:38 ए एम से 12:21 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 30
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकले।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – जलाराम जयन्ती/ महर्षि वाल्मीकि प्राकट्योत्सव/ अष्टाह्निका व्रत आरम्भ (जैन)/ बुधाष्टमी/ गोपाष्टमी/ अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटी स्थापना दिवस, विश्व स्ट्रोक दिवस, ओलंपिक पदकविजेता विजेंद्र सिंह जन्म दिवस, आयुर्वेद दिवस, अभिनेत्री कृति खरबंदा जन्म दिवस, समाजसुधारक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमलादेवी चट्टोपाध्याय स्मृति दिवस, पूर्व विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह स्मृति दिवस, अभिनेत्री अदिति भाटिया स्मृति दिवस, राजनितिज्ञ विश्वजीत पृथ्वीजीत सिंह जन्म दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗼 Vastu tips_ 🗽
*उत्तर दिशा को कुबेर देव की दिशा माना जाता है। इस दिशा में मनी प्लांट, तुलसी या शंखपुष्पी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। हरे रंग के गमले में मनी प्लांट लगाने से धन का प्रवाह बढ़ता है और रुका हुआ पैसा वापस आने की संभावना बनती है। तुलसी को अगर उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जाए, तो यह नेगेटिविटी को दूर करती है। *पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा है, जो ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। इस दिशा में तुलसी या बांस का पौधा लगाना अत्यंत शुभ होता है। बांस को लंबी उम्र और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वही, इस दिशा में कभी सूखे या मुरझाए पौधे न रखें, इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है।
*दक्षिण दिशा यम की मानी जाती है, लेकिन सही पौधा लगाने से यह दिशा शुभ फल देती है। इस दिशा में शमी का पौधा लगाना लाभदायक बताया गया है। इससे शनि की कृपा मिलती है और नेगेटिविटी दूर रहती है। वास्तु के अनुसार, इस दिशा में कांटेदार पौधे या कैक्टस नहीं लगाने चाहिए, क्योंकि ये तनाव और कलह बढ़ाते हैं। इसके बजाय रबर प्लांट या अशोक का पौधा भी लगा सकते हैं ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ *खाएं खीरा और दही पेट की सेहत को सुधारने के लिए खीरे का सेवन भी किया जा सकता है। खीरे में लगभग 95% पानी होता है और यही वजह है कि खीरा गैस को बाहर निकालने में कारगर साबित हो सकता है। दही को भी गट हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्लोटिंग की समस्या को कंट्रोल करने के लिए खाना खाने के बाद आधी कटोरी दही का सेवन किया जा सकता है।
*फायदेमंद साबित होगा पुदीना पेट में भारीपन महसूस होने पर आप पुदीने की पत्तियों को चबा सकते हैं। पुदीने की पत्तियों में मौजूद तत्व पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में असरदार साबित हो सकते हैं। इसके अलावा आप औषधीय गुणों से भरपूर सौंफ का सेवन भी कर सकते हैं। चुटकी भर सौंफ को पानी में मिक्स कर कंज्यूम कर लीजिए और आपको थोड़ी ही देर में राहत महसूस होने लगेगी। 🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
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गर्म पानी में मिलाएं शहद को दादी-नानी के जमाने से गले के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता रहा है। सबसे पहले आपको एक गिलास में गर्म पानी निकाल लेना है। अब आपको इस गर्म पानी में एक स्पून शहद को अच्छी तरह से मिला लेना है। यकीन मानिए इस ड्रिंक को पीना न केवल आपके गले के लिए बल्कि आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
*सुबह-सुबह पीना ज्यादा फायदेमंद अगर आप सर्दी, खांसी और जुकाम जैसी समस्याओं से बचना चाहते हैं, तो आपको हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट शहद वाले गर्म पानी का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर रोज औषधीय गुणों से भरपूर इस ड्रिंक को पीने से इम्यून सिस्टम को भी काफी हद तक मजबूत बनाया जा सकता है। 📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत- सूर्य अशुभ फल देने वाला हो, तो घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा । जैसे – जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना । किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना, जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो । ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं । जैसे – अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि। सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है। यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है । सूर्य लग्नेश हो, तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है। मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है। किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्य-पक्ष से परेशानी। यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम । शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द । किसी कारण से फसल का सूख जाना । व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है । सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है । तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है ।।
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चन्द्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत जातक की कोई चाँदी की अंगुठी या अन्य आभूषण खो जाता है या जातक मोती पहने हो, तो खो जाता है । जातक के पास एकदम सफेद तथा सुन्दर वस्त्र हो वह अचानक फट जाता है या खो जाता है या उस पर कोई गहरा धब्बा लगने से उसकी शोभा चली जाती है । व्यक्ति के घर में पानी की टंकी लीक होने लगती है या नल आदि जल स्रोत के खराब होने पर वहाँ से पानी व्यर्थ बहने लगता है । पानी का घड़ा अचानक टूट जाता है । घर में कहीं न कहीं व्यर्थ जल एकत्रित हो जाता है तथा दुर्गन्ध देने लगता है । उक्त संकेतों से निम्नलिखित विषयों में अशुभ फल दे सकते हैं – माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । नवजात कन्या संतान को किसी प्रकार से पीड़ा हो सकती है । मानसिक रुप से जातक बहुत परेशानी का अनुभव करता है । किसी महिला से वाद-विवाद हो सकता है । जल से जुड़े रोग एवं कफ रोगों से पीड़ा हो सकती है । जैसे – जलोदर, जुकाम, खाँसी, नजला, हेजा आदि । प्रेम-प्रसंग में भावनात्मक आघात लगता है । समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है । मन में बहुत अशान्ति होती है । घर का पालतु पशु मर सकता है । घर में सफेद रंग वाली खाने-पीने की वस्तुओं की कमी हो जाती है या उनका नुकसान होता है । जैसे – दूध का उफन जाना । मानसिक रुप से असामान्य स्थिति हो जाती है
*मंगल के अशुभ होने के पूर्व संकेत- भूमि का कोई भाग या सम्पत्ति का कोई भाग टूट-फूट जाता है । घर के किसी कोने में या स्थान में आग लग जाती है । यह छोटे स्तर पर ही होती है । किसी लाल रंग की वस्तु या अन्य किसी प्रकार से मंगल के कारकत्त्व वाली वस्तु खो जाती है या नष्ट हो जाती है । घर के किसी भाग का या ईंट का टूट जाना । हवन की अग्नि का अचानक बन्द हो जाना । अग्नि जलाने के अनेक प्रयास करने पर भी अग्नि का प्रज्वलित न होना या अचानक जलती हुई अग्नि का बन्द हो जाना । वात-जन्य विकार अकारण ही शरीर में प्रकट होने लगना । किसी प्रकार से छोटी-मोटी दुर्घटना हो सकती है । *बुध के अशुभ होने के पूर्व संकेत- व्यक्ति की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है अर्थात् वह अच्छे-बुरे का निर्णय करने में असमर्थ रहता है । सूँघने की शक्ति कम हो जाती है । काम-भावना कम हो जाती है । त्वचा के संक्रमण रोग उत्पन्न होते हैं । पुस्तकें, परीक्षा के कारण धन का अपव्यय होता है । शिक्षा में शिथिलता आती है ।
*गुरु के अशुभ होने के पूर्व संकेत- अच्छे कार्य के बाद भी अपयश मिलता है । किसी भी प्रकार का आभूषण खो जाता है । व्यक्ति के द्वारा पूज्य व्यक्ति या धार्मिक क्रियाओं का अनजाने में ही अपमान हो जाता है या कोई धर्म ग्रन्थ नष्ट होता है । सिर के बाल कम होने लगते हैं अर्थात् व्यक्ति गंजा होने लगता है । दिया हुआ वचन पूरा नहीं होता है तथा असत्य बोलना पड़ता है । *शुक्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत- किसी प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे – दाद, खुजली आदि उत्पन्न होते हैं । स्वप्नदोष, धातुक्षीणता आदि रोग प्रकट होने लगते हैं । कामुक विचार हो जाते हैं । किसी महिला से विवाद होता है । हाथ या पैर का अंगुठा सुन्न या निष्क्रिय होने लगता है ।
*शनि के अशुभ होने के पूर्व संकेत- दिन में नींद सताने लगती है । अकस्मात् ही किसी अपाहिज या अत्यन्त निर्धन और गन्दे व्यक्ति से वाद-विवाद हो जाता है । मकान का कोई हिस्सा गिर जाता है । लोहे से चोट आदि का आघात लगता है । पालतू काला जानवर जैसे- काला कुत्ता, काली गाय, काली भैंस, काली बकरी या काला मुर्गा आदि मर जाता है । निम्न-स्तरीय कार्य करने वाले व्यक्ति से झगड़ा या तनाव होता है । व्यक्ति के हाथ से तेल फैल जाता है । व्यक्ति के दाढ़ी-मूँछ एवं बाल बड़े हो जाते हैं । कपड़ों पर कोई गन्दा पदार्थ गिरता है या धब्बा लगता है या साफ-सुथरे कपड़े पहनने की जगह गन्दे वस्त्र पहनने की स्थिति बनती है । अँधेरे, गन्दे एवं घुटन भरी जगह में जाने का अवसर मिलता है । *राहु के अशुभ होने के पूर्व संकेत मरा हुआ सर्प या छिपकली दिखाई देती है । धुएँ में जाने या उससे गुजरने का अवसर मिलता है या व्यक्ति के पास ऐसे अनेक लोग एकत्रित हो जाते हैं, जो कि निरन्तर धूम्रपान करते हैं । किसी नदी या पवित्र कुण्ड के समीप जाकर भी व्यक्ति स्नान नहीं करता। पाला हुआ जानवर खो जाता है या मर जाता है । याददाश्त कमजोर होने लगती है । अकारण ही अनेक व्यक्ति आपके विरोध में खड़े होने लगते हैं । हाथ के नाखुन विकृत होने लगते हैं । मरे हुए पक्षी देखने को मिलते हैं । बँधी हुई रस्सी टूट जाती है । मार्ग भटकने की स्थिति भी सामने आती है । व्यक्ति से कोई आवश्यक चीज खो जाती है ।
*_केतु के अशुभ होने के पूर्व संकेत मुँह से अनायास ही अपशब्द निकल जाते हैं । कोई मरणासन्न या पागल कुत्ता दिखायी देता है । घर में आकर कोई पक्षी प्राण-त्याग देता है । अचानक अच्छी या बुरी खबरें सुनने को मिलती है । हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । पैर का नाखून टूटता या खराब होने लगता है । किसी स्थान पर गिरने एवं फिसलने की स्थिति बनती है ।भ्रम होने के कारण व्यक्ति से हास्यास्पद गलतियाँ होती है।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।

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