परंपरा-होली की दूज पर सालों से बनगवां में लगता है मेघनाद बाबा वीर बंबूदेव का मेला
गौर कुर्मी समाज के लोग बच्चों का कराते हैं मुंडन संस्कार, गैर में बकरे को उल्टा बांधते हैं, कोड़ों से पंडा करते हैं पिटाई
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। होली पर्व के उपलक्ष्य में धुलेंडी के दूसरे रोज फाल्गुन माह की दूज पर तहसील रायसेन के ग्रामीण अंचलों में मेघनाद बाबा, वीर बंबूदेव की पूजन होती है गैर बांधी जाती है।ऐसी ही मेघनाद बाबा की पूजन की प्राचीन परंपरा का यह सिलसिला सदियों से लगातार जारी है। तहसील रायसेन के बनगवां में होली की दूज लगने वाले मेघनाद बाबा, वीर बंबूदेव के इस मेले ने एक अपनी अलग पहचान बनाई है।
कुर्मी गौर समाज के युवा समाजसेवी, भाजपा नेत्री सावित्री गौर, कैलाश गौर सचिव बद्री प्रसाद गौर, खेमचन्द गौर हेमराज गौर, दीपक पटेल प्रवक्ता सीएल गौर ने बताया कि बनगवां में हर साल होली की दूज पर मेघनाद बाबा की पूजन और मेले का आयोजन किया जाता है। यहां मेघनाद बाबा मेला सैकड़ों वर्षों से आस्था और विश्वास का संगम हैं। एक ही दिन लगने वाले इस मेले में मेघनाद बाबा को आराध्य देव मानकर कुर्मी, पाटीदार, गौर, पटेल समाज के लोग विशेष पूजा-अर्चना करते है। बनगवां की चौपाल स्कूल भवन के समीप चबूतरे पर लकड़ी की लगभग 25 फ़ीट ऊंची गैर बांधी जाती है। इस पर बकरे को उल्टा बांधकर लटकाया जाता है। गांव के बुजुर्ग प्रह्लाद गौर, मुन्ना लाल गौर बताते हैं कि इस रोज यहां कुर्मी गौर समाज के लोग परिवार सहित जुटते हैं।गेंहूँ, प्याज की पैदावार के मामले में पैमत बनगवां क्षेत्र मिनी पंजाब, मिनी नासिक माना जाता है। होली की दूज पर कुर्मी समाज के लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं। साथ ही पंडा से चबूतरे पर पान, बताशे, इलायची, लौंग, चिरौंजी का प्रसाद नारियल अर्पित कराते हैं। मेघनाद बाबा, वीर बंबूदेव के जयकारे लगाए जाते हैं।
मेघनाद बाबा, वीर बंबूदेव के एक दिनी मेले में गौर कुर्मी परिवार की ओर से अखाड़े का आयोजन किया जाता है। जिसे देखने आसपास के लगभग 30 गांव के लोग दूर-दूर से ग्रामीण पहुंचते हैं। इसके अलावा मेले में तलवारबाजी, लाठी बनेटी प्रदर्शन सहित अन्य पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो आकर्षण का केंद्र रहते हैं।



