खनिज माफियाओं पर फूटा आदिवासी आक्रोश: जयस ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन,

अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप
क्रेशरों से फैल रहे प्रदूषण, अवैध उत्खनन और पर्यावरणीय नुकसान पर कार्रवाई की मांग
सिलवानी। तहसील क्षेत्र के आदिवासी अंचलों में कथित अवैध खनन और स्टोन क्रेशरों से फैल रहे प्रदूषण को लेकर अब ग्रामीणों और आदिवासी समाज का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। आदिवासी संगठन जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) ने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रतिभा सिंह को सौंपकर खनिज माफिया और संबंधित विभागों की कथित मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
संगठन का आरोप है कि सिलवानी क्षेत्र के आदिवासी गांवों में नियमों को ताक पर रखकर स्टोन क्रेशरों का संचालन किया जा रहा है। निर्धारित सीमा से अधिक खनन, पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। जयस ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
आदिवासी गांवों में बढ़ रही परेशानी
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि सिलवानी से लगभग छह किलोमीटर दूर सागर मार्ग स्थित ग्राम खमेरा, ककरुआ सहित आसपास के आदिवासी अंचलों में संचालित स्टोन क्रेशर ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई क्रेशर संचालक स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर उत्खनन कर रहे हैं, जिससे शासन को राजस्व की हानि होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का भी दोहन हो रहा है।
संगठन ने कहा कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
धूल और धुएं ने छीना गांवों का सुकून
ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशरों से उड़ने वाली महीन धूल और काला धुआं गांवों तक पहुंच रहा है। घरों की छतों, आंगनों, खेतों और जल स्रोतों पर धूल की मोटी परत जम रही है। लोगों को दिनभर खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बावजूद राहत नहीं मिल रही।
महिलाओं ने बताया कि घरों में रखा भोजन और पेयजल तक धूल से प्रभावित हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी हैं।
सांस की बीमारियों का बढ़ा खतरा
जयस संगठन ने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं भी उठाई हैं। संगठन का कहना है कि क्रेशरों से निकलने वाली बारीक धूल लंबे समय तक लोगों के संपर्क में रहने पर दमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी रोगों का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार कई लोगों को सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। संगठन ने स्वास्थ्य विभाग से मेडिकल सर्वे कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
खेती पर मंडरा रहा संकट
ज्ञापन में कहा गया है कि उड़ती धूल फसलों की पत्तियों पर जमने से उनकी प्राकृतिक वृद्धि प्रभावित हो रही है। इससे कृषि उत्पादन में कमी आने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।
इसके अलावा लगातार खनन के कारण हरित क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ रहा है।
पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी
जयस ने आरोप लगाया कि अधिकांश स्टोन क्रेशरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं हैं। कई स्थानों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं किया जाता, न ही पर्याप्त ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है। वहीं कई क्रेशर आबादी के नजदीक संचालित हो रहे हैं, जो पर्यावरणीय मानकों के विपरीत बताया गया है।
संगठन का कहना है कि यदि नियमानुसार निरीक्षण किया जाए तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
शासकीय भूमि पर अवैध उत्खनन के आरोप
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर भी निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया जा रहा है। भारी मशीनों से दिन-रात हो रहे उत्खनन के कारण धूल, शोर और कंपन की समस्या लगातार बढ़ रही है।
जयस ने आशंका जताई कि अनियंत्रित खनन से भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है, भूमि क्षरण बढ़ सकता है और भविष्य में कृषि भूमि भी बंजर होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
जयस संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। अवैध उत्खनन, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण फैलाने वाले क्रेशर संचालकों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए। संगठन ने कहा कि आदिवासी अंचलों के लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस संबंध में प्रतिभा सिंह, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिलवानी ने कहना है कि क्रेशर संचालन एवं कथित अवैध उत्खनन संबंधी शिकायत ज्ञापन के माध्यम से प्राप्त हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच दल भेजा जाएगा। जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



