क्राइम

रात के अंधेरे में रेत माफिया का बेखौफ कारोबार, नदियों का सीना छलनी कर रहे अवैध उत्खननकर्ता

घुघरी, घुघरा, कछार और शुक्ल पिपरिया के घाटों पर अवैध उत्खनन की शिकायतें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से दिन-रात हो रहा परिवहन; क्या जिम्मेदार विभागों की निगरानी से बाहर है पूरा कारोबार?
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान।  ढीमरखेड़ा और उमरियापान क्षेत्र में रेत के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं ।  नदियों के घाटों से लेकर गांवों की सड़कों तक रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं । आरोप है कि रात के अंधेरे को ढाल बनाकर रेत का उत्खनन किया जा रहा है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से खुलेआम इसकी सप्लाई की जा रही है । घुघरी, घुघरा, कछार और शुक्ल पिपरिया सहित आसपास के नदी घाटों पर अवैध गतिविधियां संचालित होने की शिकायतों ने खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं ।
*रात में सक्रिय, दिन में भी नहीं थमता परिवहन*
स्थानीय लोगों के मुताबिक रेत के इस कारोबार में कथित रूप से शामिल लोग रात के समय नदी घाटों से रेत निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरते हैं और अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाते हैं । हैरानी की बात यह है कि दिन के समय भी रेत परिवहन की शिकायतें सामने आ रही हैं ।  यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो यह प्रशासनिक निगरानी और अवैध उत्खनन रोकने की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है ।
*किसके संरक्षण में चल रहा कारोबार?*
क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नदी घाटों से रेत निकालने और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से परिवहन की गतिविधियां लगातार होने की शिकायतें हैं, तो संबंधित विभागों की कार्रवाई प्रभावी क्यों नजर नहीं आ रही? क्या जिम्मेदार अधिकारियों तक इन गतिविधियों की जानकारी नहीं पहुंच रही, या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई का दायरा सीमित है? स्थानीय स्तर पर कथित सांठगांठ की चर्चाएं भी हो रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है ।
*नदियों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा*
रेत का अवैध उत्खनन केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप, जलस्तर, घाटों और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है । अनियंत्रित उत्खनन से भविष्य में ग्रामीणों और किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है ।  आखिर कुछ लोगों के अवैध कारोबार की कीमत क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा क्यों चुकाए?
*अब कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर चाहिए परिणाम*
क्षेत्रवासियो ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और खनिज विभाग के अधिकारियों से घुघरी, घुघरा, कछार और शुक्ल पिपरिया सहित सभी संदिग्ध नदी घाटों का संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है ।  ग्रामीणों का कहना है कि केवल दिन में औपचारिक निरीक्षण करने से स्थिति स्पष्ट नहीं होगी ।  रात के समय भी विशेष निगरानी दल गठित कर वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए ।
इसके साथ ही अवैध उत्खनन में प्रयुक्त वाहनों, रेत के भंडारण स्थलों और परिवहन मार्गों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए ।  यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए ।

Related Articles

Back to top button