मध्य प्रदेश

सिलवानी में रात 11 बजे हुई अतिक्रमण कार्रवाई पर बवाल, व्यापारियों में आक्रोश, कलेक्टर से हुई शिकायत

सिलवानी। नगर परिषद सिलवानी द्वारा बीती रात अचानक किए गए अतिक्रमण हटाने के अभियान ने नगर में हड़कंप मचा दिया है। सोमवार देर रात लगभग 11 बजे नगर परिषद का अमला जेसीबी लेकर बजरंग चौराहा, बरेली रोड स्थित दुकानों पर पहुंचा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान कुल 8 दुकानों के हिस्से तोड़े गए।
कार्रवाई के समय व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर घर लौट चुके थे। सुबह जब उन्हें घटनाक्रम की जानकारी मिली तो वे स्तब्ध रह गए। प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि न तो उन्हें कोई नोटिस दिया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिला।
व्यापारियों ने जताई नाराजगी, कहा- कार्रवाई नियमों के खिलाफ
व्यापारियों ने नगर परिषद की इस देर रात की कार्रवाई को पूरी तरह गलत और नियमों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि बिना पूर्व सूचना और उचित प्रक्रिया के दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया है।
नगर परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि ने बताया पक्षपातपूर्ण कार्रवाई
मंगलवार को आयोजित खंड स्तरीय जनसुनवाई में नगर परिषद उपाध्यक्ष निशा मतांबर के प्रतिनिधि मोनू मतांबर ने कलेक्टर रायसेन से इस कार्रवाई की शिकायत की। उन्होंने कहा कि 13 अक्टूबर को रात 11 बजे हुई यह कार्रवाई नियमों को ताक पर रखकर की गई है।
मोनू मतांबर ने बताया कि मौके पर कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था और कार्रवाई नगर परिषद में पदस्थ दरोगा माला (पत्नी श्री दिलीप) द्वारा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों में रखा सामान भी नष्ट हो गया और मौके पर कार्यवाही से जुड़े कोई वैध दस्तावेज या आदेश भी नहीं दिखाया गया।
केवल 8 दुकानों को ही क्यों निशाना बनाया गया?
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर के अन्य क्षेत्रों जैसे आजाद मार्केट, गैरतगंज रोड और अन्य हिस्सों में भी भारी अतिक्रमण है, लेकिन केवल 8 दुकानों पर ही कार्रवाई करना पक्षपात को दर्शाता है।
मोनू मतांबर ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम हो सकती है, क्योंकि पूर्व में नगर परिषद ने नोटिस जारी किए थे, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
कलेक्टर से की न्यायिक जांच और मुआवजे की मांग
जनसुनवाई में कलेक्टर से मांग की गई कि इस मामले में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। साथ ही पीड़ित दुकानदारों को मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग भी की गई है।

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