पर्यावरणमध्य प्रदेश

प्लांटेशन में लगे आम के पौधे, खरीदे आंवले के पौधे, वही पड़े, कई गड्डो में पेड़ नही लापरवाही

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेंदुखेड़ा । पर्यावरण का सन्तुलन बनाने हेतु सरकार अधिक से अधिक वृक्षारोपण करती है ओर यह वन विभाग के माध्यम से होता है,सरकार के द्वारा एक प्लांटेशन तैयार करने के लिये लाखो रुपये खर्च करती है और लगाए गए पौधों को ल्गभग सात आठ वर्षों तक उनकी देखभाल की जाती है समय समय पर निदाई गुड़ाई, खाद पानी देकर उनकी सुरक्षा की जाती है जिसके लिये एक बीड गार्ड एवं एक चोकीदार नियुक्त किया जाता है।इन वृक्षारोपण में सागोन आँवला, नीम, कंजी, शीशम आदि किस्म के पौधे लगाए जाते हैं।ओर सरकार इन्ही के रोपण का का पैसा देती है। लेकिन कुछ जगहों पर अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन वृक्षारोपण में लापरवाही कर देते हैं ओरजो पौधे लगने थे वो पौधे नही लगाए ओर किसी दूसरी प्रजाति के पौधे लगाकर कहना पूर्ति करके राशी निकाल ली जाती है जो सरकार के उद्देश्यों को पूरा नही करती है।ऐसा ही एक मामला तेंदुखेड़ा उप वन मण्डल के अंतर्गत आने वाला वन् परिक्षेत्र तारादेही में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। वर्ष2023-24 में बीट वरपटा के कक्ष क्रमांक पी एफ 244 में में ल्गभग 20 हेक्टेयर मेंवृक्षारोपण किया गया था।यह वृक्षारोपण यमुना नदी पुनः जीवन मिश्रित के नाम का था और यह एन पी वी मद के तहत बनाया गया था।इसके चारों तरफ 2279 मीटर खकरी बनाई गई है।इसमे कुल चार सेक्टर है और इसमे चार हजार गड्ढे किये गए थे।इस प्लांटेशन में गाइड लाइन के तहत रोपण नही किया गया।वन परिक्षेत्र अधिकारी तारादेही के द्वारा इसमे आंवला प्रजाति के पौधे खरीदे थे अधिकतर उनका रोपण नही किया गया।इसमे कई जगह आम के पौधों का रोपण किया गया हैवह भी लोकल प्रजाति के देशी पौधे थे,जो कि वन विभाग के किसी भी वृक्षारोपण में नही लगाए जाते हैं।जो पौधे खरीदे गए थे वो अभी भी प्लांटेशन में इहा वहा छिपे रखे गए है कुछ वहा से अलग कर दिए ओर कुछ लोगो को दे दिए। इसमे कुछ गड्ढे बिना पौधों के खाली पड़े हुए हैं इनमे से कुछ पौधे मर भी चुके हैं वन विभाग के द्वारा उनको दोबारा नही लगाया गया है। जबकि नियमानुसार जो पौधे मर जाते हैं उन्हें दोबारा लगाने का प्रवधान है लेकिन वन् परिक्षेत्र अधिकारी के द्वारा ऐसा नही किया गया।इस प्लांटेशन में जो खकरी बनाई गयी है वह कही कही से गिर गयी हैं जिससे मवेशियों के अंदर घुसने की आशंका बनी रहती है।सूत्रों के अनुसार जब यह प्लान्टेसन बनाया जा रहा था जब यह सामान्य वन मण्डल में शामिल था फिर यह अचानक रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में शामिल हो गया था इसलिये विभाग ने आनन फानन में गाइड लाइन के विरुद्ध रोपण कर दिया और लापरवाही पूर्वक कार्य कर दिया।
डिप्टी रेंजर मुकेश दुबे ने बताया कि आम के पौधे अपने आप उगे है। आंवले के पौधों को लगवाना है खकरी बाढ़ में बह गई है दूसरी बनवाना है।

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