जीवन जीने की कला हमें मधुमक्खी से सीखनी चाहिए : कमलेश शास्त्री

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । नगर में चल रहे रुद्राभिषेक में द्वितीय दिवस में पं.कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मधुमक्खी कठिन संघर्ष का जीवन्त पर्याय है। वह छोटी सी काया अपने जीवन पर्यन्त संघर्ष को स्वीकार करती है। अनुशासित तरीके से संघर्ष कर जीवन जीने की कला हमें मधुमक्खी से सीखनी चाहिए। वह दिन भर कठिन यात्राएँ कर मधु इकठ्ठा करती है। उसका संघर्ष दिन खुलते ही प्रारम्भ हो जाता है। हमें भी अपने जीवन में मधुमक्खी से सीख लेनी चाहिए। प्रबल चुनौतियाँ भी परास्त की जा सकती हैं। हमें जीवन में कठिन संघर्ष का स्वागत करना चाहिए। जब चुनौतियाँ आती हैं, उसके बाद से ही संघर्ष प्रारम्भ होता है। हम अपने जीवन को कठिन संघर्षों के साथ ही स्वर्ण सदृश बना सकते हैं। कठिन संघर्ष हमारे व्यक्तित्व में सोने सा निखार व चमक पैदा कर देता है। संघर्ष से ही हम वह बन पाते हैं जो हमारी नियति ने हमारे लिए तय किया होता है। जीवन में सर्वदा सफलता नहीं मिलती, लेकिन असफलता से निराश नहीं होना चाहिए। हमें अपनी क्षमताओं को पहचानकर नए सिरे से प्रयास करना चाहिए। जीवन में हम सब कुछ नहीं हैं। हममें बहुत कुछ छिपा हुआ है, जिसे हमें ढूँढ़ना है। हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना चाहिए और उन्हें विकसित करना चाहिए। संघर्ष ही जीवन है, जीवन ही संघर्ष है। संघर्ष-हीन जीवन मृत्यु का पर्याय है। संघर्ष वह अज्ञात शक्ति है, जो व्यक्ति को निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इसलिए संघर्ष के अभाव में जीवन का उपयुक्त आनन्द नहीं उठाया जा सकता। संघर्ष से हमें ज्ञान और अनुभव प्राप्त होता है। संघर्ष से हम सशक्त बनते हैं। जो लोग संघर्ष करते हैं, वे ही जीवन में सफल होते हैं। जीवन में संघर्ष है – प्रकृति के साथ, स्वयं के साथ, परिस्थितियों के साथ। तरह-तरह के संघर्षों का सामना आए दिन हम सबको करना पड़ता है और इनसे जूझना होता है। जो इन संघर्षों का सामना करने से कतराते हैं, घबराते हैं, वे जीवन से भी हार जाते हैं, और जीवन भी उनका साथ नहीं देता। अतः हर सफल व समृद्ध व्यक्ति के जीवन में एक संघर्ष की गाथा अवश्य होगी।



