मुहरी की लकडी मे पूरे नही जलते शव, अधजले शव ही समेंटे जा रहे है भस्मी मे

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । श्मशान घाटों पर इन दिनो हृदय विदारक नजारे देखने सुनने को मिल रहे है जब दाह संस्कार हेतु मोटी खटाऊ लकडी के अभाव मे मुहरी सिर बोझा से मिलने वाली गैर खटाऊ पतली जलाऊ लकडी से ही गरीब व सामान्य लोगो के परिजनो की मौत हो जाने पर उनका अंतिम संस्कार किया जाता है प्राय देखा जाता है कि ऐसी पतली लकडियो से शव पूरी तरह से भस्मी भूत भी नही हो पाता और लोगो को अधजले शवो को ही भस्मी के रुप मे समेटना पडते है यही एकत्र भस्मी खारी को लोग पवित्र नदियो मे विसर्जन हेतु ले जाते है अधजले शवो को भस्मी के रुप मे लेकर जाना बेहद अमानवीय व दर्दनाक सा लगता है। बतादे की चारो ओर घने जंगलो से घिरा व जंगल के अति निकट होने के बावजूद गौरझामर मे अंतिम संस्कार हेतु जलाऊ लकडी नही मिल रही है। वनविभाग से सहज व अधिकारिक रुप से मोटी जलाऊ लकडी नही मिलना बेहद ही दुर्भाग्य पूर्ण है बता दें की पहले लोगो को जलाऊ लकडी के रूप मे वन विभाग के माध्यम से हर साल बहुत ही कम दामो मे रेंज आफिस गौरझामर से फडी मिला करती थी जो लोगो को घरेलु ईधन आम जरुरत और निस्तार के अलावा यदि परिवार मे किसी की मृत्यु हो जाती थी तो यही फडी की लकडी दाह संस्कार मे भी काम आ जाती थी शासन ने जबसे वन विभाग के माध्यम से आम पब्लिक को फडी के माध्यम से मिलने वाली जलाऊ लकडी की व्यवस्था बंद है तभी से लोगो की परेशानी सातवे आसमान पर पहुंच गई है कहावत है कि जल मे मीन प्यासी, कुछ इसी प्रकार का हाल गौरझामर वासियो का है जंगल के बीचो बीच होने के बाद भी गौरझामर के नागरिक जलाऊ लकडी को तरस रहे है जलाऊ ही नही लोग मरे लोगो को भी जलाऊ मोटी लकडी नही मिलने के कारण ठीक से जला भी नही पा रहे है मोटी खटाऊ जलाऊ लकडी सहज उपलब्ध नही होने पर शव अधजले ही रह जाते है इस पीडादायी हृदयविदारक घटनाक्रम को देखकर लोगो का मन आन्दोलित हो जाता है इस विकराल जनसमस्या और उद्वोलित जनभावना को देखते हुए यदि शासन गौरझामर के शमशान घाटों पर जलाऊ लकडी की व्यवस्था शीध्र नही करता है तो लोगो को मजबूरी मे आन्दोलन करना पड सकता है। शासन प्रशासन व वन विभाग स्थानीय मरघटो पर सस्ती सहज सुलभ मोटी जलाऊ लकडी की समस्या स्थायी रूप से तत्काल हल करे।



