बेवफा पत्नी और आशिक मिजाज जीजा और साथी पहुंचे जेल की सलाखों के पीछे

देवर और ससुर को फसाने का किया था प्रयास, सनसनीखेज एवं जघन्य हत्याकाण्ड में सभी सात आरोपियो को आजीवान कारावास की सजा
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह । करीब 7 वर्ष पूर्व हटा थाना क्षेत्र के सुनार नदी पर बने घुराघाट पुल स्थित रेवा नामदेव के मकान में किराये से रहने वाले जितेंद्र सिंह की तीन अज्ञात बदमाशो ने सुबह-सुबह घर में घुसकर धारदार हथियारो से चोटे पहुंचाकर हत्या कर दी थी। हत्या के सूचना पर हजारों की तादाद में तमाशबीन घटना स्थल पर एकत्र हो गये थे। बीच नगर में दिन दहाड़े घर मे घुसकर हत्या की खबर ने उपकाशी कहे जाने वाली धार्मिक नगरी हटा वासियो को भयाकांत कर दिया था। प्रकरण जघन्य सनसनीखेज प्रकरणो मे चिन्हित था। जहां इस प्रकरण मे विद्वान न्यायाधीश श्रीमती ज्योति सिंह राजपूत की अदालत से सभी 7 आरोपियो को धारा 302, 201, 120 बी 449, 450, 34 भादवि में आजीवान कारावास की सजा सुनाई है। मृतक की पत्नी सविता सिंह की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपीयो के विरूध्द तत्कालीन थाना प्रभारी एवं वर्तमान हटा पुलिस एसडीओपी वीरेंद्र बहादुर सिंह के द्वारा हत्या का अपराध पंजीबध्द किया गया। प्रथम सूचना प्रतिवेदन मे सविता सिंह ने अपने पति जितेंद्र की हत्या के लिये अपने देवर रवीन्द्र और ससुर विजय सिंह पर संदेह व्यक्त किया था, परन्तु विवेचना के दौरान जो कहानी सामने आई वह चौकाने वाली थी। जितेन्द्र सिंह की हत्या का षडयंत्र उसकी ही पत्नि सविता के द्वारा अपने नन्दोई बडे राजा उर्फ रामेन्द्र सिंह से मिलकर किया था। बड़े राजा ने अपने साले जितेंद्र की हत्या के लिये सोनू खान को एक लाख रूपये की सुपारी दी थी। सोनू खान ने जितेन्द्र की हत्या करने के लिये लकी महाराज को यंगेज किया था लकी महाराज ने हत्या करने के लिये अपने साथी संतोष, कुंवरलाल एवं कुलदीप का उपयोग किया। दिनांक घटना के एक दिन पूर्व बड़े राजा ने लतीफ खान, कुलदीप मिश्रा के साथ घटना स्थल की रैकी की। षडंयत्र के अनुसार घटना के पूर्व मृतक की पत्नि सविता सिंह ने बडे राजा के माध्यम से लकी महाराज के मोबाईल से अपने पति जितेंद्र के बारे में यह बताया था कि जितेंद्र सो रहा है। सविता के द्वारा दी गई सूचना के आधार पर लकी महाराज, कुंवरलाल एवं संतोष मिश्रा ने रेवाराम के मकान में घुसकर जितेन्द्र की चाकू से घोंदकर हत्या कर दी। यहां यह उल्लेखनीय है कि षडयंत्र के अनुसार सविता सिंह पानी भरने के बहाने घर से दूर चली गई थी। घटना को अंजाम देने के बाद उक्त तीनो हत्यारे मोटरसाईकिल से फरार हो गये थे। मुख्य आरोपी लकी महाराज, कुंवरलाल एवं संतोष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद उनके मोबाईल नंबरो की लोकेशन एवं सीडीआर के परीक्षण पर घटना का पूरा षडयंत्र सामने आया था। प्रकरण में जितेंद्र की हत्या के लिये सीधे तौर पर दोषी लकी महाराज, कुवरलाल, संतोष मिश्रा के साथ हत्या के षडयंत्र में मृतक की पत्नि सविता सिंह, मृतक के बहिनोई बडे राजा, सुपारी किलर सोनू खान, रैकी करने वाले लतीफ खान, कुलदीप मिश्रा को गिरफ्तार कर उनके विरूध्द आरोप पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय में विचारण के दौरान विवेचना अधिकारी के द्वारा प्रस्तुत किये गये आरोपियो के विरुध्द दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य पर शत प्रतिशत विश्वास करते हुये आरोपी क्रमशः लकी महाराज उर्फ नीरज पिता परमानंद तिवारी निवासी ग्राम बमीठा, संतोष पिता हरिशंकर मिश्रा निवासी ग्राम खरियानी थाना बमीठा, कुवंरलाल पिता पंचू लोधी निवासी ग्राम सुनवानी थाना पवई, बडे राजा उर्फ रामेंद्र सिंह पिता रामाधार सिंह निवासी ग्राम वीरसिंहपुर थाना पवई, सविता पति स्व. जितेंद्र सिंह निवासी ग्राम हरदुआ पंचम थाना हटा, सोनू पिता इब्राहिम खान निवासी मिनौनीगंज थाना पवई, लतीफ पिता जब्बार मो. खान निवासी कृष्णगंज थाना पवई को माननीय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमति ज्योति सिंह राजपूत की न्यायालय से दिनाक 15 मई 23 को सजा सुनाई हैं। फैसले के समय उक्त सभी आरोपी न्यायालय में उपस्थित थे पूरा मामला सायबर साक्ष्य पर आधारित था और सायबर की साक्ष्य को न्यायालय में विचारण के दौरान आरक्षक गौरव मिश्रा एवं सौरभ टंडन के द्वारा बखूबी प्रमाणित किया था। प्रकरण की विवेचना तत्कालीन दमोह पुलिस अधीक्षक व वर्तमान में डीआईजी खरगोन तिलक सिंह के निर्देशन में तत्कालीन थाना प्रभारी एवं वर्तमान में एसडीओपी हटा के रूप मे पदस्थ वीरेंद्र बहादुर सिंह के द्वारा की गई एवं विचारण के दौरान शासन की ओर से अपर जिला लोक अभियोजन अधिकारी मुकेश पाण्डेय के द्वारा पैरवी की गई थी। सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते वक्त पुलिस की हिरासत में मौजूद सभी आरोपी फूट-फूट कर रोते हुए नजर आए। इस मामले का पर्दाफाश करने में तत्कालीन समय मे वर्तमान फतेहपुर चौकी प्रभारी नागेंद्र सिंह, एएसआई आसिफ अली, प्रधान आरक्षक शैलेन्द्र सिंह, दीपक राजपूत, उमेश तिवारी, राजकुमार आदि स्टाफ ने अहम भूमिका निभाई थी।



