अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह में विधिक जागरुकता शिविर सम्पन्न
सिलवानी । मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार व राष्ट्रीय महिला आयोग दिल्ली के समन्यवय से एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रायसेन अनीस कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में, तहसील विधिक सेवा समिति सिलवानी द्वारा शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह के उपलक्ष्य में जनपद पंचायत हॉल सिलवानी में महिलाओं के लिए विधिक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
उक्त शिविर में मुख्य वक्ता एवं रिर्सोस पर्सन व न्यायाधीश एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति सिलवानी अतुल यादव ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार दिनांक 4 मार्च से दिनांक 11 मार्च 2023 अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय महिला आयोग के तत्वाधन में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को जमीनी स्तर पर विधिक जागरूक करने एवं महिला शक्तिकरण के उद्देश्य से यह जागरुकता शिविर आयोजित किया गया है ।
शिविर में न्यायाधीश द्वारा जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में महिलाओं को कानूनी साक्षरता का ज्ञान होना उनके व उनके परिवार के विकास के लिए आवश्यक है। विधिक जागरूकता से ही महिलाओं का सशक्तिकरण संभव है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग के समन्वय से महिलाओं के लिये यह विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन हुआ है। अक्सर देखा गया है कि महिलाएं अपने अधिकारों के लिए कानून के ज्ञान के अभाव के चलते आवाज नहीं उठा पाती है। इसी के चलते वह कई तरह की प्रताड़नाओं का सामना करती है। उन्होंने कहा कि हमें अपने संवैधानिक अधिकारों का लाभ लेना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि लैंगिक अपराधों से सामान्यजन को जागरूक रहना चाहिए। अगर कोई आपका पीछा करता है, छेड़छानी करता है, घूरता है एवं इत्यादि कृत्य करता है यह सब अपराध की श्रेणी में आता है।
शिविर में अुतल यादव न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिलवानी महिलाओं को भारतीय दण्ड संहिता में वर्णित महिलाओं के विरूद्ध अपराध से सम्बंधित प्रावधान, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, पोक्सों अधिनियम, 2012, महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 अर्न्तगत महिलाओं के विभिन्न अधिकारों के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी। पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान काम के लिए समान वेतन हो। इसी अनुसरण में संसद ने समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 अधिनियमित किया है, जो समान कार्य या समान प्रकृति के कार्य के लिए पुरुष और महिला श्रमिकों को समान पारिश्रमिक के भुगतान को वैधानिक अधिकार देता है, जिसे लिंग के आधार पर भेदभाव भी रुकता है । उन्होने उपस्थित महिलाओं को बताया कि यदि कोई महिला मुकदमें की पैरवी आर्थिक स्थिति के कारण करने में असमर्थ है तो उसे आवेदन देने पर निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जायेगा । शिविर में न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लॉच किये गये विधिक सहायता एप्प डाउनलोड करने की सलाह दी गई ।
महिला जागरुकता शिविर में रिर्सोस पर्सन आरके नेमा द्वारा उपस्थित महिलाओं को बाल विवाह निषेध अधिनियम के बारे जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है। चाइल्ड मैरिज एक्ट 2006 के मुताबिक 18 साल से पहले किसी लड़की या 21 साल से पहले किसी लड़के की शादी की जाती है, तो वह कानूनन अपराध होगा और उसे बाल विवाह माना जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत में बाल विवाह सदियों से प्रचलित है और यह किसी धर्म विशेष से नहीं होकर सभी धर्म समुदायों और वर्गों में लंबे समय से चल रही प्रथा है। वर्तमान समय में यह प्रथा ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिलती है। बाल विवाह के पीछे के कारणों में मुख्यत: गरीबी और शिक्षा जैसे कारण हैं। उन्होंने शिविर में महिलाओं से आह्वान किया कि बाल विवाह ना करें। उन्होंने कहा कि बाल विवाह होने के कारण ना तो पति पत्नी कमाने में सक्षम होते हैं और ना ही उनका शारीरिक विकास होता है। बाद में इसका खामियाजा महिलाओं व उनकी संतानों को भुगतना पड़ता है।
शिविर में महिला बाल विकास अधिकारी गनेश ठाकुर द्वारा महिलाओं को बताया गया कि बालिकाओं सहित सभी महिलाओं से प्रत्येक गलत आचरण का प्रारंभ में ही विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यौन अत्याचार एवं अन्याय के विरुद्ध उन्हें सजगता से खड़ा होना होगा।
शिविर में महिला बाल विकास विभागा पर्यावेक्षक सुरक्षा विश्वकर्मा द्वारा महिला बाल विकास द्वारा चालाई जा रही विभिन्न योजनओं के बारे में बताया तथा प्रदेश में विभिन्न विभागों द्वारा महिलाओं एवं बच्चों के सर्वागिण विकास से सम्बन्धित योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में बताया । महिलाओं की स्वायत्ता एवं सशक्तिकरण सुनिश्चित करते हुये उनकी आर्थित एवं सामाजिक स्थिति में निरन्तर सुधार लाने हेतु राज्य महिला आयोग कार्यरत है।
कार्यक्रम का संचालन अभिभाषक संघ सचिव सुनील श्रीवास्तव द्वारा किया गया एवं उपस्थित महिलाओं को बताया कि किसी नाबालिग के साथ कोई अपराध होता है तो इसकी सूचना बिना किसी संकोच अथवा भय के सबसे पहले पुलिस को दें ।
कार्यक्रम की शुरुआत मॉं सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। शिविर में अधिवक्ता एसके जैन, एसएम इमरान, एसएम लुकमान, मनोज त्रिवेदी उपाध्यक्ष अभिाभाषक संघ, प्रदीप शर्मा, महिला बाल विकास सुपरवाईजर आबिदा सहित लगभग ग्रामीण स्तर की 190 महिलाएं उपस्थित रही ।




