बुंदेलखंड का प्रसिद्ध तिसाला बुंदेली मढई मेला घाना मे इस साल भरेगा

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर। बुंदेली लोक परम्परा से ओतप्रोत बुंदेलखंड का प्रसिद्ध पारम्परिक तिसाला दिवारी मढई मेला बुंदेलखंड के हृदयस्थल सागर जिले के देवरी विधान सभा क्षेत्र के केसली प्रखंड अन्तर्गत ग्रामीण परिवेश गांव घाना, ( बांकोरी ) मे इस वर्ष भरेगा। बता दें की घाना का लगने वाला बुंदेली दिवारी मढई मेला गौरझामर सहजपुर मार्ग पर गौरझामर से 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहां पर लगने वाला तिसाला मढई मेला दिवारी ग्यारस के बाद दो सालो के अंतराल के बाद तीसरे वर्ष भरता है जो इस वर्ष अगहन माह की पूर्णिमा से भरना शुरु होगा और करीब पांच दिनो तक धूमधाम से भरेगा । उल्लेखनीय है कि घाना का प्रसिद्ध मढई मेला तांत्रिक क्रियाओ के कारण लोकप्रिय है यहां पर पूरे बुंदेलखंड के गुनियां ओझा तांत्रिक आकर मढई मेले मे अपनी जागृत तंत्र शक्ति मंत्र शक्ति गुनियाई विद्या का गुनियो के बीच आपस मे स्पर्धा के साथ मढई मेले के खुले मेंदान मे प्रर्दशन करते हुए ढोलक, टिमकी, मृदंग, तारे, झनकोरा, हारमोनियम, रमतूला आदि वाद्य यंत्रो के गीत संगीत के बीच ढाल को हांकते है। देखा जाता है की जिन गुनिया ओझाऔ की गुनियाई प्रबल व शक्तिशाली होती है ढाल उसी की तरफ खिची चली जाती है इसमे ढाल को लोग कमर मे बांधते है फिर मंत्रो की शक्ति से हांकी जाती है मढई मेले मे दिवारी नृत्य बेडनियों की बुंदेली राई मोनियां नृत्य आदि आयोजित किये जाते है जिन्हे लोग रात भर मंत्रमुग्ध होकर देखते व आनंद लेते है किवदंती है की पहले घाना के मढई मेले मे ढाल व्यक्ति विशेष की कमर मे नही बांधकर जमीन मे गाढ दी जाती थी जिसे गुंनियां तात्रिक लोग अपनी अपनी तंत्र मंत्र की शक्ति के प्रयोग करके उसे हांकते चलाते थे और ढाल भी मंत्रों के बल पर जमीन मे ही गढी हुई नाली कूढ बनाते हुए चलने लगती थी पुराने लोगो की इन्ही गुनयाई विधाओ के कारण मढई मेले लोकप्रिय हुए है जिन्हे लोग बडी कौतुकता के साथ देखते व मजे लेते है मेले मे लोगो की मौज मस्ती व मनोरंजन हेतु नाना प्रकार की दुकाने आमोद प्रमोद के संसाधन उपलब्ध रहते है जिनका बच्चे युवा वर्ग खूब मजे उडाते है। क्षेत्र मे अनेको स्थानो पर मढई मेले आयोजित किये जा रहे है जिनका लोग बेसब्री से इंतजार करते है।



