मध्य प्रदेश

अधिकांश सरपंचों ने पद की गरिमा बनाए रखने के लिए, सरपंच नहीं ठेकेदार कर रहे निर्माण कार्य

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । गांवों में विकास कार्य, भवनों, सड़कों आदि निर्माण कार्य के लिए केन्द्र सरकार, एवं राज्य सरकार ने तो ग्राम पंचायत के सरपंचों को जिम्मेदारी दी है, लेकिन निर्माण कार्य के प्रारंभ से लेकर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने राशि आहरण करने में होने वाली दिक्कतों के कारण क्षेत्र के अधिकांश सरपंचों ने पचड़े में पडऩे की बजाय ठेकेदारों से काम कराना ही ज्यादा मुनासिब समझा है।
ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों में सभी कार्य ठेकेदारों द्वारा ही किया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में होने के बाद भी ठेकेदारी की प्रथा पर रोक लगाने के बजाय अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में ठेकेदार हावी है । पंचायतों में निर्माण कार्य ठेकेदारों द्वारा कराए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदार सरपंचों को पांच से दस प्रतिशत तक कमीशन देते है । ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है । सरपंच को कमीशन देकर ठेकेदार उसका मुंह बंद कर देता है। जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों का कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है।
सरपंच किसी भी निर्माण कार्य की स्वीकृति से लेकर उसको बनाने में लगने वाली सामग्री, निर्माण के पश्चात मूल्यांकन सत्यापन तथा अंत में राशि आहरण के लिए जनपद कार्यालय के चक्कर लगाता है । कभी सीईओ साहब नहीं आए है। तो कभी इंजीनियर नहीं मिलते तो कभी एसडीओ मिल भी गए तो काम होगा इसकी गारंटी नहीं है। इससे परेशान होकर सरपंच ठेकेदार को काम सौंपकर फ्री हो जाता है। ठेकेदार अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके इन सारे कामों को अच्छी तरह से मैनेज कर लेता है। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में कुछ ऐसे ठेकेदार वर्षों से सक्रिय है। जो पंचायतों का कार्य बेधड़क कर रहे है । ठेकेदार बाकायदा निर्माण कार्यों से संबंधित फाइलें स्वयं लेकर जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा आते है।
ठेकेदारों द्वारा कमीशन देकर इंजीनियर, एसडीओ, एकाउंटेंट से मिलकर कार्य निपटाते हैं । इस चक्कर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को ताक पर रख दिया जाता है ।

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