धार्मिकमध्य प्रदेश

आचार्य श्री जैन समाज के ही नही अपितु मानव समाज के संत थे

दिगबंर सरोवर के राष्ट्र संत आचार्य विद्यासागर महाराज युग द्रष्टा के साथ ही संपूर्ण मानव जाति के आचार्य थे
वक्ताओ ने संबोधन में आचार्यश्री के बताए सत्य, अहिंसा, करुणा के मार्ग पर चलने का मार्ग का किया आव्हाण,
अखण्ड दिगंबर जैन समाज व नगर परिषद ने किया सर्व समाज विनयांजलि सभा का आयोजन,
4 घंटे चली अंतर्राष्ट्रीय विनयांजलि सभा में सेंकड़ो की संख्या में शामिल हुए महिला, पुरुष

सिलवानी । परम आराध्य वर्तमान के वर्धमान संत शिरोमणि आचार्य प्रवर श्री विद्यासागर जी महाराज की उत्कृष्ट सल्लेखना समाधिमरण उपरांत अंतर्राष्ट्रीय सामूहिक सर्वधर्म विनयांजलि सभा का आयोजन रविवार को नगर के सीएम राइज विद्यालय प्रांगण में किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ मंगला चरण का पाठ किया। अतिथियों ने श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
इक्कीसवीं सदी में जिनधर्म के मूर्तिमान स्वरूप, जिनवाणी के अनन्य साधक, अनेकांत एवं स्याद्वाद के दिव्य प्रवर्तक, जैन आदर्शों को अपनी चर्या से प्रतिपादित करने वाले युग दृष्टा, इस युग के महान संत, जिन शासन के उननायक, यषस्वी, तपस्वी, जिन धर्म प्रभावक, राष्ट्र संत, संत शिरोमणि, गुरुवर आचार्य विद्यासागर महाराज मात्र जैन समाज के संत ही नही थे बल्कि वह दूनिया की संपूर्ण मानव जाति के संत थे। उन्होने जीवन पर्यन्त जीव कल्याण के कार्य किए, उनका निधन संपूर्ण मानव जाति के लिए ना भरने वाली अपूरनीय क्षति है। लेकिन उनके विश्व कल्याण के संदेश मानव जीवन को दिशा देते रहेगे। आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति आचार्यश्री के बताए बताए मार्ग की मात्र चर्चा ना करें बल्कि चर्या का हिस्सा बनावे, यही सच्ची विनयांजलि होगी।
यह उद्गार इंडिया नही भारत बोलो, दूसरों की भलाई के लिए सुखों का त्याग ही सच्ची सेवा है, अहिंसा और जियो व जीने दो सूत्र का पालन करें आदि दिव्य देशना के प्रणेता आचार्य विद्यासागर महाराज के सल्लेखना पूर्वक समाधि होने पर रविवार को अंतर्राष्ट्रीय विनयांजलि सभा का सभा का आयोजन अखण्ड दिगंबर जैन समाज व नगर परिषद सिलवानी के द्वारा संयुक्त रुप में सीएम राइस स्कूल परिसर में किया गया।
कार्यक्रम को अनिल बजाज, रामकृष्ण रघुवंशी, पूर्व नप अध्यक्ष मुकेश राय, ओमकार शर्मा, आरएस श्रीवास्तव, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि विभोर नायक, शालिगराम सोनी, विजय सोनी, गोविंद नामदेव, सुरेंद्र नेमा, सलीम काजी, राजपालसिंह राजपूत, हिउस अध्यक्ष रानू सोनी, मुस्लिम त्यौहार कमेटी अध्यक्ष इल्याज ताज, पार्षद प्रतिनिधि मोहन साहू, जन भागीदारी समिति अध्यक्ष श्याम साहू, प्राचार्य एनपी शिल्पी, संतोष जैन कक्का, डॉ. लक्ष्मीकांत नेमा, पूर्व नप अध्यक्ष संजय मस्ताना, नगर परिषद अध्यक्ष रेशु विभोर नायक, बाल ब्रह्मचारी एकता दीदी, रिचा दीदी, प्राची दीदी, रोली सिंघई, मॉ शारादा कॉलेज संचालक मदनसिंह रघुवंशी, एडवोकेट आलोक श्रीवास्तव, योगाचार्य रामगोपाल साहू, किशोर सिंह शेखावत, पत्रकार श्रीराम सेन, बबलू पाल, गजेंद्र रघुवंशी ब्रेनियस प्राचार्य, जिनेश जैन सोडरपुर, मनीष सिंघई, संतोष जैन एडवोकेट, सिंघई कौशल कुमार जैन, डॉ. पारस जैन, सचिन मेडीकल सहित अनेको वक्ताओ ने संबेाधित किया ।
वक्ताओ ने अपने संबोधन में आचार्यश्री को युग पुरुष, युग द्रष्टा, राष्ट्र संत आदि उपाधि से नवाजते हुए बताया कि उनके संपर्क मे आने से कंकड़ भी शंकर के रुप में प्रतिष्ठत हो जाता था। वक्ताओ ने बताया कि सत्ताधारियों को गलती बताने की हिम्मत, मातृभाषा के लिए प्रेम, कठिन परिस्थियों में मुस्कुराहट, मुट्ठी भर भोजन, न कारों का काफिला न सोने चांदी के बिस्तर, पांवों में छाले और सुधार के लिए बढ़ते कदम। शांति, सुचिता, संयम, वाणी, प्रेम, ईश्वर और अनंत यात्रा। शब्द नहीं मिलते, ऐसे संतों के लिए। परमपूज्य गुरूदेव ने पूरी जागृत अवस्था में अंत समय तक प्रभु स्मरण के साथ उपस्थित निर्यापक श्रमण मुनि योगसागर जी, निर्यापक श्रमण मुनि समतासागर महाराज, निर्यापक श्रमण मुनि प्रसादसागर महाराज, मुनिश्री चन्द्रप्रभसागर महाराज, मुनिश्री पूज्यसागर महाराज, मुनि निरामयसागर महाराज, मुनिश्री निस्सीम सागर महाराज, ऐलक श्री निश्चसागर महाराज, ऐलक श्री धैर्यसागर महाराज की उपस्थिति और संबोधन के दौरान नश्वर देह का चन्द्रगिरि तीर्थ पर त्याग कर दिया। इसके अतिरिक्त अन्य संस्मरण भी व्यक्त किए।





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