ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग बुधवार, 31 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – बुधवार माघ माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 11:36 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथि स्वामी – पंचमी तिथि के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त 01:08 AM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है।जबकि बुध राशि का स्वामी है। तथा स्वामी देवता है सवितृ अर्थात् सूर्य देवता हैं।
🔕 योग – सुकर्मा योग 11:40 AM तक, उसके बाद धृति योग
प्रथम करण : तैतिल – 11:36 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 12:52 ए एम, फरवरी 01 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:35:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:25:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:25 ए एम से 06:17 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:23 पी एम से 03:06 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:56 पी एम से 06:23 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:59 पी एम से 07:18 पी एम
💧 अमृत काल : 06:22 पी एम से 08:10 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, फरवरी 01 से 01:01 ए एम, फरवरी 01
सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:10 ए एम से 01:08 ए एम, फरवरी 01
❄️ रवि योग : 01:08 ए एम, फरवरी 01 से 07:10 ए एम, फरवरी 01
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को हरे फल भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/रवियोग, गोरिल्ला सूट दिवस, पिछड़ा दिवस, गुरू हर राय जन्म दिवस, भारतीय खिलाड़ी लोपामुद्रा भट्टाचार्जी जन्म दिवस, सैनिक मेजर सोमनाथ शर्मा जन्म दिवस, अभिनेत्री अमृता अरोड़ा जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी मिनजुर भक्तवत्सलम स्मृति दिवस, भारतीय नेता मनीराम बागड़ी स्मृति दिवस, अभिनेत्री प्रीति जिंटा जन्मोत्सव, स्वातंत्र्य दिन – नौरू., मोर को भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित दिवस।
✍🏼 विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🦅 Vastu tips 🕸️
वास्तु शास्त्र के अनुसार उल्लू की मूर्ति को हमेशा घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए. इस दिशआ में उल्लू की मूर्ति रखना शुभ माना जाता है.इस बात का भी खयाल रखें कि उल्लू का मुंह घर के मेन गेट की ओर हो इससे घर में नकारात्मकता नहीं आती और बुरी नजर भी नहीं लगती.
उल्लू को घर के अलावा आप अपने ऑफिस में भी रख सकते हैं.इसे ऑफिस में रखने से सकारात्मकता आती है और नकारात्मकता दूर होती है जिससे व्यक्ति तरक्की करता है और उसे नए अवसर प्राप्त होते हैं.
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में उल्लू की फोटो से बेहतरव इसकी मूर्ति होती है. मूर्ति कांस्य की हो तो ज्यादा लाभकारी मानी जाती है. उल्लू की मूर्ति को शुक्रवार के दिन घर में स्थापित करना चाहिए क्योंकि शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है.
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कम उम्र से ही अगर महिलाओं में कमर दर्द की समस्या परेशान कर रही है तो इसके लिए आजकल की लाइफस्टाइल जिम्मेदार होती है। लगातार बैठने या फिर ज्यादा लंबे समय तक खड़े रहने की वजह से पीठ में दर्द, अकड़न होने लगती है। दरअसल, जब कमर लगातार एक ही स्थिति में लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे मांसतपेशियों में जकड़न होने लगती है। ऐसे में जब आप हिलती-डुलती हैं तो कमर में दर्द होता है। कमर दर्द की इस समस्या से राहत पाने के लिए मात्र स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी मदद कर सकती है।
महिलाओं के गलत खानपान और सही पोषक तत्वों की कमी भी कमर दर्द के लिए जिम्मेदार होती है। हड़्डियों के पोषण के लिए कैल्शियम और फास्फोरस जरूरी होता है। साथ ही विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा भी जरूरी होती है। इन सबकी कमी की वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। और कई बार अचानक से लगी चोट की वजह से कमर में दर्द होने लगता है।
बहुत सारी महिलाओं को कम उम्र से ही पीएमएस की समस्या परेशान करने लगती है। जिसे प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम कहते हैं। इसमे पीरियड्स शुरू होने के कुछ दिन पहले से ही कमर के आसपास के हिस्से में दर्द होना शुरू हो जाता है।
🍚 आरोग्य संजीवनी 🍶
अगर आप दही में एक चुटकी नमक भी मिला लें तो एक मिनट में सारे बैक्टीरिया मर जायेंगे और उनकी लाश ही हमारे अंदर जाएगी जो कि किसी काम नहीं आएगी ।
अगर आप 100 किलो दही में एक चुटकी नामक डालेंगे तो दही के सारे बैक्टीरियल गुण खत्म हो जायेंगे….? क्योंकि नमक में जो कैमिकल्स है वह इन जीवाणुओं के दुश्मन है ।
आयुर्वेद में कहा गया है कि दही में ऐसी चीज़ मिलाएं, जो कि जीवाणुओं को बढाये ना कि उन्हें मारे या खत्म करे ।
दही को गुड़ के साथ खाईये, गुड़ डालते ही जीवाणुओं की संख्या मल्टीप्लाई हो जाती है और वह एक करोड़ से दो करोड़ हो जाते हैं । थोड़ी देर गुड मिला कर रख दीजिए। बूरा डालकर भी दही में जीवाणुओं की ग्रोथ कई गुना ज्यादा हो जाती है। मिश्री को अगर दही में डाला जाये तो ये सोने पर सुहागे का काम करेगी ।
भगवान कृष्ण भी दही को मिश्री के साथ ही खाते थे!
🌸 गुरु भक्ति योग 🕯️
ज्ञानी जन शोक क्यों नहीं करते क्योंकि नाम और रूप मय जो कुछ भी इस संसार में है वह परिवर्तन शील मरणधर्मा है इसलिए सम्बन्धी जन का शरीर भी अनित्य है ,ज्ञानीजन इसे जानते हैं इसलिए शोक नहीं करते। जो इस शरीर को छोड़ चुके हैं वे सब और जो अभी विद्यमान हैं वे सब जन्म और मृत्यु दोनों को प्राप्त होते रहे हैं।इसे कृष्ण ने आगे और स्पष्ट कर दिया है यह कह कर कि -,
जातस्य हि ध्रुवो मृत्यु, मृतस्य जन्म ध्रुवम
जिसका जन्म हुआ उसकी मृत्यु निश्चित और मरे हुए का पुनः जन्म भी निश्चित है। ज्ञानी जन इस अटल सत्य को गहराई से जानते हैं इसलिए वे शोक नहीं करते।
जबकि साधारण मनुष्य इस तथ्य को देखता तो है पर उंसके मन पर इच्छा वासना का आवरण बहुत गहरा होता है इस कारण यह भाव उंसके मन में टिक ही नहीं पाता।अधिक से अधिक उसे ‘श्मशान वैराग्य’ होता है जो क्षणिक होता है।
◆वस्तुतः जीवित के लिए और मृतक के लिए दोनों के प्रति शोक रहित होने के लिए व्यक्ति को दुख सुख में समत्व भी विकसित करना पड़ेगा ।और यही समत्व विकसित करना ही गीता का प्रधान लक्ष्य है।’समत्वं योग उच्चयते’ ऐसा कहा भी है।
◆इसके समानांतर योग के अलावा पात्रता के अनुसार भक्ति योग और ज्ञान योग में भी इसी समत्व भाव में स्थित होने की बात कार्यान्वयन के स्तर पर अंतर के साथ कही गई है।
◆कर्तापन का भाव त्यागना, समस्त कर्म ईश्वर को अर्पित करना , सभी प्राणियों में अपनी ही आत्मा देखना आदि ये सब ज्ञानभक्तिकर्मराजयोग के अंग के रूप में बताए गए हैं जिनका लक्ष्य एक ही है-आत्म ज्ञान।
············••●◆❁👣❁◆●••··············
⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।
पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं।

Related Articles

Back to top button