आज का पंचांग आज का पंचांग सोमवार, 05 फरवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 5 फरवरी 2024
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
🌤️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार माघ माह के कृष्ण पक्ष दशमी तिथि 05:25 PM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी : दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है। यह सौम्य अर्थात शांत तिथि हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र अनुराधा 07:54 AM तक उपरांत ज्येष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी : अनुराधा नक्षत्र का स्वामी शनि है, तथा राशि स्वामी मंगल का शत्रु है।
🔕 योग : ध्रुव योग 10:52 AM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 05:24 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 04:52 ए एम, फरवरी 06 तक बालव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:32:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:38:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:23 ए एम से 06:15 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:49 ए एम से 07:07 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:25 पी एम से 03:08 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:01 पी एम से 06:27 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:03 पी एम से 07:21 पी एम
💧 अमृत काल : 10:54 पी एम से 12:29 ए एम, फरवरी 06
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 06 से 01:01 ए एम, फरवरी 06
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:07 ए एम से 07:54 ए एम
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी मंदिर में सवा किलो चावल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/सर्वार्थसिद्धि योग/मंगल गोचर, आत्मिक महर्षि महेश योगी स्मृति दिवस, अभिनेता सुजीत कुमार स्मृति दिवस, भारतीय अभिनेता अभिषेक बच्चन जन्म दिवस, सिखों के गुरु हर राय सिंह जन्म दिवस, प्रसिद्ध कवि जानकी वल्लभ शास्त्री जयन्ती, भारतीय सूफ़ी संत इनायत ख़ान पुण्य तिथि, प्रसिद्ध भजन गायिका जुथिका रॉय स्मृति दिवस, संविधान दिवस – मेक्सिको, वन अग्नि सुरक्षा दिवस (सप्ताह)।
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗼 Vastu tips 🗽
नित्य सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को ताम्बें के बर्तन में जल में गुड़ और लाल चन्दन को डाल कर गायत्री मंत्र का सात बार जप करते हुए अर्ध्य दें। पुरूष अपने पिता और स्त्री अपने पति की सेवा करें।
भवन के पूर्वी भाग के ऊँचा होने से धन और स्वास्थ्य की हानि होती है अत: भवन के पूर्वी भाग को सदैव नीचा, साफ-सुथरा और खाली रखें इससे घर के लोग स्वस्थ रहेंगें, धन और वंश की वृद्धि होगी तथा समाज में मान-प्रतिष्ठा भी प्राप्त होगी ।
पूर्व दिशा में लाल, सुनहरे और पीले रंग का प्रयोग करें। पूर्वी बगीचे में लाल गुलाब रोपें। पूर्व दिशा को बल देने के लिए बंदरों को गुड़ और भुने हुए चने खिलाएं।
पूर्व दिशा के भवन में मुखिया को हर रविवार को आदित्य ह्र्दय का पाठ करन चाहिए। पूर्व दिशा के भवन में पूर्व में तुलसी का पौधा अवश्य ही लगाएं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
2 चम्मच प्याज़ के रस में शहद मिलाकर सुबह शाम चाटें , और उसके 1 घंटे तक कुछ भी सेवन ना करें एवं प्याज़ का रस गरम पानी में मिलाकर पीने से भी गला सुरीला होता है।
प्याज़ को हल्का भून लें फिर उसे कुचलकर फिटकरी को भून कर उसके ऊपर बुरककर चबा चबाकर खाएं, आवाज़ सुरीली होने लगेगी ।
ग्लिसरीन को गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह शाम गरारे किया करें, आपका गला आपको धोखा नहीं देगा।
सुरीली आवाज की चाह रखने वाले अनानास का सेवन किया करें या उसका रस पियें ।
🥂 आरोग्य संजीवनी 🍶
पेट की सूजन और भारीपन का घरेलू उपचार:
पुदीना चाय: पुदीना में प्राकृतिक एंटीस्पास्मोडिक गुण होते हैं जो पाचन मांसपेशियों को आराम देने और सूजन से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
अदरक की चाय: अदरक को सूजन-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है और यह पेट को शांत करने में मदद कर सकता है।
सौंफ के बीज: सौंफ के बीज गैस और सूजन से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
अगर कोई वर्तमान में हृदय का मरीज है तो उसे जानकारी लेने के बाद ही सही व्यायाम या योग करना चाहिए।
गर्म सेक: अपने पेट पर गर्म सेक लगाने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और असुविधा से राहत मिलती है।
📒 गुरु भक्ति योग 🕯️
अदिति कोई औरत नही थी। सूर्य कोई आग का गोला नही था। अदिति यानी अद्वेत। वर्तमान में जो हम स्वयं को ब्रह्मण्ड या परमात्मा से अलग मानते है उसे द्वेत कहते है। द्वेत यानी दो या फिर एक से अधिक। अद्वेत यानी कि एक। यह संसार, यह ब्रह्मण्ड, यह हम सब अद्वेत में ही है। सब एक ही है। अलग नही है। परन्तु बुद्धि के दृष्टिकोण के कारण हम सब अलग अलग प्रतीत होते दिखाई दे रहे है। अलग अलग दिख रहे है। जबकि है एक ही।
इस एकत्व को ही अद्वेत कहा गया है। जो अलग अलग दिख रहा है, परमात्मा से स्वयं को भिन्न समझा जा रहा है, वो द्वेत है।
अब कहा गया है कि सूर्य अदिति का पुत्र है। अदिति का अंश है। यहाँ अदिति का अर्थ है अद्वेत। सूर्य का अर्थ है सुरा। सूर्य को शास्त्र में आत्मा भी कहा गया है। अब देखो, कितनी सरल सी बात है। सीधी सी बात है। हम अद्वेत में है। अद्वेत ही परमात्मा है। सूर्य उसी अदिति रूपी अद्वेत का अंश है। यही (सूर्य) ही आत्मा है। इस प्रकार से कहा गया है कि सूर्य अदिति का पुत्र है।
सूर्य का एक अर्थ सुरा भी है। सुरा यानी कि श्वास।
योग विज्ञान में श्वास को चित्त निरोध में मुख्य माना है। श्वास की गति को मुख्य माना है। यदि श्वास की गति है पूरक / रेचक है। यदि गति नही है कुम्भक है।
इसी गति के आधार पर हमारा चित्त निरोध होता है। यदि जल्दी जल्दी गति से श्वास ली जाए तो मन अनियंत्रित रहता है और धीमे धीमे श्वास ले तो मन का निरोध होता है। मन के निरोध में ही अद्वेत बसा है। जब तक मन है , तब तक द्वेत है। जब मन खत्म, तो अद्वेत चालू। अद्वेत ही वो स्थिति है जहाँ हमे स्थित होना है। इसका माध्यम सूर्य है यानी श्वास है। तो इसका यही अर्थ है कि अदिति यानी अद्वेत का अंश सूर्य यानी सुरा अथवा आत्मा है।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

