
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 16 अप्रैल 2026_
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
*मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। *मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ *दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) *गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । *गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – बैशाख मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – गुरुवार बैशाख माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 08:11 PM तक उपरांत अमावस्या
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 01:58 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं। इसलिए इस पर गुरु (बृहस्पति) का भी प्रभाव होता है। इसके देवता अहिर्बुध्न्य (समुद्र के शुभकारी देवता) हैं।
⚜️ योग – इन्द्र योग 10:37 AM तक, उसके बाद वैधृति योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि 09:26 AM तक
✨ द्वितीय करण : शकुनि 08:11 PM तक, बाद चतुष्पद
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:46:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:26:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 04:26 ए एम से 05:10 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : प्रातः 04:48 ए एम से 05:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:55 ए एम से 12:47 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:46 पी एम से 07:08 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:47 पी एम से 07:54 पी एम
💧 अमृत काल : प्रातः 09:27 ए एम से 10:58 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 11:58 पी एम से 12:43 ए एम, अप्रैल 17
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : रात्रि 01:59 पी एम से 05:54 ए एम, अप्रैल 17
💥 भद्रावास मृत्यु : प्रातः 09:25 ए एम तक
🚓 यात्रा शकुन- गुरुवार को बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शमी पूजन करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ पञ्चक जारी/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ आडल योग/ विडाल योग/ ललिता पवार जन्म दिवस, नंदलाल बोस स्मृति दिवस, विश्व आवाज दिवस, भारतीय अभिनेत्री लारा दत्ता भूपति जन्म दिवस, राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस, “प्रार्थना और उपवास” दिवस, प्रसिद्ध सिख क्रांतिकारी रणधीर सिंह शहीद दिवस, भारतीय राजनयिक मदनजीत सिंह जन्म दिवस, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री राम नाइकी जन्म दिवस, तेज प्रताप यादव जन्म दिवस, राजनीतिज्ञ बनवारीलाल पुरोहित जन्म दिवस, (महावीर चक्र विजेता) ब्रिगेडियर भवानी सिंह स्मृति दिवस, रेल सप्ताह, फ़ायर सर्विस सप्ताह, भारतीय रेल परिवहन दिवस (1853) ✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।
🗽 Vastu tips 🛕
वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा स्थिरता और ताकत का प्रतीक है। माना जाता है कि इस दिशा में सोने से शरीर का संतुलन पृथ्वी के चुंबकीय प्रभाव के साथ बेहतर होता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और गहरी नींद आती है।
*पूर्व दिशा देती है मानसिक शांति पूर्व दिशा को सकारात्मकता और ज्ञान की दिशा माना जाता है। इस दिशा में सिर रखकर सोने से मन शांत रहता है और तनाव कम होता है। जो लोग अधिक सोचते हैं या मानसिक दबाव में रहते हैं, उनके लिए यह दिशा खासतौर पर फायदेमंद मानी जाती है। इससे फोकस और सोचने की क्षमता भी बेहतर होती है। *उत्तर दिशा से क्यों बचने की सलाह आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, उत्तर दिशा में सिर रखकर सोना उचित नहीं माना जाता। ऐसा कहा जाता है कि इससे शरीर और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके कारण नींद में रुकावट, बेचैनी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
*माथे के बीच तिल: माथे के बीच तिल होना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसी महिलाएं आत्मविश्वासी होती हैं और अपने परिवार के लिए सफलता के नए रास्ते खोलती हैं। *हथेली पर तिल: अगर किसी महिला की हथेली के बीचोंबीच तिल हो और मुट्ठी बंद करने पर वह छिप जाए, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसी महिलाओं के पास धन की कभी कमी नहीं होती और पैसा उनके पास टिकता है।
*तलवे पर तिल: पैर के तलवे पर तिल होना राजयोग का संकेत माना जाता है। ऐसी महिलाएं करियर में ऊंचाइयां हासिल करती हैं और उन्हें विदेश यात्रा के अवसर भी मिलते हैं। यह अपने परिवार के लिए तरक्की का रास्ता खोलती हैं। *ठुड्डी पर तिल: ठुड्डी पर तिल होना केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि आर्थिक मजबूती का भी संकेत देता है। ऐसी महिलाएं शांत स्वभाव की होती हैं और धन को संभालकर रखने में माहिर मानी जाती हैं। इनके घर में हमेशा बरकत बनी रहती है।
🍸 आरोग्य संजीवनी 🍻
*अंजीर का पानी पीने के फायदे- अंजीर का पानी आपकी गट हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। कब्ज से राहत पाने के लिए अंजीर के पानी का सेवन किया जा सकता है। क्या आप अपने एनर्जी लेवल्स को बूस्ट करना चाहते हैं? अगर हां, तो अंजीर का पानी थकान और कमजोरी को दूर कर आपको एनर्जेटिक फील करवाने में कारगर साबित हो सकता है। ब्लड प्रेशर पर काबू पाने के लिए और दिल की सेहत को मजबूत बनाए रखने के लिए अंजीर के पानी को डाइट प्लान में शामिल किया जा सकता है। *सेहत के लिए वरदान- जो लोग अपनी वेट लॉस जर्नी को आसान बनाना चाहते हैं, वो भी अंजीर के पानी का सेवन करना शुरू कर सकते हैं। क्या आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं? अगर हां, तो औषधीय गुणों से भरपूर अंजीर के पानी को अपने डेली डाइट प्लान का हिस्सा बना लीजिए। अंजीर के पानी में मौजूद तमाम पोषक तत्व बोन रिलेटेड डिजीज के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिंदू धर्म में राम नाम का बड़ा महत्व है। तीन बार इस नाम का जप भगवान के नाम का 1000 हजार जप करने के बराबर होता है। यहां जब किसी को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाता है तब लोग ‘राम नाम सत्य है’ कहते जाते हैं। जब कि कभी किसी खुशी के महौल में इस चार शब्दों का एक साथ उच्चारण नहीं किया जाता है। जिससे अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठते हैं कि ‘राम नाम सत्य है’ मरने पर क्यों कहा जाता है। ऐसे में आइए जानें आचार्य श्री गोपी राम से इन शब्दों को बोले जाने के पीछे के ये 5 कारण…
*जीव को मुक्ति : किसी की मृत्यु होने पर राम का नाम लिया जाता है। इसका अर्थ होता है कि अब इस जीव को मुक्ित मिल गई है। अब आत्मा इस संसार चक्र से आजाद हो गई है। उसका सांसरिक मोहमाया से मतलब नहीं रह जाता है। *शक्ति की अभिव्यक्ति: ‘राम नाम सत्य है’ का मतलब के अर्थ ‘सत्य भगवान राम का नाम है’। यहां राम ब्रम्हात्म यानी की सर्वोच्च शक्ति की अभिव्यक्ति करने के लिए निकलता है। इस दौरान सांस विहानी यानी कि मृत शरीर का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। आत्मा सब कुछ छोड़कर भगवान के पास चली जाती है। यही परम सत्य है।
*सब कुछ एक भ्रम: इस मंत्र को जपने से यह अहसास होता है कि इस दुनिया से अब वह व्यक्ति रवाना हो गया है। अब उसके पृथ्वी के सारे रिश्ते नाते समाप्त हो चुके हैं। जिससे साफ है कि भगवान को छोड़कर सब कुछ एक भ्रम है। *एक बीज अक्षर: हिंदू शास्त्रों के अनुसार राम नाम सत्य है एक बीज अक्षर है। इसको जपने से बुरे कर्मों से मुक्ित मिल जाती है। यह परम सत्य है कि आत्मा अपने कर्मो के अनुसार एक दूसरे संसार में उत्पन्न होती है।
*परिजनों को शांति: कुछ लोगों का मानना है कि इसको जपने से मृतक के परिजनों को मानसिक शांति मिलती है। मृत्यु के बाद परिजन दुख और वेदना में डूबे होते हैं। जिससे इस दौरान राम नाम सत्य है से उन्हें अदंर से अहसास होता है कि यह संसार व्यर्थ है। ◄┉┉┉┉┉┉༺✦ᱪ✦༻┉┉┉┉┉┉► ⚜️ *चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।


