ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग सोमवार, 26 फरवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 26 फरवरी 2024

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसन्त ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष द्वितीया द्वितीया तिथि 11:16 PM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है । द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 04:30 AM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। उत्तराफाल्गुनी के देवता अर्यमा होते हैं।
🔕 योग – धृति योग 03:26 PM तक, उसके बाद शूल योग
प्रथम करण : तैतिल – 09:55 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 11:15 पी एम तक वणिज
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:18:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:42:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:10 ए एम से 06:00 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:35 ए एम से 06:50 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:15 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:16 पी एम से 06:41 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:18 पी एम से 07:34 पी एम
💧 अमृत काल : 08:23 पी एम से 10:11 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 27 से 12:59 ए एम, फरवरी 27
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-मंदिर में चांदी की कोई वस्तु चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वधूप्रवेश/द्विरागमन मुहूर्त, महान स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर शहीद दिवस, राष्ट्रीय पिस्ता दिवस, राष्ट्रीय परी कथा सुनाने का दिन, राष्ट्रीय व्यक्तिगत शेफ दिवस, राष्ट्रीय कार्पे डायम दिवस, लेवी स्ट्रॉस दिवस
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips 🗺️
वास्तु शास्त्र के सामान्य नियमों की तरह ही फ्लैट में भी दक्षिण-पूर्व या दक्षिण दिशा मे किचन होना सबसे अच्छा माना गया है। मजबूरी में पूर्व या पश्चिम दिशा की किचन कुछ उपायों के साथ ग्राह्य है, लेकिन दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा की किचन किसी भी दशा में ग्राह्य नहीं है। दक्षिण-पश्चिम दिशा की किचन दाम्पत्य रिश्ते को नुकसान पहुंचाती है।
उत्तर-पश्चिम दिशा में बनी हुई रसोई कभी पूरी नहीं पड़ती। उत्तर दिशा में बनाए गए भोजन को ग्रहण करने से मन में बहुत तरह के भय बैठ जाते हैं। पुत्र पिता की अवज्ञा करता है, दोनों के रिश्ते खराब होने की नौबत आ जाती है। उत्तर-पूर्व दिशा में बनाई गई रसोई से अवसर नष्ट हो जाते हैं, बाधाएं आती है, घर में भावना और प्रेम का बहाव नष्ट हो जाता है। अगर आप पहले से फ्लैट ले चुके हैं और आपका किचन इन दिशाओं में है तो उसके लिए आपको अलग से विशेष उपाय करने चाहिए।
वास्‍तु के मुताबिक, किचन में लाल और पीले रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आपका किचन साउथ या फिर साउथ-ईस्ट दिशा में है तो आपको काले या नीले रंग का स्‍लैब न लगवाएं। आप ग्रेनाइट की स्‍लैब या फिर मार्बल का स्‍लैब लगा सकते हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आयुर्वेद के अनुसार, कलौंजी के बीज वात और कफ दोष को शांत करते है और पित्त बढ़ाते हैं। वे स्वाद, पाचन शक्ति और बुद्धि में सुधार करते है। सूजन, उल्टी, दस्त, सांस की बदबू, दर्द और बुखार से राहत देते है।
फफोले, नाक के फोड़े, एक्जिमा और जोड़ों की सूजन, दर्द में इन्हें बाह्य उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है।
इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट, एंटीडायबिटिक, एंटीहाइपरटेंसिव, कोलेस्ट्रॉल कम करने, रोगाणुरोधी, स्पैस्मोलाईटिक, ब्रोन्कोडायलेटर, हेपाटो-सुरक्षात्मक, गुर्दे की सुरक्षात्मक और गैस्ट्रो-सुरक्षात्मक गतिविधियां है।
वे मासिक धर्म को प्रेरित करने के लिए जाने जाते है और इसिलिये मासिक धर्म की अनियमितता में उपयोग किया जाता है जैसे कि पीसीओएस में।
पीसीओएस में 2-3 महीने तक रोजाना कलौंजी के बीज का आधा चम्मच गुनगुने पानी के साथ सेवन करना चाहिए। यह इन रोगियों में इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में भी मदद करता है।
उनके गर्म स्वभाव के कारण, गर्भावस्था में कलोंजी का उपयोग ना करे।
प्रसव के बाद के संक्रमण से लड़ने और आंतरिक प्रणालियों को मजबूत करने के लिए कलौंजी के बीजों का काढ़ा माँ को दिया जाता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
वजन घटाने में एक मध्यम आकार के पपीते में 120 कैलोरी होती है। अगर आप वजन घटाने की बात सोच रहे हैं तो अपनी डाइट में पपीते को जरूर शामिल करें।
रोग प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में पपीता आपके शरीर के लिए आवश्यक विटामिन सी की मांग को पूरा करता है। ऐसे में अगर आप हर रोज कुछ मात्रा में पपीता खाते हैं तो आपके बीमार होने की आशंका कम हो जाएगी।
आंखों की रोशनी बढ़ाने में पपीते में विटामिन सी तो भरपूर होता है और विटामिन ए भी पर्याप्त मात्रा में होता है।विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ ही बढ़ती उम्र से जुड़ी कई समस्यायों को दुर करती है।
पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में
पपीते के सेवन से पाचन तंत्र भी सक्रिय रहता है। पपीते में कई पाचक एंजाइम्स होते हैं।साथ ही इसमें कई डाइट्री फाइबर्स भी होते हैं जिसकी वजह से पाचन क्रिया सही रहती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कौन सा जानवर है, जिसे अपनी मौत के समय का पहले ही पता चल जाता है?
माना जाता है कि बिच्छू एक ऐसा जानवर है जिसे अपनी मौत का समय पहले ही पता चल जाता है। जब बिच्छू मरने वाला होता है, तो वह अपने आप को डंक मार लेता है। यह आत्महत्या नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। बिच्छू के ज़हर में एक रसायन होता है जो उसके शरीर को तोड़ना शुरू कर देता है। यह प्रक्रिया धीमी और दर्दनाक होती है, और बिच्छू अंततः अपने ही ज़हर से मर जाता है।
हालांकि, यह दावा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है कि बिच्छू को अपनी मौत का समय पहले ही पता चल जाता है। यह संभव है कि बिच्छू अपने शरीर में होने वाले बदलावों को महसूस करता है और डंक मारकर खुद को मारने की कोशिश करता है।
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सभी बिच्छू ऐसा नहीं करते हैं। कुछ बिच्छू बिना किसी पूर्व चेतावनी के मर जाते हैं।
यहां कुछ अन्य जानवर हैं जिनके बारे में माना जाता है कि उन्हें अपनी मौत का समय पहले ही पता चल जाता है:
हाथी: जब हाथी मरने वाला होता है, तो वह अपने परिवार और दोस्तों को अलविदा कहने के लिए एक विशेष स्थान पर जाता है।
कुत्ते: कुछ कुत्ते अपने मालिक की मृत्यु का समय पहले ही पता लगा लेते हैं और उनके अंतिम क्षणों में उनके साथ रहते हैं।
डॉल्फ़िन: जब डॉल्फ़िन मरने वाली होती है, तो वे एक दूसरे के करीब आ जाती हैं और एक साथ तैरती हैं।
यह निश्चित रूप से कहना मुश्किल है कि क्या ये जानवर वास्तव में अपनी मौत का समय जानते हैं या नहीं।
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी जानवर अलग-अलग तरीके से व्यवहार करते हैं, और यह कहना मुश्किल है कि उनके व्यवहार का क्या मतलब है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।

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