ज्योतिष

आज का पंचांग बुधवार, 30 नवम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 30 नवम्बर 2022

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।
🪙 30 नवम्बर 2022 दिन बुधवार को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज की सप्तमी तिथि को मित्र सप्तमी या सूर्य सप्तमी कहा जाता है। आज भगवान सूर्य को सूर्यार्घ्य देकर विधिवत पूजन करना चाहिये। साथ ही सूर्य पूजन के उपरान्त हवन भी करना चाहिये। आप सभी सनातनियों को सूर्य सप्तमी की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : सप्तमी – 08:58 ए एम तक अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी: इस तिथि के स्वामी सूर्य हैं. सूर्य आरोग्यकारक माने गये हैं. साथ ही जगत के रक्षक भी. इसलिए अच्छे स्वास्थ्य एवं आरोग्यता हेतु विशेषकर जिसे आंखों की समस्या हो उसके लिए इस दिन चाक्षुषी विद्या का पाठ करना माना गया है।
💫 नक्षत्र : धनिष्ठा – 07:11 ए एम तक शतभिषा – 06:12 ए एम, दिसम्बर 01 तक पूर्व भाद्रपद
🪐 नक्षत्र स्वामी: धनिष्ठानक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। यह ढपली की तरह दिखायी देता है। इस नक्षत्र वसुस और लिंग स्री है।
📣 योग : व्याघात – 12:02 पी एम तक हर्षण
प्रथम करण : वणिज – 08:58 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 08:06 पी एम तक बव
🔥 शुभ गुलिक काल : गुलिक काल 10:50:56 से 12:09:31 तक
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक राहुकाल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:43:52
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:17:26
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:07 ए एम से 06:01 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:34 ए एम से 06:55 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:13 पी एम से 05:37 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:45 पी एम
💧 अमृत काल : 11:18 पी एम से 12:50 ए एम, दिसम्बर 01
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:43 पी एम से 12:37 ए एम, दिसम्बर 01
❄️ रवि योग : 06:12 ए एम, दिसम्बर 01 से 06:56 ए एम, दिसम्बर 01
☄️ व्याघात योग – आज दोपहर 12 बजकर 2 मिनट तक
☀️ धनिष्ठा नक्षत्र – आज सुबह 7 बजकर 11 मिनट तक
🚗 यात्रा शकुन-हरे फल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-पीपल के वृक्ष के नीचे मिष्ठान व जल रखकर दीप प्रज्ज्वलित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – नंदा सप्तमी, श्री नरसी मेहता जयंती, वी. के. नायर – भूतपूर्व भारतीय सैन्य अधिकारी स्मृति दिवस, इन्द्र कुमार गुजराल स्मृति दिवस, प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस जयन्ती, विश्व प्रसिद्ध पॉप गायक ‘जार्ज हैरीसन’ का निधन हुआ, जानकी रामचंद्रन महिला राजनीतिज्ञ जन्म दिवस, बुधाष्टमी, पंचक जारी
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विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🗣️ श्लोक : १.१.६(1.1.6) सूक्त
यद॒ङ्ग दा॒शुषे॒ त्वमग्ने॑ भ॒द्रं क॑रि॒ष्यसि॑ । तवेत्तत्स॒त्यम॑ङ्गिरः ॥
हे अग्नि! तुम यज्ञ में हवि देने वाले यजमान का जो कल्याण करते हो, वह वास्तव में तुम्हारी ही प्रसन्नता का साधन बनता है
🛕 Vastu tips 🏚️
हर पूर्णिमा के दिन सोने के पानी (कोई भी गोल्ड ज्वेलरी को पानी में डालकर निकाल लें और इस पानी का इस्तेमाल करें) से स्वस्तिक बनाएं.
बेडरूम घर का सबसे ख़ास हिस्सा होता है. यहां रखी हर चीज़ का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है, जैसे- फोटो, फ्लावर पॉट, पलंग आदि. यहां पति-पत्नी अपना मुस्कुराता हुआ साथ का फोटो लगा सकते हैं, पर फोटो पैरों की ओर न लगाएं.
कमरे में रोमांटिक पोज़वाले युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं.
रोमांटिक पोज़वाले सेक्सी क्रिस्टल जोड़े व फोटो से बेडरूम को सजाएं.
हर अमावस्या को काले तिल उत्तर/पश्‍चिम कोने में रखें.
रोमांस व प्राइवेसी बनी रहे, इसके लिए ध्यान रहे कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले
चांदी की कटोरी में कपूर रखें
आपसी प्यार और बेडरूम की ख़ूबसूरती के लिए मनी प्लांट्स भी लगाए जाते हैं. ये शुक्र के कारक हैं. मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं
बेडरूम में हल्की गुलाबी रंग की रोशनी होने से कपल्स में प्रेम बना रहता है
शिव रूद्राक्ष गुलाब जल में भिगोकर रखें
वास्तु के अनुसार हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोएं, ताकि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार आप दीर्घायु और गहरी नींद प्राप्त कर सकें आरामदायक व भरपूर नींद से दांपत्य जीवन अधिक सुखद बनता है
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सुबह से समय ठंडे पानी से धोएं चेहरा
जब भी आप सुबह उठती हैं तो उसके तुरंत बाद आप अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लीजिए। ऐसा करने से आपकी स्किन के पोर्स क्लोज हो जाते हैं। इसके अलावा ठंडा पानी रिंकल से छुटकारा दिलाने के लिए भी जाना जाता है, जो त्वचा की बढ़ती उम्र को भी धीमा करने का काम करता है। वहीं, जो लोग ऑयली स्किन से परेशान रहते हैं, उनके लिए ठंडे पानी से चेहरे को धोना किसी दवा से कम नहीं है, क्योंकि नियमित रूप से ठंडे पानी से चेहरे को धोने से अतिरिक्त ऑयल क्लियर होने में मदद मिलती है।
चेहरे को टोन और मॉइश्चराइज करना भी है जरूरी
सुबह के समय चेहरे को साफ करने के बाद टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग स्टेप को भी पूरा करें। इसके लिए आप टोनर के रूप में गुलाब जल का इस्तेमाल कर सकती हैं, जो आपके खुले हुए त्वचा के छिद्रों को बंद करके स्किन को रिफ्रेश करने में मददगार होता है। वहीं टोनर अप्लाई करने के बाद हमेशा अपनी त्वचा पर स्किन टाइप के हिसाब से मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।
आरोग्य संजीवनी 🫖
पाचन को करती है दुरुस्त सौंफ-जीरा की चाय पाचन क्रिया को दुरुस्त करती है। खाने के बाद सौंफ का सेवन किया जाता है, क्योंकि सौंफ को अच्छा पाचक माना जाता है। अगर आपको अपच या गैस जैसी परेशानी हो रही है तो सौंफ और जीरा की इस चाय को अपने रुटीन का हिस्सा बना लें, पाचन से जुड़ी तमाम परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा।
ब्लड सर्कुलेशन करे बेहतर
सौंफ और जीरा बॉडी को डिटॉक्सीफाई करते हैं। साथ ही चाय में मौजूद पोषक तत्व ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद करते हैं। ये शरीर से यूरिक एसिड को बाहर कर देते हैं। सौंफ और जीरा नए सेल्स के प्रोडक्शन में भी मदद करते हैं।
ऐसे बनाएं सौंफ और जीरा की चाय सौंफ और जीरा की चाय बनाने के लिए आधा चम्मच सौंफ और आधा चम्मच जीरा लेकर एक गिलास पानी में रातभर के लिए भिगो दें। सुबह इस पानी को उबाल लें और छानकर पिएं
📖 गुरु भक्ति योग 📖
आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी शास्‍त्र नीति में कहते हैं कि जीवन में उतार-चढ़ाव और चुनौतियां आती हैं. लेकिन व्‍यक्ति को कुछ खास स्थितियों में धैर्य से काम लेना चाहिए और उनका जिक्र किसी से नहीं करना चाहिए. अपने इन दुखों या समस्‍याओं का हर किसी के सामने जिक्र करना बड़ी मुश्किल में डाल सकता है और आपको ज्‍यादा दुखी कर सकता है।
हमारी नीति कहती है कि जब व्‍यापार में बड़ा नुकसान हो जाए तो इसका जिक्र हर किसी के सामने न करें. बल्कि बेहतर होगा कि किसी के सामने इस नुकसान की बात न करें. वरना लोग आपके साथ व्‍यापार करने में कतराने लगेंगे, इससे आपके हालात और खराब हो सकते हैं. साथ ही आप अपना सम्‍मान भी खो देंगे।
पति या पत्‍नी में अवगुण होना या रोज-रोज झगड़े होना अच्‍छी बात नहीं है. इससे पूरे परिवार पर बुरा असर पड़ता है. बेहतर होगा कि आप रिश्‍ते सुधारने के लिए कोशिश करें. साथ ही हमेशा ध्‍यान रखें कि पति-पत्‍नी के बीच के झगड़े की बात किसी को न बताएं. ना ही एक-दूसरे की बुराई बताएं. वरना झगड़ा भले ही खत्‍म हो जाए लेकिन लोगों की नजर में आपकी छवि हमेशा के लिए खराब हो जाएगी. साथ ही आपका दांपत्‍य जीवन दूसरों के लिए मजाक बन जाएगा।
यदि किसी कारणवश आपका अपमान हो जाए तो ये बात कभी किसी को नहीं बताएं. अपने अपमान की बात अपने ही अंदर दबा लेना ठीक है, इसे हर किसी को बताना उनकी नजरों में भी अपने सम्‍मान को कम करना है।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।

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