आज का पंचांग सोमवार, 07 नवम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 07 नवम्बर 2022
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : चतुर्दशी – 04:15 पी एम तक पूर्णिमा
✏️ तिथि स्वामी: चतुर्थी: इस तिथि के स्वामी श्री गणेश जी हैं. जिन्हें प्रथम पूज्य भी कहा जाता है।
💫 नक्षत्र : अश्विनी – 12:37 ए एम, नवम्बर 08 तक भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी: अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु ग्रह है। – इस नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार है।
🔔 योग : सिद्धि – 10:37 पी एम तक व्यतीपात
⚡ प्रथम करण : वणिज – 04:15 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 04:20 ए एम, नवम्बर 08 तक बव
🤖 राहुकाल : 07:59 ए एम से 09:21 ए एम राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🔥 गुलिक काल : 01:26 पी एम से 02:48 पी एम
⚜️ दिशाशूल: सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करने पर दिशाशूल लगता है। दिशाशूल का अर्थ है संबंधित दिशा में बाधा और कष्ट प्राप्त होना। इसलिए सोमवार एवं शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:31:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:29:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:53 ए एम से 05:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:19 ए एम से 06:37 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:37 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:45 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:32 पी एम से 06:50 पी एम
💧 अमृत काल : 05:15 पी एम से 06:54 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 08
❄️ रवि योग : 06:37 ए एम से 12:37 ए एम, नवम्बर 08
🕉️ सिद्धि योग – आज रात 10 बजकर 37 मिनट तक
☀️ अश्विनी नक्षत्र – आज रात 12 बजकर 37 मिनट तक
🌏 स्वर्ग लोक की भद्रा – आज शाम 4 बजकर 15 मिनट से अगली भोर 4 बजकर 23 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-मंदिर में मिश्री अर्पण करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – बैकुंठ चतुर्दशी (मतांतर), कार्तिक चौमासी चौदस – (जैन कैलेण्डर पर आधारित), वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रामन जयन्ती, सी. सुब्रह्मण्यम (तारा चेरियन) पद्म भूषण से सम्मानित स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस, शिशु सुरक्षा दिवस, महान अक्टूबर क्रान्ति दिवस, कैंसर जागरुकता दिवस, त्रिपुरारी पूर्णिमा, पूर्णिमा प्रारंभ शाम 04 : 15, मूल समाप्त
✍🏽 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🌹 Vastu Tips 🌸
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे खिड़की के सामने अगर कोई डिश, एंटीना या अन्य कोई चीज लगी हो तो क्या होता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की खिड़की के सामने कभी भी किसी प्रकार की डिश या एंटीना नहीं लगा होना चाहिए। क्योंकि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस तरह की तरंगे स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा भी कहा गया है की डिश एंटीना के द्वारा कई ऐसी तरंगे घर में प्रवेश कर जाती हैं जिनका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
बच्चों की पढाई पर पड़ता है असर घर की खिड़की के सामने डिश या एंटीना लगे होने से इसका नकारात्मक और सीधा असर आपके बच्चे पर पड़ता है, जिसके चलते उसकी पढ़ाई व स्वास्थ्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है इसलिए घर की खिड़की के सामने इस तरह की चीजों को लगाने से अवॉयड करना चाहिए।
दरवाजे-खिड़की टूटे न हों इसके अलावा घर की खिड़कियां हो या दरवाजे, कभी भी टूटे-फूटे नहीं होने चाहिए अन्यथा घर के सदस्यों के जीवन में आर्थिक संकटों बने रहते हैं और सब परेशान रहते हैं अगर घर में ऐसी कोई टूटी-फूटी या बिगड़ी हुई खिड़की या दरवाजा नहीं होना चाहिए। अगर है भी तो उसे तुरंत ठीक करवा ले।
छत पर लगाएं एंटीना वास्तु शास्त्र में ऐसी तरंग वाली चीजों यानी डिश के एंटीना को घर के पीछे साइड में लगाने के लिए बताया गया है। या फिर उन्हें छत पर लगाया जा सकता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हिंदू धर्म में हर पूजा पाठ धर्म-कर्म के कार्यों में पुरोहित द्वारा अपने यजमान की कलाई में लाल धागा बांधा जाता हैं। हिंदू धर्म में हर पूजा पाठ धर्म-कर्म के कार्यों में पुरोहित द्वारा अपने यजमान की कलाई में लाल धागा बांधा जाता है। वहीं अगर हम किसी मंदिर में दर्शन करने जाते हैं तो वहां भी भगवान को कलावा चढ़ा कर उसे धारण करने की परंपरा बताई गई है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में कुछ राशि के लोगों को लाल रंग का कलावा बांधने पर नकारात्मक प्रभाव बताया गया है।
लाल धागा बांधने के फायदे हम सबसे पहले यह जान लें कि कलाई में लाल धागा या कहे कलावा बांधने से क्या फायदे मिलते हैं। इसके संबंध में ज्योतिष शास्त्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों ही मत हम बताने जा रहे हैं।
ज्योतिष आचार्य श्री गोपी राम ने शास्त्र में बताया गया है कि हाथ की कलाई में लाल धागा बांधने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। साथ ही बजरंगबली की कृपा भी प्राप्त होती है। कहा गया है कि कुंडली में मौजूद मंगल ग्रह मजबूत होता है। लाल धागा बांधने से शरीर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है।अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विचार करें तो वैज्ञानिक भी बताते हैं लाल धागा हाथ में बांधने से ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी बीमारी का खतरा कम होता है। साथ ही बताया गया है कि शरीर की रक्त वाहिनियो में रक्त का सुचार रूप से संचार होता रहता है।
किसे नहीं बांधना चाहिए लाल धागा ज्योतिष शास्त्र के बताए अनुसार शनिदेव को लाल धागा पसंद नहीं है। कुंभ और मीन राशि के स्वामी भगवान शनिदेव है। किसलिए ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों राशि के लोगों को हाथ में कलावा या लाल रंग का धागा धारण नहीं करना चाहिए। अन्यथा शनिदेव कि नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए बताया गया है कि इन्हें नीली रंग का धागा हाथ में बांधना चाहिए। ऐसा करने से ग्रह दोष दूर होते हैं तथा इस राशि के स्वामी भगवान शनि देव प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा बताया गया है कि वृश्चिक, सिंह और मेष राशि वालों को लाल धागा बांधना चाहिए। लाल धागा बांधने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
गुनगुना पानी पीने के फायदे जिद्दी फैट से छुटकारा पाने के लिए गुनगुना पानी जांचा-परखा नुस्खा बताया जाता है। कई रिसर्च में बताया गया है कि अधिक पानी पीने से व्यक्ति को अपना वजन कम करने में मदद मिल सकती है। आज के दौर में ज्यादातर लोग तेल-मसाले और मैदे वाला भोजन इनटेक करते हैं। ऐसे में उनके शरीर में टॉक्सिक पदार्थ जमने लगते है। हम पर्याप्त पानी पीकर जहरीले पदार्थों को हमारी बॉडी से आसानी से बाहर निकाल सकते हैं।
मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है गर्म पानी
सुबह खाली पेट पानी पीने से हमारे शरीर पर काफी हद तक असर पड़ता है, लेकिन बताया जाता है कि जो लोग पूरे दिन बीच-बीच में गर्म पानी पीते हैं, उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर बनता है। कहते हैं कि आपकी बॉडी का मेटाबॉलिज्म जितना अच्छा होगा, आप उतने ही ऊर्जावान और एक्टिव रहेंगे। इसके साथ ही गर्म पानी पीने से भूख भी कम लगती है और यही कारण है कि गर्म पानी पीने वाले लोगों का वजन तेजी से नहीं बढ़ता है।
इस ड्रिंक से मिलेगा डबल फायदा जो लोग सुबह खाली पेट केवल गर्म पानी नहीं पीना चाहते हैं, वे मॉर्निंग टाइम में हर्बल टी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये वजन घटाने में काफी असरदार नुस्खा माना जाता है और हमारी बॉडी को भी डिटॉक्स करने का काम करता है। इसके साथ ही एक्सरसाइज या योगा को भी अपने डेली रूटीन में शामिल करने से जल्दी वजन घटाने में मदद मिलती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
पूजा पाठ, धार्मिक गतिविधियों, शुभ कार्यों, योगाभ्यास और विभिन्न मंत्र के उच्चारण में अक्सर ॐ का प्रयोग भी किया जाता है। दरअसल ॐ का ज्ञान ही सबसे बड़ा ज्ञान है। सभी ईश्वर की उपासना का मंत्र ॐ से ही प्रारंभ होते हैं। ॐ तीन अक्षरों से बना हुआ है; अ, उ और म। अ से आदि कर्ता ब्रह्म का बोध होता है, उ से विष्णु भगवान का बोध होता है जबकि म से महेश का बोध होता है। यानी ॐ सम्पूर्ण जगत का नेतृत्व करता है।
ॐ के उच्चारण का शारीरिक लाभ ॐ बोलने से गले में कंपन उत्पन्न होता है, इससे थायराइड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। घबराहट को दूर करने में भी ॐ के उच्चारण सहयोग करते हैं। शरीर के सभी आंतरिक अंग ॐ के उच्चारण से विषमुक्त होने लगते हैं। इसके कारण तनाव भी दूर होता है।
पूरा शरीर स्वच्छ और स्वस्थ होता है ॐ में प्रयुक्त होने वाले अक्षर अ बोलने से शरीर के निचले हिस्से यानी पेट के आसपास कंपन होता है। उ बोलने से शरीर के मध्य हिस्से यानी छाती के आसपास कंपन होता है। म बोलने से शरीर के ऊपरी हिस्से यानी मस्तिष्क में कंपन होता है। कुल मिलाकर ॐ के उच्चारण से सम्पूर्ण शरीर कंपित होता है। इससे हमें शारीरिक, मानसिक और आत्मिक लाभ पहुंचता है।
ॐ में छिपा है जीवन का सार ॐ में प्रयुक्त होने वाले अक्षरों अ, उ और म का आशय कुछ विद्वानों ने अलग लगाए हैं; अ से आशय उत्पन्न होना, उ से आशय उठना और म से आशय मौन हो जाना है। इस प्रकार ॐ में जीवन का सार छिपा हुआ है।
तनाव और अनिद्रा से मिलती है मुक्ति ॐ के उच्चारण से एकाग्रता बढ़ती है। रचनात्मक कार्यों में लगे हुए व्यक्ति के लिए ॐ का जाप करना रामबाण साबित होता है। इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है जबकि तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं से मुक्ति भी मिलती है। हमेशा सकारात्मक बने रहने के लिए ॐ का उच्चारण कारगर साबित होता है।
बीमारियां होती हैं दूर ॐ की ध्वनि से गलत मानसिक विचार दूर होते हैं। वेदों के निष्कर्ष, ऋषि मुनियों की तपस्या और विद्वानों के ज्ञान ॐ में समाहित हैं। इसके उच्चारण से मन में एकाग्रता और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। ॐ के जाप से कार्य क्षमता और कार्य दक्षता दोनों सकारात्मक ढंग से प्रभावित होते हैं।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

