ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 11 जून 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *_आज का पंचाग_* 🧾
         गुरुवार  11 जून 2026
*_मंगल श्री विष्णु मंत्र :-_*
*_मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।_*
*_मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥_*
☄️  *_दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
*_गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
*_गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
*_गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
*_इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – ज्यैष्ठ मास_*
🌒 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – गुरुवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 10:36 PM तक उपरांत द्वादशी_*
📝 *_तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र रेवती 08:16 AM तक उपरांत अश्विनी_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – रेवती नक्षत्र का स्वामी ग्रह (ग्रह देवता): बुध देव हैं, इस नक्षत्र के मुख्य देवता (अधिष्ठाता देवता) पूषा हैं।_*
⚜️ *_योग – शोभन योग 12:59 AM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग_*
⚡ *_प्रथम करण : बव 11:52 AM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : बालव 10:36 PM तक, बाद कौलव_*
🔥 *_गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक_*
⚜️ *_दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:21:46_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:19:09_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:15 ए एम से 04:55 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:35 ए एम से 05:36 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:07 पी एम से 01:02 पी एम_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:54 पी एम से 03:50 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:32 पी एम से 07:52 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : संध्या काल 07:33 पी एम से 08:33 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : संध्या काल 06:48 पी एम से 08:33 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 12:14 ए एम, जून 12 से 12:55 ए एम, जून 12_*
⭐ *_सर्वार्थ सिद्धि योग : प्रातः काल 03:36 ए एम, जून 12 से 05:36 ए एम, जून 12_*
🚓 *_यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-शमी पूजन करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 26वाँ दिन, परम एकादशी व्रत वैष्णव (सर्वे स्मार्त)/ पञ्चक जारी/ गण्ड मूल/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ विडाल योग/  पञ्चक  समाप्ति सुबह 08.00 बजे/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस, राष्ट्रीय जीवन सौंदर्य दिवस, अमर क्रांतिकारी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जयन्ती, प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पुण्य तिथि, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जन्म दिवस, भारत के उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला स्मृति दिवस, महिला क्रांतिकारी  लीला नाग स्मृति दिवस, केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट स्मृति दिवस, आचार्य श्रीराम शर्मा की पुण्य तिथि, सेतुबन्ध रामेश्वर प्रतिष्ठा दिवस, स्वतंत्रता सेनानी पांडुरंग सदाशिव साने स्मृति दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।           
🏘️ *_Vastu Tips_* 🏚️
*_वास्तु शास्त्र आचार्य श्री गोपी राम से घर से सूखे हुए फूलों को हटाने के बारे में बात करेंगे। घर में रखे सूखे फूल शव की तरह होते हैं। जैसे घर में शव नहीं रखा जाता है, वैसे ही सूखे फूल भी घर में नहीं रखने चाहिए। सुप्रसिद्ध तंत्र ग्रंथ ‘मंत्र महार्णव’ में कहा गया है कि भगवान को चढ़ाए हुए सभी पुष्प तत्काल निर्मालय हो जाते हैं।उसी में आगे बताया गया है कि निर्मालयों को तत्काल हटा देना चाहिए, वरना उसके भोग के लिए चण्डाली, चण्डांशु और विश्वकसेन जैसी निगेटिव शक्तियों के आने की बात कही गयी है। आजकल सुखाए हुए पोट पोरी के फूलों को रखने का फैशन है, लेकिन आपको बता दूं कि आप नकली फूल लगा लें वो बेहतर है, परन्तु पोट पोरी के फूल विष के समान है। अतः सदा ताजे फूलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।          
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
मूंगा का पत्ता विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ये तत्व शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, “मूंगा का पत्ता का किस बीमारियों में काम आता हैं?” इस सवाल का जवाब देते हुए कहा जा सकता है कि यह कई तरह की बीमारियों में लाभकारी हो सकता है।
*_रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: मूंगा का पत्ता इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।
*_पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है: “मूंगा का पत्ता का किस बीमारियों में काम आता हैं?” इस सवाल का एक जवाब यह भी है कि यह पाचन संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, एसिडिटी और अपच में लाभकारी होता है।
*_रक्तचाप को नियंत्रित करता है: मूंगा का पत्ता रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यह हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।
*_शरीर को डिटॉक्स करता है: “मूंगा का पत्ता का किस बीमारियों में काम आता हैं?” यह सवाल पूछने वाले को यह भी बताना चाहिए कि यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।
*_त्वचा के लिए फायदेमंद: मूंगा का पत्ता त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। यह त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।      
🍷 *आरोग्य संजीवनी* 🍶
*अजवाइन के प्रमुख फायदे:*
*_पाचन में सुधार: अजवाइन पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करके पाचन में सुधार करती है। यह गैस, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है।
*_दर्द निवारक: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, सिरदर्द और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याओं में राहत देते हैं।
*_सर्दी-खांसी: अजवाइन का सेवन सर्दी-खांसी, जुकाम और ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी होता है।
*_पाचन तंत्र को साफ करता है: यह पाचन तंत्र को साफ करके विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है।
*_इम्यूनिटी बढ़ाता है: अजवाइन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं और शरीर को संक्रमण से बचाते हैं।         
🌷 *_गुरु भक्ति योग_* 🌸
     एक बार की बात है, देवताओं के राजा इंद्र ने किसानों से किसी कारण से नाराज होकर बारह वर्षों तक बारिश न करने का निर्णय लेकर किसानों से कहा -“अब आप लोग बारह वर्षों तक फसल नही ले सकेंगे।”
         *_सारे किसानों ने चिंतातुर होकर एक साथ इंद्रदेव से वर्षा करवाने हेतु प्रार्थना की। इंद्र ने कहा -” यदि भगवान शंकर अपना डमरू बजा देंगे तो वर्षा हो सकती है।” इंद्र ने किसानों को ये उपाय तो बताया लेकिन साथ में गुप्तवार्ता कर भगवान शिव से ये आग्रह कर दिया कि आप किसानों से सहमत न होना।
       *_जब किसान भगवान शंकर के पास पहुँचे तो भगवान ने उन्हें कहा -” डमरू तो बारह वर्ष बाद ही बजेगा।”
       *_किसानों ने निराश होकर बारह वर्षों तक खेती न करने का निर्णय लिया।
         *_उनमें से एक किसान था जिसने खेत में अपना काम करना नहीं छोड़ा। वो नियमति रूप से खेत जोतना, निंदाई, गुड़ाई, बीज बोने का काम कर रहा था। ये माजरा देख कर गाँव के किसान उसका मज़ाक उड़ाने लगे। कुछ वर्षों बाद गाँव वाले इस परिश्रमी किसान से पूछने लगे -” जब तुम्हे पता है कि बारह वर्षों तक वर्षा नही होने वाली तो अपना समय और ऊर्जा क्यों नष्ट कर रहे हो?”
       *उस किसान ने उत्तर दिया- *मैं,भी जानता हूँ कि बारह वर्ष फसल नही आने वाली लेकिन मैं, ये काम अपने अभ्यास के लिए कर रहा हूँ।
      *_क्योंकि बारह साल कुछ न करके मैं, खेती किसानी का काम भूल जाऊँगा, मेरे शरीर की श्रम करने की आदत छूट जाएगी। इसीलिए ये काम मैं, नियमित कर रहा हूँ ताकि जब बारह साल बाद वर्षा हो तब मुझे अपना काम करने के लिए कोई कठिनाई न हो।
       *_ये तार्किक चर्चा माता पार्वती भी बड़े कौतूहल के साथ सुन रही थी। बात सुनने के बाद माता, भगवान शिव से सहज बोली – “प्रभु, आप भी बारह वर्षों के बाद डमरू बजाना भूल सकते हैं।”
        *_माता पार्वती की बात सुन कर भोले बाबा चिंतित हो गए।अपना डमरू बज रहा या नही ये देखने के लिए उन्होंने डमरू उठाया और बजाने का प्रयत्न करने लगे।
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⚜️ *_एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
*_यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।

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