आज का पंचाग शुक्रवार 28 अक्टूबर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦*
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 28 अक्टूबर 2022
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🐁 28 अक्टूबर 2022 दिन शुक्रवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। इसे नाग चतुर्थी व्रत भी कहते हैं। आज कही-कहीं आलोचनागौरी व्रत भी किया जाता है। आज से सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत आरम्भ होता है। आज छठ व्रत का पहला दिन अर्थात नहाय-खाय का पावन व्रत है। आप सभी सनातनियों को श्रीगणेश चतुर्थी छठ व्रत (नहाय-खाय) की हार्दिक शुभकामनायें।।
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- तृतीया तिथि 10:34:03 तक तदोपरान्त चतुर्थी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- तृतीया तिथि के स्वामी पार्वती शिव जी हैं तथा चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं।
💫 नक्षत्रः- अनुराधा 10:43:11 तक तदोपरान्त ज्येष्ठा नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- अनुराधा के स्वामी शनि जी हैं तथा ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध जी हैं।
🔊 योगः- शोभन 10:43:11 तक तदोपरान्त अतिगंड
⚡ प्रथम करण : गर – 10:33 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : वणिज – 09:24 पी एम तक विष्टि
⚜️ दिशाशूलः- शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करना चाहिए तथा ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दही खा कर निकलें।
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 07:53: 00 से 09:17:18 तक
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 10:41:20 से 12:04:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:15:05
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:35:10
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:47 ए एम से 05:39 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:13 ए एम से 06:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:41 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:28 पी एम से 05:52 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:39 पी एम से 06:56 पी एम
💧 अमृत काल : 12:53 ए एम, अक्टूबर 29 से 02:23 ए एम, अक्टूबर 29
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 29
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:30 ए एम से 10:42 ए एम
❄️ रवि योग : 10:42 ए एम से 06:31 ए एम, अक्टूबर 29
💥 सौभाग्य योग – देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक
☄️ अनुराधा नक्षत्र – सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को श्वेत वस्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत, आलोचनागौरी व्रत, सूर्य षष्ठी व्रत आरम्भ, उर्जित पटेल – भारतीय रिज़र्व बैंक के 24वें गवर्नर जयंती, मूल प्रारंभ
✍🏽 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌸
इन दिशाओं में ना लगाएं आइना वास्तु शास्त्र में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस दिशा में आइना नहीं लगाया जाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण, पश्चिम दिशा और आग्नेय (दक्षिण-पश्चिम के मध्य में), वायव्य (पश्चिम एवं उत्तर के मध्य में) एवं नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम के मध्य में) की दिवार पर आइना, यानी कि मिरर नहीं लगाना चाहिए।
ये होता है नुकसान जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि इन दिशाओं में लगा आइना नुकसान देता है। दरअसल, इन दिशाओं में आइना लगाने से भय बना रहता है। यानी आप बिना वजह ही किसी डर के कारण परेशान रहेंगे। ऐसे में डरे हुए मन से कोई भी काम अच्छे तरीके से करने और उसमें सफल होने की संभावना कम हो जाती है।
हटा ना सकें तो करें ये काम अगर आपके घर या ऑफिस की इन दिशाओं में मिरर लगा है तो उसे तुरंत वहां से हटा दें, क्योंकि यह अशुभ होता है। यदि मिरर दीवार टाइल्स के बीच लगा है यानी इस तरह से लगा होता है कि उसे हटाना संभव नहीं है तो आप उस पर कोई कपड़ा डालकर उसे ढंक सकते हैं। जिससे उसकी आभा किसी भी वस्तु पर न पड़े।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जैतून का तेल खाने के साथलिए भी फायदेमंद होता है। सर्दियों में ड्राई स्किन को सॉफ्ट करने के लिए आप जैतून तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तेल के इस्तेमाल से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है जैतून तेल को अपने चेहरे और स्किन पर लगाएं। इस तेल को लगाने से ड्राई स्किन की परेशानी दूर हो जाएगी।
बादाम के तेल का इस्तेमाल आप कई तरीकों से कर सकते हैं। इसे दूध में मिलाकर भी पिया जा सकता है जो की फायदेमंद साबित होता है। बादाम के तेल को नहाने के बाद शरीर पर लगाने से त्वचा का रूखापन दूर होता है। बादाम का तेल लंबे समय तक त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।
तिल के तेल के इस्तेमाल से स्किन को हाइड्रेट रखा जा सकता है। ड्राई स्किन को दूर करने के लिए तिल के तेल को थोड़ा गर्म करके उंगलियों की मदद से आपने चेहरे पर लगाएं। इसके इस्तेमाल से ड्राई स्किन की परेशानी दूर हो जाएगी। स्किन को नमी देने के लिए तिल तेल अच्छा होता है।
🍶 आरोग्य संजीवनी 🍯
ह्रदय रोग चिकित्सा
औषधि
अर्जुन या कोह की छाल का चूर्ण 6 ग्राम, गाय के दूध के साथ लेने पर सभी प्रकार का ह्रदय रोग नष्ट हो जाता है।
हरर्र, बच, रास्ना, पीपर, सोंठ, कचूर, पोक्हर मूल, खिरेंटी, गंगेरन, गुलसकरी, कोह की छाल – इनका अलग अलग चूर्ण बनाकर- मिला लें। तीन ग्राम पानी के साथ प्रतिदिन प्रातः काल लें। इससे ह्रदय रोग शांत हो जाता है।
पीपर, सोंठ, अनारदाना, काला नमक, भुनी हींग को चूर्ण करके छान कजर मिला लें। इसे निम्बू के रस में 70 घंटे तक खरल करें। नींबू का रस डाल-डाल कर। इसकी जंगली बेर के समान गोलिया बनाकर छाया में सुखा दें।
प्रातः – सांय एक एक गोली गरम पानी के साथ लेने पर, घोर ह्रदय रोग भी शांत हो जाता है।
👉🏼 नोट – वाल्व की गड़बड़ी या बनावट की गड़बड़ी इससे ठीक नहीं होगी, आराम मिल सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम ने अपने नीतिशास्त्र में काफी कुछ लिखा है। उनके द्वारा बताई गई हर एक बातें हम सभी के जीवन में लक्ष्य पाने के लिए प्रेरित करती हैं। यही कारण है कि आज भी लोग उनके द्वारा कही गई बातें को जरूर अपनाते हैं। हम कहते हैं कि बुरा समय आने से पहले ही उसका आभास होने लगता है। उन्होंने बताया है कि यदि हम घर या आसपास घटने वाली कुछ घटनाओं पर ध्यान दें तो हमें बुरा वक्त आने का संकेत मिल जाएगा। अपने नीतिशास्त्र में हमने ऐसे ही संकेत के बारे में बताए हैं जो घर पर आने वाले आर्थिक संकट की ओर इशारा करते हैं। आइए जानते हैं उन संकेतों के बारे में जो घर पर आने वाले आर्थिक संकट की ओर इशारा करते हैं।
‘तुलसी के पौधे का सूख जाना, घर में क्लेश होना, शीशे का बार-बार टूटना, पूजा पाठ का अभाव और बड़े बुजुर्गों का तिरस्कार करना’
तुलसी पौधे का सूखना अगर आपके आंगन या घर में लगे तुलसी का पौधा सूखने लगे तो इसका मतलब है कि आपको आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए तुलसी के पौधे का ध्यान रखें।
आए दिन घर में झगड़े होना हमारी नीति कहती है कि यदि आपके घर में हमेशा परिवारवालों के साथ लड़ाई होती रहती हैं तो ऐसे में आपके घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होगा। जिसकी वजह से आपकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है।
बार-बार शीशे का टूटना आचार्य श्री गोपी राम के मुताबिक जिस घर में बार-बार शीशा टूट रहा हों उस घर में आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
घर में पूजा-पाठ न होना हमारी मानें तो घर में सुख समृद्धि के लिए नियमित रूप से पूजा पाठ होना जरूरी है। जिस घर पर रोजाना मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है वहां पर उनकी कृपा बनी रहती है। वहीं जिस घर में पूजा पाठ नहीं होता वहां पर मां लक्ष्मी कभी भी नहीं आती हैं।
बड़े बुजुर्गों का अनादर करना जिस घर में बड़े-बुजुर्गों का अनादर होता है वहां पर न तो कभी मां लक्ष्मी निवास करती हैं और न ही घर में सुख समृद्धि आती है। इसलिए चाणक्य जी कहते हैं कि हमेशा अपने बड़ों का सम्मान करें।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।


