आज का पंचाग सोमवार 03 अक्टूबर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 981222450
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 03 अक्टूबर 2022
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
👣 03 अक्टूबर 2022 दिन सोमवार को शारदीय नवरात्रि का अष्टम दिवस है। आप सभी सनातनी बंधुओं को बता दूँ, कि शारदीय नवरात्रा के अष्टम दिन माता महागौरी को प्रशन्न करने के लिए उपासना में हवन एवं उपवास पूर्वक पुजन करना चाहिये। आज त्रिशूल पुजन भी अवश्य करना चाहिये। आज माता चंडी की अष्टम स्वरूपा माँ महागौरी के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। आज दुर्गाष्टमी है साथ ही आज सायंकाल में व्याप्त त्रिमुहूर्त एवं नवमी में महानवमी व्रत। दुर्गानवमी। तिथि संधि में होमादी करें तथा नवमी रहते सायंकाल तक होम पूर्ण कर लेवें। पूर्वाषाढ़ा में माँ सरस्वती का भी पूजन करना चाहिये। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्विन माह
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः-अष्टमी तिथि 16:38:00 तक तदोपरान्त नवमी तिथि
🖍️ तिथि स्वामीः- अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं तथा नवमी तिथि की स्वामिनि दुर्गा जी हैं।
💫 नक्षत्रः- पूर्वा आषाढ़ा 24:25:00 तक तदोपरान्त उत्तरा आषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामीः- पूर्वा आषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव हैं तथा उत्तरा आषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव हैं।
📢 योगः- शोभन 14:23:00 तक तदोपरान्त अतिगंड
⚡ प्रथम करण : बव – 04:37 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 03:29 ए एम, अक्टूबर 04 तक कौलव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक 09 :08:00 P.M से 04:37:00P.M तक
⚜️ दिशाशूलः रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो घर से पान या घी खाकर निकलें।
🤖 राहुकालः- राहु काल 04:37:00P.M से 06:06:00P.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:07:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:53:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:38 ए एम से 05:26 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:46 ए एम से 12:34 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:08 पी एम से 02:56 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:53 पी एम से 06:17 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:05 पी एम से 07:18 पी एम
💧 अमृत काल : 07:54 पी एम से 09:25 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:46 पी एम से 12:35 ए एम, अक्टूबर 04
❄️ रवि योग : 12:25 ए एम, अक्टूबर 04 से 06:15 ए एम, अक्टूबर 04
☀️ शोभन योग- दोपहर 2 बजकर 22 मिनट तक
☄️ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र- रात 12 बजकर 25 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-देवी मंदिर में खीर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अष्टम नवरात्रा महाअष्टमी दुर्गा अष्टमी, माता गणगौरी की पूजा, सरस्वती पूजा, जर्मन एकता दिवस,वन्यजीव सप्ताह
✍🏽 विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
पर्स में न रखें ये चीजें-
बड़ों की तस्वीर-
वास्तु शास्त्र के अनुसार पर्स में पितरों की तस्वीर रखना शुभ नहीं माना जाता है। इसके कारण आपको धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
फटा हुआ पर्स न रखें। सुनिश्चित करें कि पर्स फटा हुआ या बहुत पुराना नहीं है। इससे जीवन में आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाता है। साथ ही पर्स में कभी भी किसी भी तरह का कर्ज, बिल पेपर और ब्याज देने वाली चीजें न रखें। ऐसा करने से धन की काफी हानि होती है।
पैसे बचाएं-
अपने पर्स में नोट को फटा हुआ न रखें। वास्तु के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं है। इससे लक्ष्मी मां क्रोधित हो जाती हैं और धन की भारी हानि होती है। साथ ही ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है।
चाबी को पर्स से दूर रखें-
पर्स में कभी भी चाबी न रखें। वास्तु के अनुसार ऐसा करने से धन की कमी का सामना करना पड़ता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कलह, धन-हानि व रोग-बाधा से परेशान हों तो .
घर में कलहपूर्ण वातावरण, धन-हानि एवं रोग-बाधा से परेशानी होती हो तो आप अपने घर में मोरपंख कि झाड़ू या मोरपंख पूजा-स्थल में रखें ।
नित्य नियम के बाद मन-ही-मन भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए इस पंख या झाड़ू को प्रत्येक कमरे में एवं रोग-पीड़ित के चारों तरफ गोल-गोल घुमाये |
कुछ देर ‘ॐकार ‘ का कीर्तन करें-करायें | ऐसा करने से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा ऊपरी एवं बुरी शक्तियों का प्रभाव भी दूर हो जाता है |
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
वर्तमान समय में पेट की उष्णता एक बड़ी समस्या बना गयी है | ग्रीन हाउस गैसों के कारण वातावरण गर्मीवर्धक हो गया है | इससे तथा रात्रि-जागरण व मोबाइल, कम्प्यूटर, टी. वी. आदि के बढ़ते उपयोग से भी लोगों के शरीर में आंतरिक गर्मी बढ़ रही है | फास्ट फूड, चाय-कॉफ़ी व अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन तथा असमय खाने से पाचन-संबंधी समस्याएँ होती हैं एवं शारीरिक गर्मी बढती है | इस बिगड़ी हुई जीवनशैली का एक गम्भीर दुष्परिणाम है – पुरुषों में शुक्र धातु दौर्बल्य व स्वप्नदोष एवं महिलाओं में पानी पड़ने की बीमारी (श्वेतप्रदर ) |
पुरुषों व महिलाओं की इन गम्भीर समस्याओं में आँवले का सेवन अत्यंत लाभदायी है | आँवला चूर्ण में मिश्री मिलाकर लें | इसका सेवन बढ़ी हुई उष्णता को मल के साथ बाहर निकालता है | यह गर्मी के दिनों में अत्यंत लाभदायी है | शीतल व वीर्यपोषक गुण से यह वीर्य को पुष्ट करके शीतलता, ताजगी, स्फूर्ति व बल प्रदान करता है तथा महिलाओं की पानी पड़ने की बीमारी में भी लाभदायी है |
ताजे आँवलों से बना ‘च्यवनप्राश’ भी शक्ति, स्फृति, ताजगी तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाने हेतु श्रेष्ठ औषधि है | च्यवनप्राश व मिश्रीयुक्त ‘आँवला चूर्ण’ के साथ ही आँवला रस, आँवला कैंडी, आँवला आचार, आँवला पाउडर आदि आँवले से बने उत्पाद संत श्री आशारामजी आश्रमों व समितियों के सेवाकेन्द्रों से प्राप्त हो सकते हैं | इनका उपयोग करके आँवले के विभिन्न गुणों का लाभ ले सकते हैं |
👉🏼 सावधानी : रविवार को आँवले का सेवन वर्जित है, शुक्रवार को कम लें |
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
नवरात्रि के आठवें दिन को महाअष्टमी मनाई जाती है। इस बार महाअष्टमी 3 अक्टूबर दिन सोमवार को मनाई जाएगी। महाअष्टमी पर देवी के महागाैरी स्वरूप की पूजा होती है। ‘महागौरी’ नाम का अर्थ अत्यंत सफेद होता है। किंवदंती है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या और दृढ़ भक्ति की थी। इतनी लंबी तपस्या और तपस्या के कारण देवी पार्वती का शरीर काला पड़ गया। देवी शैलपुत्री के रूप में देवी पार्वती की भक्ति, समर्पण और तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने 16 वर्ष की आयु में देवी को गोरा रंग दिया और इसलिए उन्हें महागौरी का नाम मिला।
👫 विवाह से संबंधित परेशानियां होती हैं दूर
महागौरी देवी सफेद कपड़े और सफेद आभूषण पहनती है और सफेद वृषभ (बैल) की सवारी करने के लिए जानी जाती है। अपने सफेद रंग और सफेद कपड़ों के कारण इन्हें श्वेतांबरधारा के नाम से भी जाना जाता है। मां दुर्गा का आठवां रूप राहु ग्रह को भी नियंत्रित करता है। महागौरी अपने भक्तों के सभी पापों को धोने के लिए जानी जाती हैं। वह पवित्रता और शांति का प्रतीक है। मां महागौरी के पूजन से विवाह से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं। संकट से मुक्ति होती है और पारिवारिक दायित्व की पूर्ति होती है। इसके अलावा आर्थिक समृद्धि होती है।
🙇🏻♂️ महाअष्टमी के दिन लोग रखते हैं उपवास
देवी महागौरी के भौतिक रूप में चार भुजाएं हैं। दाहिनी ऊपरी भुजा भय को दूर करती है जबकि बायीं ऊपरी भुजा में तंबूरा होता है, उनकी दाहिनी निचली भुजा में त्रिशूल होता है जबकि उसकी बाईं निचली भुजा आशीर्वाद के रूप में होती है। उनके उत्साही भक्त दुर्गा अष्टमी या नवरात्रि के आठवें दिन उपवास रखते हैं और उनका आशीर्वाद लेने के लिए उनकी पूजा करते हैं। इस दिन को दुर्गा मां के भक्तों द्वारा अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि कुछ लोग इसी दिन अपना नवरात्रि उपवास भी समाप्त करते हैं।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।
अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।

