एसडीएम कार्यालय में दलालों का बोल-बाला, दलाली के चक्कर में एसडीएम ने बदला खुद का आदेश
रिपोर्टर : राजेन्द्र सिंह
पाटन । आखिर क्यों पाटन राजस्व विभाग के आला अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक के कर्मचारी बिना रिश्वत लिए (हस्ताक्षर) की चिड़िया नहीं बनाते। पाटन तहसील में आम नागरिकों के खेतों का नाप, फौती नामांतरण एवं अन्य कार्य बिना रिश्वत लिए साहब नहीं करते जिसकी वजह से नगर एवं ग्रामीण, पाटन राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियों की वजह से बेहद परेशान है।
आलम यह है कि पाटन एसडीएम मो शाहिद खान नगर के कुछ छुट-भईया नेताओं के संपर्क में रहकर न्याय नहीं करते बल्कि अन्याय करते है इनके राजनैतिक रसूख के कारण नगर के अधिवक्ता बोने नजर आ रहे हैं और राजस्व विभाग की दलाली करने वाले छुट-भैया नेता अब तो सीधे पाटन न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को चुनौती दे रहे हैं।
ये है मामला..
धारा 151/107/116 के तहत आरोपी की जमानत के लिए अधिवक्ता ने अनुविभागीय दण्डाधिकारी के समक्ष अपने मुवक्किल की जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था वही अधिवक्ता की दलीलों को दरकिनार करते हुए आरोपी अर्जुन सिंह ठाकुर वल्द प्रताप सिंह ठाकुर उम्र 20 वर्ष का दिनांक 6 जुलाई 23 को जेल वारंट जारी कर आरोपी को पाटन जेल भेजने का निर्देश दे दिया उसके बाद आरोपी के परिजन जैसे ही राजस्व विभाग के दलालों के संपर्क में आए तत्काल ही अनुविभागीय दण्डाधिकारी ने अपने स्वयं के निर्णय वाली आर्डर शीट पर उक्त आदेश पर कलम से क्रास करते हुए चंद रुपयों की लालच में आरोपी को जमानत दे दी। इस पूरे घटना क्रम से एक साफ संदेश निकल कर सामने आया, यदि आप साहब को चढ़ावा नहीं चढ़ाएंगे तब ऐसी स्थिति में चाहे आप अधिवक्ता ही क्यों न हो राजस्व विभाग का अमला आपकी न्याय संगत दलीलों को दरकिनार करते हुए आपके मुवक्किल को जेल की हवा खिलाने का माजदा रखता है।
जब इस संबंध में पाटन अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रघुवीर सिंह ठाकुर से बात की गई तो उनका कहना है कि अधिवक्ता को पाटन एसडीएम की शिकायत अधिवक्ता संघ कार्यलय में करना चाहिए, हम उक्त मामले को दिखवाते है। जो भी न्याय संगत कार्यवाही होगी हम करेगे।



