Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 30 दिसम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 30 दिसम्बर 2023
30 दिसम्बर 2023 दिन शनिवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आज अपने पुत्र की कुशलता-संपन्नता-सुख एवं आरोग्य हेतु माताओं को दिनभर उपवास के उपरांत सायंकाल में श्रीगणेश जी की पूजा के बाद उगते चन्द्रमा को अर्घ्य (समय: 08:18 PM) देकर उपवास खोलना चाहिए। आज शनिवार की रिक्ता का संयोग होने से सिद्धयोग का निर्माण हो रहा है। आप सभी सनातनियों को “संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की” बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – पौष मास कृष्ण पक्ष दिन शनिवार तृतीया तिथि 09:44 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी : तृतीया तिथि के देवता हैं यक्षराज कुबेर। इस तिथि में कुबेर का पूजन करने से व्यक्ति धनवान बन जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 05:42 AM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध होता है। चंद्रमा अश्लेषा नक्षत्र का शासक ग्रह है।अहि या नागराज इस नक्षत्र के लिए हिंदू देवता हैं।
🔕 योग – विष्कुम्भ योग 02:55 AM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 09:43 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 10:46 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:02 ए एम से 05:54 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:28 ए एम से 06:45 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:41 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:10 पी एम से 02:54 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:49 पी एम से 06:15 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:52 पी एम से 07:09 पी एम
💧 अमृत काल : 03:56 ए एम, दिसम्बर 31 से 05:42 ए एम, दिसम्बर 31
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:53 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 31
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में काले तिल के लड्डू चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – गणेश चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय रात्रि 08:57 बजे), नेशनल बेकन डे, नेशनल बाइकार्बोनेट ऑफ सोडा डे, क्वानजा, विंटर वॉक का त्योहार, ब्लू क्रिसमस, अखिल भारतीय मुस्लिम लीग स्थापना दिवस, वैज्ञानिक विक्रम साराभाई स्मृति दिवस, साहित्यकार, पत्रकार ‘कादम्बिनी पत्रिका’ राजेन्द्र अवस्थी स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🗽 Vastu tips 🗼
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे पूर्व और पश्चिम दिशा में सिर करके सोने के बारे में। वास्तु के अनुसार, पूर्व दिशा में सिर करके सोना अच्छा रहता है, जबकि पश्चिम दिशा में सिर करके कभी नहीं सोना चाहिए।
वास्तु के मुताबिक, पूर्व दिशा में सिर यानि पश्चिम दिशा में पैर करके सोना स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा होता है। दरअसल, सूरज पूर्व दिशा की ओर से निकलता है और उसकी सबसे पहली किरण पूर्व दिशा में ही देखने को मिलती है इसीलिए इस दिशा में सिर करके सोने से सुबह की पहली किरण आपके सिर पर ही आती है। परिणामस्वरुप, आपके अंदर नई ऊर्जा का संचार होता है, जबकि इस दिशा में पैर करके सोने से आपके मस्तिष्क तक उचित ऊर्जा नहीं पहुंच पाती है।
🗝️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चेहरे पर कैसे लगाएं दूध इसके लिए 1 कटोरी में 2-3 चम्मच कच्चा दूध लें और इसमें 1 चम्मच गुलाब जल मिक्स कर लें।
अब कॉटन की मदद से दूध और गुलाबजल के मिक्स को पूरे चेहरे पर लगा लें। करीब 5 मिनट के बाद फेस की मसाज करते हुए क्लीन करें।
अब 10 मिनट तक इसे फेस पर लगाए रखें और सादा पानी से फेस को धो लें। अगर फेस चिपचिपा लगे तो हल्के गुनगुने पानी से भी चेहरा साफ कर सकते हैं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
शरीर को स्वस्थ रखना है तो विटामिन और मिनरल्स का सही बैलेंस होना जरूरी है। किसी भी एक विटामिन की कमी होने से भी शरीर बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। शरीर के लिए ऐसा ही जरूरी पोषकतत्व है विटामिन के (Vitamin K), जिसकी कमी से खून में क्लॉटिंग नहीं हो पाती है और खून का थक्का नहीं जम पाता है। ऐसे में जरा सी चोट लगने पर बहुत ब्लीडिंग होने लगती है। कई बार लोगों को नाक से खून बहने लगता है। दांतो और मसूड़ों से भी खून आने लगता है। विटामिन के हड्डियों के विकास, घाव भरने दिल को स्वस्थ बनाने और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। अगर शरीर में विटामिन-के की कमी हो जाए तो कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पैंक्रियाज और लिवर पर भी इसका असर पड़ता है। जान लें शरीर में विटामिन के की कमी होने पर क्या लक्षण नजर आते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
भगवान विष्णु कलयुग के कल्की अवतर में अभी कितना – समय वाकी है?
जी लगभग 3102 BCE से कलयुग की शुरुआत हुई थी जोकि लगभग शुरु हुए अभी 5125 वर्ष ही हुए हैं. कलयुग का पूरा काल लगभग 432000 वर्ष का है सो अभी भी कलयुग के लगभग 426875 वर्ष बाकी हैं और जब ये कलयुग का अंत समय आयेगा उससे मात्र कुछ वर्ष पहले ही भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होगा।
इस समय कलयुग का प्रथम काल चल रहा है जिसे कलयुग का स्वर्ण युग कह सकते हैं क्यूंकि कलयुग के प्रथम 10000 वर्षों तक नाम जप करने वाले व्यक्तियों को वो फल प्राप्त होगा जो किसी पूर्व काल में तपस्याओं और यज्ञ करने से प्राप्त होता था. इस स्वर्ण युग में भी ऐसे लोग भी होंगे जो दूसरों को इस काल में नाम जप करने से रोकेंगे और उनकी मति भ्रष्ट करेंगे
कलयुग के 10000 वर्ष बीतने के बाद घोर कलयुग शुरु हो जाएगा और ईश्वर की भक्ति ना के बराबर हो जाएगी. पेड़ पौधे और दूसरे जीव नष्ट होने शुरु हो जाएंगे और वातावरण बेहद से बेहद गर्म होता चला जाएगा.
एक समय आयेगा जब भूख से व्याकुल मनुष्य दूसरे मनुष्यों को खाना शुरु कर देंगे और मनुष्यों की आयु बेहद कम होनी शुरु हो जाएगी. यधपि उनकी आयु कम होगी परंतु जन्म भी उसी विस्तार से होगा कामवासना के चलते.
इस समय भगवान विष्णु अपना कल्कि अवतार लेंगें और कलयुग की समाप्ति होगी और नया युग सतयुग फिर से शुरु होगा.
तो समय व्यर्थ ना करते हुए हमें अभी से ईश्वर की शरणागत होकर उनका नाम जप करना चाहिये ताकि कलयुग के उस काल में हम दुबारा जन्म ना लें.
कलयुग केवल नाम अधारा, सिमर-सिमर नर उतरहिं पारा
धन्यवाद
हरे श्री कृष्ण 🙏🌺
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।


