मध्य प्रदेश

कलेक्टर का आदेश मानने से जनपद सीईओ का इंकार

मुख्यालय नहीं छोड़ने के आदेश, बावजूद जबलपुर से कर रहे अप-डाउन
जब मर्जी तब आते है ऑफिस

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । विधानसभा निर्वाचन 2023 के लिये आदर्श आचार संहिता लागू होते ही कलेक्टर अवि प्रसाद के द्वारा सभी अधिकरियों और कर्मचारियों को निर्देशित करते हुये आदेश जारी किया गया है कि आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है और कुछ समय पश्चात ही चुनाव संपन्न होने वाले है ऐसे में कोई भी अधिकारी-कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोडे़। बावजूद इसके ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत सीईओ यजुवेन्द्र कोरी के द्वारा घोर लापरवाही और कलेक्टर के आदेश को दरकिनार कर, मनमर्जी करते हुये मुख्यालय छोड़ा जा रहा है और जबलपुर से प्रत्येक दिवस शासकीय वाहन क्रमांक-एमपी 20 जेड.एच. 4981 के द्वारा अप-डाउन किया जा रहा है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा सीईओ यजुवेन्द्र कोरी के आने-जाने का समय निर्धारित नहीं है। साहब की जब मर्जी होती है जब उनका आगमन होता है और जब जाना होता है तो चले जाते है। सीईओ के द्वारा इस तरह की लापरवाही से जहां कार्यालय के कार्य प्रभावित हो रहे है तो वहीं दूसरी ओर आम जनता भी परेशान हो रही है। चूंकि कई बार ग्रामीण शिकायत लेकर या किसी अन्य कार्य से जनपद आते है लेकिन आने जाने का समय निर्धारित नहीं होने के कारण ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालंाकि सीईओ यजुवेन्द्र कोरी को इस बात से कोई मतलब नहीं है। वें अपनी मर्जी के हिसाब से डयूटी कर रहे और कलेक्टर के आदेश को अनदेखा कर घोर लापरवाही बरती जा रही है।
अधिकांश अधिकारी छोड़ रहे मुख्यालय
आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने और कलेक्टर के द्वारा मुख्यालय नहीं छोड़ने के आदेश के बावजूद भी संबंधित विभागीय अधिकारी इस बात को मानने के लिये तैयार नहीं है और उनके द्वारा लगातार मुख्यालय छोड़ा जा रहा है जिससे जहां एक ओर तो कलेक्टर अवि प्रसाद के आदेश का पालन नहीं हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के साथ ही चुनाव का बिंगुल बज चुका है। ऐसे में यदि रात के समय किसी तरह का लायन आर्डर या अन्य तरह की स्थिति निर्मित होती है तो उसे कैसे संभाला जायेगा यह भी विचारणीय प्रश्न है। चूंकि चुनाव के समय किसी भी तरह की स्थिति उत्पन्न होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अधिकारियों के मुख्यालय छोड़ने की मनमानी भारी पड़ सकता है चूंकि सभी कटनी या जबलपुर से अप-डाउन कर रहे है।
शासन को भी लग रहे चपत
सभी विभागीय अधिकारियों को शासन द्वारा बंगला आवंटित किया गया है और उनके द्वारा बंगला भी लिया गया है बावजूद इसके न जाने क्यों वे जबलपुर और कटनी का मोह नहीं छोड़ पा रहे है। उनके द्वारा ऐसा करने से जहां एक ओर शासन को आर्थिक चपत लग रही है। चूंकि उनके द्वारा आने जाने में शासकीय वाहन का उपयोग किया जाता है जिस कारण से शासन को अतिरिक्त राशि गाड़ी मालिकों को अदा करनी पड़ रही है। हालांकि इस बात से अधिकारियों को कोई मलतब नहीं है क्योंकि शासन के फंड से संबंधित गाड़ियों का किराया अदा किया जाता है ।

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