गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन की विधि
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन की विधि
❄️ कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पूजा होती है। दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है। इस दिन घर और मंदिरों में विविध प्रकार की खाद्य सामग्रियों से भगवान को भोग लगाया जाता है और गोवर्धन की पूजा और परिक्रमा की जाती है। आओ जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि।
⚛️ गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव 2023 के शुभ मुहूर्त
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- 13 नवम्बर 2023 को दोपहर 02:56 से प्रारंभ।
प्रतिपदा तिथि समाप्त- 14 नवम्बर 2023 को दोपहर 02:36 को समाप्त।
कब है गोवर्धन पूजा- उदया तिथि के मान से यह उत्सव 14 नवंबर 2023 को मनाएंगे।
💩 गोवर्धन पूजा का प्रातःकाल मुहूर्त:- सुबह 06:43 से 08:52 तक।
🌟 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से 12:27 तक।
🔯 विजय मुहूर्त : दोपहर 01:53 से 02:36 तक।
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 05:28 से 05:55 तक।
💧 अमृत काल : शाम 05:00 से 06:36 तक।
👉🏽 नोट: स्थानीय समय अनुसार मुहूर्त के समय में घट-बढ़ रहती है।
🤷🏻♀️ गोवर्धन पूजा पर बन रहे ये योग
इस बार गोवर्धन पूजा के दिन शुभ योग बन रहे हैं। गोवर्धन पूजा पर शोभन योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 01 बजकर 57 मिनट तक है। उसके बाद से अतिगंड योग शुरू हो जाएगा। अतिगंड योग शुभ नहीं होता है। हालांकि शोभन योग को एक शुभ योग माना जाता है। इसके अलावा गोवर्धन पूजा के दिन सुबह से ही अनुराधा नक्षत्र होगी।
🙇🏻♀️ कैसे करे गोवर्धन पूजा
इस दिन गाय के गोबर के गोवर्धन बनाकर उसे फुल से सजाकर धूप -दीप नैवेद तथा फल को चढ़ाये
🍱 गोवर्धन पूजा विधि
🔹 दीपावली के बाद यह दिन परस्पर भेंट का दिन भी होता है।
🔹 एक-दूसरे के गले लगकर दीपावली की शुभकामनाएं दी जाती हैं।
🔹 गृहिणियां मेहमानों का स्वागत करती हैं।
🔹 लोग छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का भेद भूलकर आपस में मिल-जुलकर यह त्योहार मनाते हैं।
🔹 इस दिन परिवार, कुल खानदान के सभी लोग एक जगह इकट्ठे होकर गोवर्धन और श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं।
🔹 पूजा के बाद में भोजन करते हैं और शगुन स्वरूप जुआ भी खेलते हैं।
🔹 इस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर गोवर्धन की पूजा करते हैं।
🔹 प्रात:काल भगवान कृष्ण का ऐसा चित्र जिसमें वे गोवर्धन पर्वत हाथ में धारण किए खड़े हों अपने पूजाघर में लगाकर उसकी पूजा की जाती हैं।
🔹 इस दिन प्रात:काल स्नान करने के उपरान्त घर की दहलिज के बाहर गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है।
🔹 पूजा के बाद कई तरह के पकवान बनाकर भोग स्वरूप रखते हैं।
🔹 सायंकाल गोवर्धन विग्रह का पंचोपचार विधि से पूजन करें और 56 प्रकार के पकवान बनाकर भोग अर्पित करें।
🔹 ग्रामीण क्षेत्र में अन्नकूट महोत्सव इसलिए मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन नए अनाज की शुरुआत भगवान को भोग लगाकर की जाती है
🔹 इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है और गौमाता को मिठाई खिलाकर उसकी आरती उतारते हैं तथा प्रदक्षिणा भी करते हैं।
🤷🏻♀️ गोवर्धन पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण द्वारा ही सर्वप्रथम गोवर्धन पूजा आरंभ करवाई गई थी। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत तो अपनी उंगली पर उठाकर इंद्रदेव के क्रोध से ब्रज वासियों और पशु-पक्षियों की रक्षा की थी। यही कारण है कि गोवर्धन पूजा में गिरिराज के साथ कृष्ण जी के पूजन का भी विधान है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है।



