धार्मिकमध्य प्रदेश

घर-घर विराजमान हुए विघ्नहर्ता, करीब 80 स्थानों पर सजी गणेश भगवान की झांकियां

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। बुधवार से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरूआत हो चुकी है।श्रद्धालुओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह है। गली मौहल्ला, प्रमुख चौराहा पर भगवान लंबोदर प्रतिमाओं की स्थापना शुभ मुहूर्त में की ।एक हफ्ते पूर्व से तैयारियां शुरू हो चुकी थीं तो वहीं श्रद्धालुजन भी अपने घरों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमाएं लेकर आने की आतुरता रही । गंजबाजार, महामाया चौक नपा भवन के सामने सांची रोड़ में भी इस दस दिवसीय उत्सव की चहल-पहल बढ़ गई। यहां जगह-जगह भगवान गणेश की प्रतिमाओं के विक्रय के लिए दुकानें सजाईं और अपने मनमोहक स्वरूप में यह प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।
मूर्तिकारों के घर से प्रतिमाएं ले जाने का क्रम रात तक रहा जारी….
रायसेन शहर के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार गोविंद प्रजापति पाटनदेव, सुनील महोबिया, लखन चक्रवर्ती के घर बंगाली शैली की भगवान गणेश की प्रतिमाओं की खासी डिमांड रही।गणेश झांकियों के आयोजक युवक बच्चे गणेश भगवान की एक से बढ़कर प्रतिमाओं को ट्रैक्टर ट्रॉली और चार पहिया वाहनों में रखकर झांकी पंडालों तक लेकर पहुंचे। ढोल नगाडो की धुनों के बीच युवाओं और उत्साहित बच्चों ने गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति उछा बर्छी लोकरया …..के जयकारे शहर में गूंजते रहे।जिला मुख्यालय के आसपास के गांवों से आकर गणेश झांकी आयोजक वाहनों से गिरजा नन्दन भगवान गणेश की प्रतिमाएं लेकर पहुंचे।
सनातन श्रीहिन्दू उत्सव समिति रायसेन के पतिराम प्रजापति पूर्व अध्यक्ष राजकुमार यादव विजय राम लोहट एडवोकेट सूर्या सराठे ने बताया कि शहर में करीब 80 स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापितहुईं हैं।
इधर, शहर में गणेश मंदिरों मिश्र तालाब घाट रामलीला ग्राउंड में भी इस दस दिवसीय उत्सव की तैयारियां की गईं है। धर्मशास्त्री पण्डित ओमप्रकाश शुक्ला सौजना मुकेश भार्गव राममोहन चतुर्वेदी के मुताबिक शहर में भगवान गणेश के प्राचीन मंदिरों में मिश्र तालाब घाट चिंतामणि गणेश मंदिर, अनाज मंडी परिसर स्थित गणेश मंदिर,मारुति नन्दन मन्दिर सागर रोड़ पाटनदेव गणेश मंदिर, गणेश मंदिर आदि हैं जो श्रद्धालुओं की आस्था के मुख्य केंद्र रहते हैं। मिश्र तालाब घाट वाले गणेश मंदिर पर भी श्रद्धालु भगवान के दर्शनार्थ पहुंचें। यहां हवन पूजन कर परिवार सहित दर्शन किए गए।उन्होंने बताया कि यह दस दिवसीय उत्सव 9 सितंबर तक चलेगा जबकि डोल ग्यारस 6 सितंबर को रहेगी। इस उत्सव के तहत मंदिरों में विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।

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