नवावी शासन से आजादी दिलाने वाले शहीदों को भूला शासन , प्रशासन
उदयपुरा । नवावी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए विलीनीकरण आंदोलन में 14 जनवरी को जिले के चार युवाओं ने दी थी शहादत उनको ही भूला शासन, प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधि । इसलिए कहते है कि एमपी और गजब है एमपी भारत देश 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था, लेकिन रायसेन जिला, जो भोपाल नवाबी रियासत का अहम हिस्सा था, आज़ादी के 659 दिन बाद स्वतंत्र हो पाया। सम्पूर्ण भारत में 14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है, लेकिन रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील के ग्राम बोरास में इस दिन को “शहीदी संक्रांति” के रूप में मनाया जाता है।
हर वर्ष यहां विलीनीकरण आंदोलन में शहीद हुए चार युवाओं को श्रद्धांजलि दी जाती रही है और उनके परिजनों का सम्मान किया जाता रहा है, लेकिन इस वर्ष शहीदी संक्रांति पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने सभी को निराश किया।
हैरानी की बात यह रही कि शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए केवल पुलिस बल के दो जवान ही मौके पर पहुंचे, जबकि हर वर्ष प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहते थे। सुबह से शाम हो गई, लेकिन न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि। इससे स्थानीय लोगों और शहीदों के परिजनों में गहरा आक्रोश है।
यह वह स्थान है जहां विलीनीकरण आंदोलन के दौरान चार राजपूत युवाओं ने देश की आन-बान-शान की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इन शहीदों ने भारत के ध्वज को गिरने नहीं दिया। आज भी नर्मदा तट स्थित बोरास घाट पर हर वर्ष श्रद्धा सुमन अर्पित कर मकर संक्रांति को शहीदी संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। प्रतिवर्ष जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग यहां पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके परिजनों का सम्मान करते हैं, लेकिन इस वर्ष यह परंपरा टूटती नजर आई।
देश 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो गया था, लेकिन भोपाल रियासत में 01 जून 1949 को तिरंगा फहराया गया। भोपाल रियासत के भारत गणराज्य में विलय में लगभग दो वर्षों का समय इसलिए लगा क्योंकि नवाब हमीदुल्ला ख़ान इसे एक स्वतंत्र रियासत बनाए रखना चाहते थे। वहीं हैदराबाद के निज़ाम उन्हें पाकिस्तान में विलय के लिए प्रेरित कर रहे थे, जो भौगोलिक दृष्टि से असंभव था।
आजादी के इतने समय बाद भी विलय न होने से जनता में भारी आक्रोश था, जो आगे चलकर विलीनीकरण आंदोलन में बदल गया और उग्र रूप ले लिया। इसी आंदोलन में चार युवाओं को शहादत मिली।
भोपाल रियासत के भारत संघ में विलय के लिए चल रहे विलीनीकरण आंदोलन की रणनीति और गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रायसेन जिला था। यहीं उद्धवदास मेहता, बालमुकुंद, जमनाप्रसाद और लालसिंह ने जनवरी–फरवरी 1948 में प्रजा मंडल की स्थापना की।
नवाबी शासन ने आंदोलन को दबाने के लिए लाठीचार्ज और गोलियां चलवाईं। आज भी वह ऐतिहासिक ध्वज मौजूद है, जिसे पहली बार कैमरे पर दिखाया जा रहा है, जिसे झुकने नहीं दिया गया था। इसी आंदोलन में ग्राम बोरास के चार युवा शहीद हुए।
ये सभी शहीद 30 वर्ष से कम आयु के थे। शहीदों में
श्री धनसिंह (25 वर्ष)
मंगलसिंह (30 वर्ष)
विशालसिंह (25 वर्ष) 16 वर्षीय किशोर छोटेलाल शामिल थे।



