मध्य प्रदेश

फर्जी बिल लगाकर सफाई के नाम पर निकाल रहे राशि, जांच करने की जहमत नहीं उठा पा रहे अधिकारी

गंदगी से सराबोर ग्रााम पंचायत परसेल की गालियां
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । ढीमरखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत परसेल में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है लेकिन इस बात से सरपंच और सचिव को कोई मतलब नहीं है । सफाई व्यवस्था के नाम पर निरंतर बिल लगाकर राशि आहरित की जा रही है लेकिन गांव में सफाई नहीं करवाई जा रही है। आंगनबाड़ी भवन के पास भी गंदगी का ढ़ेर लगा हुआ है। आंगनबाड़ी भवन में गर्भवती महिलाओं का आना जाना रहता है साथ ही यहां पर छोटे-छोटे बच्चे भी आते है बावजूद इसके सरपंच-सचिव बेखबर होकर मात्र फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित कर रहे है। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया और लिखित में सरपंच-सचिव के विरूद्ध शिकायतें की गई लेकिन न जाने क्यों अधिकारी जांच करने तक की जहमत नहीं उठा पाते है । सरपंच-सचिव के इन कारनामों से पूरा गांव त्रस्त है साथ ही संपूर्ण पंच सरपंच के विरोध में मुखर हो रहे है चूंकि ग्राम पंचायत परसेल में लाखों रूपये की आर्थिक अनिमित्ता की गइ्र है । इस संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी भी चाही गई लेकिन दो माह का समय बीत जाने के बाद भी पंचों को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है । साथ ग्रामीणों ने बताया कि यदि जल्द की उनकी शिकायत पर सरपंच और सचिव पर कार्यवाही न हीं होती है तो संपूर्ण ग्रामीण जनपद पंचायत ऑफिस के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे ।
आर्थिक अनियमित्ता पर किया था निलंबित, फिर दे दिया दो-दो पंचायतों का प्रभार
आर्थिक अनियमित्ता पर हुये निलंबित, यहां भी वही काम
तदउपरांत जांच में दोषी पाये जाने पर उसे निलंबित कर दिया गया था। बाद में कुछ समय बाद से जुगाड़ से उक्त महोदय पुन: बहाल हो गये। सूत्रों ने बताया कि कमलेश हल्दकार को बहाल किया गया तो उनका स्थानांतरण ग्राम पंचायत परसेल और तद उपरांत ग्राम पंचायत घुघरा में कर दिया गया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त आर्थिक अनियमित्ताओं के दोषी सचिव को दोनों ही पंचायतों में वित्तीय प्रभार दे दिया गया है। जहां पर उसके द्वारा पूर्व में जिस तरह से आर्थिक अनियमित्ता बरती गई थी उसी तरह से दोनों ही पंचायतों में वर्तमान में भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है ।
एक भी शिकायत में नहीं हुई जांच
ग्रामीणों ने बताया कि लाखों के गबन मामले में हमारे द्वारा कई शिकायतें विभिन्न अधिकारियों को की गई लेकिन हमारे द्वारा की गई एक भी शिकायत पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई है जिससे ग्रामीण अत्याधिक प्रताड़ित हो रहे है। साथ ही ग्राम पंचायत परसेल के 15 पंचों ने भी सरपंच के विरोध में मोर्चा खोल दिया है । चूंकि पंचायत में क्या काम हो रहे है, किस काम की राशि आहरित की जा रही है सहित अन्य किसी भी तरह की जानकारी पंचों को नहीं दी जाती है जिससे प्रताड़ित होकर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें पंचायत सचिव के द्वारा आज दिनंाक तक किसी भी तरह की कोई जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई और जब ग्रामीणों द्वारा इस बात की शिकायत जनपद में की गई तो वहां पर पदस्थ अधिकारियों के द्वारा उल्टा सरपंच सचिव का समर्थन किया गया लेकिन आज दिनांक तक लाखों के गबन मामले में चाही गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई । ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत के द्वारा जानकारी नहीं देने के कारण अब अधिकारी के समक्ष एक अपील इस संबंध में प्रस्तुत की जायेगी इसके बाद भी यदि हमारी समस्या का निराकरण नहीं किया जाता है तो राज्य सूचना आयोग के समक्ष भी उक्त अपील प्रस्तुत की जायेगी ।

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