Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 13 दिसम्बर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 13 दिसम्बर 2023
13 दिसम्बर 2023 दिन बुधवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। यह मार्गशीर्ष का शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि का क्षय होने के वजह से 14 दिनों का ही है। शुक्ल पक्ष में तिथि का क्षय होना शुभ नहीं माना जाता है। आज रुद्र व्रतम अर्थात लोक प्रचलित व्रत पीड़िया का पावन व्रत है। आज कुलाकुलगण: दुर्लभसन्धिकर योग: भी है अर्थात आज पितरो से सन्धि का योग होता है। आज पितरों को जलांजलि समर्पित करके उन्हें श्रद्धा से उनके निमित्त गाय, कौवा और कुत्तों को भोजन देना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “पीड़िया व्रत” की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष वार बुधवार प्रतिपदा तिथि 03:09 AM तक उपरांत द्वितीया
✏️ तिथि स्वामी : प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र ज्येष्ठा 11:05 AM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी : ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं ।
🔕 योग : शूल योग 04:18 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
⚡ प्रथम करण : किंस्तुघ्न – 04:08 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 03:09 ए एम, दिसम्बर 14 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:46:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:14:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:54 ए एम से 05:45 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:20 ए एम से 06:37 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:46 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:07 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:43 पी एम से 07:01 पी एम
💧 अमृत काल : 03:44 ए एम, दिसम्बर 14 से 05:14 ए एम, दिसम्बर 14
🗣️ ₹निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:36 ए एम, दिसम्बर 14_
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी मंदिर में जायफल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : देव दीपावली/ मार्तण्ड भैरव षड् रात्रोत्सव आरंभ/ अमावस्या समाप्ति सुबह 05.01/लोक प्रचलित व्रत/ “पीड़िया व्रत”/ देवदर्शन/वक्री बुध गोचर/ राष्ट्रीय अश्व दिवस, अभिनेता वेंकटेश जन्म दिवस, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन जन्म दिवस, फिल्म निर्देशक और लेखिका मेघना गुलजार जन्म दिवस, राष्ट्रीय आइसक्रीम दिवस, राष्ट्रीय वायलिन दिवस, महाराज छत्रसाल परमधाम दिवस
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌸
तिजोरी रखने की सही दिशा क्या है? कई बार ऐसा होता है कि आप चाहें कितना ही पैसा कमा लें लेकिन फिर भी आपकी तिजोरी में बरकत नहीं होती। इस परेशानी से बचने के लिए तिजोरी को सही दिशा में रखना बहुत जरूरी है। तिजोरी को या तो दक्षिण दिशा की तरफ दिवार से सटाकर रखें जिससे इसका मुंह उत्तर की ओर खुले या फिर पश्चिम दिशा में रखे जिससे यह पूर्व की ओर खुलेगी।
वास्तु शास्त्रों के अनुसार,उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर और पूर्व दिशा में इंद्र देव का वर्चस्व माना जाता है। इन दोनों दिशाओं में तिजोरी का मुंह खुलने से पैसों की बढ़ोतरी होगी और परिवार में भी खुशहाली का वातावरण बना रहेगा। लेकिन ध्यान रहे कि तिजोरी का मुंह दक्षिण दिशा की तरफ कभी भी न हो। क्योंकि ये दिशा यम की दिशा है और इस दिशा में तिजोरी का मुंह खुलना मतलब परेशानियों को बुलावा देना है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
बदलते मौसम में लोगों को सर्दी, जुकाम व बुखार की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है और अन्य मौसमी बीमारियां भी शरीर पर असर डालती हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक काढ़ा मौसमी बीमारियों से जल्दी छुटकारा दिलाने में हमारी सहायता करता है। काढ़ा शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। काढ़े का सेवन करने से शरीर पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है, बशर्ते सही मात्रा में ही सेवन किया जाए क्योंकि काढ़ा गर्म तासीर का होता है । इस बदलते मौसम लोगों को कई तरह की संक्रामक बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
त्रिकुट चूर्ण ठंड में सर्दी-जुकाम समेत कई बीमारियों से आराम देता है। इसके फायदे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। दीपावली से हल्की सर्दियों का मौसम चालू हो जाता है। मौसम तेजी से बदलने के कारण लोग ज्यादा बीमार पड़ते है। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। उन्हें बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए ठंड के मौसम में हमेशा शरीर को गर्म रखना चाहिए नहीं तो सर्दी-जुकाम तेजी से उनको अपनी चपेट में ले लेता है। काढ़ा एक आयुर्वेदिक घरेलू उपाय है, जो कई जड़ी-बूटियों और मसालों से बनाया जाता है। यह मिश्रण इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और संक्रमण से लड़ने का सबसे सस्ता घरेलू उपाय है। तो आइए जानते हैं काढ़ा बनाने की विधि और इसके फायदे।
🥂 आरोग्य संजीवनी 🍻
क्या है इलाज : गठिया के पारंपरिक इलाज में दर्द को कम करने के लिए पेन किलर दवाएं, दर्द और सूजन दोनों को कम करने के लिए नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं और सूजन को कम करने और इम्यून सुस्टन को दबाने के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड शामिल हैं।
लंबे समय तक चलती है दवा : गठया रोगी को लंबे समय तक दवाओं के इस्तेमाल के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। फिजियोथेरेपी जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने और गति की सीमा में सुधार करने के लिए निर्धारित है। कुछ मामलों में दर्द को कम करने और काम में सुधार करने के लिए जोड़ों को फिर से संरेखित करने के लिए सर्जरी की सिफारिश की जाती है। हालांकि, इसते भी कुछ साइड इफेक्ट्स हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मरण अवस्था तक कार्मकांड का विधान है। बात करें पुराणों में तो गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ का दिव्य संवाद है। पक्षिराज गरुड़ ने भगवान विष्णु से वो सारे प्रश्न पूछे हैं जिससे मानव का कल्याण हो सके।
पक्षिराज गरुड़ ने भगवान विष्णु से इस पुराण में वो सारी बातें मानव क्लयाण के हित के बारे में पूछी हैं जिससे प्राणियों को मोक्ष मिले और उनका मानव जीवन सुखद बीते। आज हम आपको गरुड़ पुराण के अनुसार यह बताने जा रहे हैं कि जब किसी की अकाल मृत्यु होती है तो उसके निमित्त कौन सी पूजा कराने से मृत्य लोगों की आत्मा को शांति प्रदान की जाती सकती है और यह पूजा कितनी जरूरी है।
अकाल मृत्यु होने पर जीवात्मा विचलित हो जाती है गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जब किसी की असमान्य मृत्यु होती है जैसे की अचानक से चोट लग जाना, किसी हादसे के कारण या किसी दुर्घटना के चलते जब मनुष्य प्राण त्यागता है तो उसे अकाल मृत्यु कहा जाता है। यह समय जीवात्मा के लिए बहुत कष्टकारी होता है क्योंकि उसका सांसारिक मोह होने के कारण उससे उसका शरीर छिन जाता है और वह पुनः अपनी देह में वापस आने के लिए व्याकुल होती है। अपने मृत्य शरीर को जीवात्मा देख कर इसलिए बेचेन होती है क्योंकि उसकी कुछ अधूरी इच्छाएं, परिवार से मोह और अपनों से उम्मीदें ये सभी बातें उस समय जीवात्मा को घोर पीड़ा देती है। गरुड़ पुराण के अनुसार वह जीवात्मा अपनी सीमित आयु की अवधि तक 84 योनियों में से प्रेत योनि को प्राप्त करती है और जब तक पूर्ण आयु अवधि नहीं पूरी होती है। वह इधर-उधर भूख प्यास से व्याकुल होकर भटकती रहती है। यह सब कर्मों के अनुसार निर्धारित होता है।
अकाल मृत्यु हो जाने पर कराएं नारायण बलि पूजा जीवात्मा को जब शांति नहीं मिलती या उसके निमित्त उचित क्रिया कर्म और अंतिम संस्कार नहीं होता तो वह अपने परिजनों से यह अपेक्षा करती है कि वह उसके निमित्त उचित कर्माकांड करा कर उसे मुक्ति दिला दें। जब तक जीवात्मा को मुक्ति नहीं मिलती वह पितृ रूप में प्रेत योनि प्राप्त कर मृत्युलोक में भटकती रहती है। इसके लिए गरुड़ पुराण में नारायण बलि की पूजा का विधान बताया गया है। अकाल मृत्यु हो जाने के बाद नारायण बलि ही एक ऐसी पूजा है जिसे विधि विधान द्वारा कराने पर जीवात्मा को मुक्ति मिल जाती है और वह कर्म बंधन से मुक्त हो जाती है।
विष्णु जी से की जाती है मुक्ति की प्रार्थना गरुड़ पुराण के अनुसार नारायण बलि की पूजा में भगवान विष्णु से जीवात्मा की मुक्ति के लिए प्रार्थना की जाती है और उसके कर्मों के प्राश्चित के लिए छमा याचना की जाती है। इस पूजा में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों के निमित्त एक-एक पिंड बनाया जाता है। यह पूजा 5 उच्च वेद पाठी ब्राह्मणों द्वारा कराई जाती है। इस पूजा में विधि पूर्वक पिंड दान समेत जीवात्मा की मुक्ति के लिए पूजा पद्धति अपनाई जाती है। यह पूजा कराने से अकाल मृत्यु प्राप्त जीवात्मा को मुक्ति मिल जाती है और परिजन पितृ रूप में आशीर्वाद देते हैं। यह पूर्वज रूप में सदैव के लिए उस घर में संपन्नता का आशीर्वाद बना देते हैं। जो लोग अकाल मृत्यु होने पर परिजनों के निमित्त यह पूजा कराते हैं उनके ऊपर पितृ दोष नहीं लगता है।
तीर्थ स्थल में करा सकते हैं नारायण बलि की पूजा गरुड़ पुराण के अनुसार इस पूजा को पवित्र तीर्थस्थल, देवालय या तीर्थजल और घाट के पास कराना बेहद फलदायक होता है। यह पूजा पितृ पक्ष या फिर किसी बड़ी अमाव्सया के दिन ही करानी चाहिए।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।*


