झोपड़ी में लगी आग, 3 माह के नवजात समेत दो मासूम बच्चों की जलकर मौत
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह।शनिवार को एमपी के दमोह जिले के देहात थाना क्षेत्र के झिरा गांव में दोपहर घंस पूस की झोपड़ी में आग लगने से उसके अंदर मौजूद दो बच्चे दर्दनाक तरीके से जल कर मर गए। घटना के समय ही मां में पानी भर गया था इसी दौरान यह हादसा हो गया। मां ने झोपड़ी में आग की लपटें देखीं तो स्थानीय लोगों को मदद के लिए बुलाया। पानी आग से बचने का प्रयास किया गया, तब तक दोनों बच्चों का दम टूट गया। सूचना मिलने के बाद एसपी राकेश कुमार सिंह और देहात थाना पुलिस ने भी रेगिस्तान पर पंहुचे और मामले की जानकारी प्रशासन की ओर से क्षति पीड़ित परिवार को उचित सहायता प्रदान की है।
पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सागर जिले के बंडा के रहने वाले भगवानदास रावत अपनी पत्नी जानकी और दोनों बच्चों के साथ नरसिंहगढ़ चौकी के झिरा गांव में बलवंत पटेल के यहां मजदूरी करते और खेत में झोपड़ी रहते थे। पति खेतों की रखवाली करता था। एक बच्चे का तीन माह पहले ही जन्म हो गया है। शनिवार की दोपहर पति भगवानदास के खेतों की ओर गया था और मां खेत पर बनी घंस – पूस की झोपड़ी में चूल्हे पर खाना बना रहा था और उसके अंदर उनके दो बच्चे ऋषिका 3 साल और बाबू तीन माह थे। मां का पानी लेने से इसी दौरान आंग की चिंगारी से झोपड़ी में आग लग गई और कुछ ही देर में पूरी झोपड़ी से आग की लपटें उठने लगीं।
मां ने झोपड़ी से आग उगलती हैं तो आसपास रहने वाले लोगों को साथ ही अपने पति के पास खबर भिजवाई। स्थानीय लोगों ने आग के अंदर भागने का प्रयास किया, लेकिन पूरी तरह से आग में जलकर खाक हो गया और दोनों बच्चों की रहस्यमयी मौत हो गई। अपनी आंखों के सामने दोनों बच्चों को जिंदा जलता देख मां सहम गई और उसका रोकर बुरा हाल है, वहीं पिता भी बेसुध है। डेड किड्स के अंकल हल्ले ने बताया कि भाभी जान का रावत खाना बना रही थी और भाई चना की चिथड़े कर रहे थे, इसी दौरान झोपड़ी में आग लगने से दोनों बच्चों की मौत हो गई।
सूचना ही मिलते नरसिंहगढ़ चौकी पुलिस घटना स्थल और मामले की जानकारी ली। उसी वक्त मिलने के बाद दमोह के एसपी राकेश कुमार सिंह भी पहुंचे और उन्होंने पति-पत्नी से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। परिवार की हर संभव मदद की जाएगी।



