डायबिटीज के मरीजों में ह्रदय रोग ही मृत्यू का कारण बनता है : डॉ. एसजेड अली
व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । देश में डायबिटीज की बीमारी तेजी से घर करती जा रही है डायबिटीज के दुष्प्रभाव से गुर्दे, हार्ट व आंखे तक डैमेज हो जाती है। डायबिटीज के बीमारी का समय पर इलाज हो जाए तो मरीज के शरीर के अन्य अंगो को डैमेज होने से बचाया जा सकता है। बीमारी के इलाज के लिए नई तकनीक और नई दवाएं आ गई है। उक्त उदगार आईएमसी द्वारा मधुमेह पर आयोजित जांच शिविर में डा. एसजेड अली ने व्यक्त किए। उन्होने डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारी में एक नई दवा एसजीएलटी 2 इनहिबिटर के बारे में जानकारी दी। उन्होने उपस्थित मरीजों की कई शंकाओं का समाधान भी किया। उन्होंने बताया कि एम्पास्टिलफोनि नामक दवा न केवल मधुमेह को नियंत्रित करता है बल्कि इस रोग से ह्रदय एवं गुर्दे पर होने वाले दुष्प्रवाहों को भी कम करता है। डा. अली ने बताया कि अधिकांश डायबिटीज के मरीजों में ह्रदय रोग ही मृत्यू का करण बनता है। तथा गुर्दे की खराबी हृदय रोग में आग में घी का काम करती है। डायबिटीज को भारत वर्ष में विशेष कृपा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हमारे देश को डायबिटीज की राजधानी का खिताब दिया है। जिसके अनुसार आने वाले 15-20 वर्षो में लगभग 7 करोड़ डायबिटीज के मरीज भारत में होगें। जिनमें से 1 प्रतिशत लोग अपने पैरों को अल्सर या गैंग्रीन के करण खो देगें। उन्होंने बताया कि यह एक अत्यंत चिंतनीय विषय हैं। क्योंकि 7 करोड़ रोगियों में से 50 प्रतिशत 35 से 45 वर्ष के होगें। उन्होने मधुमेह के मरीजों को नियमित व्यायाम या कम से कम 5 किमी पैदल चलने की सलाह दी ताकि मधुमेह के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके।



