दूल्हा बने श्रीराम, भक्त बने बाराती, श्रद्धालुओं ने जमकर बधाई नृत्य किया
रिपोर्टर : रवि राय
जमुनिया । ग्राम जमुनिया के उचेरा पातालेश्वर हनुमान मन्दिर में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पाचवे दिन जमुनिया के सिद्ध श्री हनुमान मंदिर से से श्रीराम बारात मंगलवार को निकली गई जो ग्राम के मुख्य मार्ग से होती हुई उचेरा पातालेशवर हनुमान मंदिर पहुची। बारात में भक्त बाराती बनकर शामिल हुए।
कथा वाचक पं. हितेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर कंस का वध किया। भगवान विष्णु ने राम अवतार लेते हैं और दुष्टों का संहार करते संसार में धर्म और सत्य की स्थापना की। उन्होंने कहा कि अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा। कर्म तो हमें करना ही होगा। कथा वाचक पं. हितेश कृष्ण शास्त्री ने बताया कि जब भगवान राम ने जनकपुरी की प्रतिज्ञा अनुसार भगवान शिव के धनुष को तोड़ दिया तब सीता ने राम के गले में वरमाला डाल दी। राजा जनक ने अयोध्यापुरी राजा दशरथ को बरात लेकर आने का निमंत्रण दिया गया।
तब राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुरी आए जहां पर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चारों पुत्रों का विवाह संपन्न कराया जाता है। कथा में भगवान राम और सीता जी की सुंदर झांकी सजाई गई। जहां पर कथा आयोजन करता एवं ग्राम वासियों द्वारा भगवान राम जानकी के पैर पखारे और मंगल गीत गाए गए। भजनों की धुन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने जमकर बधाई नृत्य किया। कथा सुनने के स्थानीय रहवासियों सहित बड़ी संख्या में आसपास के गांव के लोग पहुंच रहे हैं। कथा शाम 1 बजे से 5 बजे तक चल रही है।




